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चालीसा

उत्पन्ना एकादशी का चालीसा
उत्पन्ना एकादशी का चालीसा
उत्पन्ना एकादशी सनातन धर्म में एक महत्वपूर्ण तिथि है, जो भगवान विष्णु की पूजा के लिए समर्पित है। वैसे तो हर माह में दो एकादशी आती है, लेकिन उत्पन्ना एकादशी का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि इस दिन मां एकादशी का जन्म हुआ था।
Shri Mahalaxmi Chalisa (श्री महालक्ष्मी चालीसा)
Shri Mahalaxmi Chalisa (श्री महालक्ष्मी चालीसा)
जय जय श्री महालक्ष्मी करूं माता तव ध्यान।
सिद्ध काज मम किजिए निज शिशु सेवक जान।।
Shri Narmada Chalisa (श्री नर्मदा चालीसा)
Shri Narmada Chalisa (श्री नर्मदा चालीसा)
देवि पूजित, नर्मदा, महिमा बड़ी अपार।
चालीसा वर्णन करत, कवि अरु भक्त उदार॥
Sri Rani Sati Chalisa (श्री रानीसती चालीसा)
Sri Rani Sati Chalisa (श्री रानीसती चालीसा)
श्री गुरु पद पंकज नमन, दुषित भाव सुधार I
राणी सती सू विमल यश, बरणौ मति अनुसार II
Ravidas Chalisa (रविदास चालीसा)
Ravidas Chalisa (रविदास चालीसा)
बन्दौ वीणा पाणि को , देहु आय मोहिं ज्ञान।
Shri Santoshi Mata Chalisa (श्री संतोषी माता चालीसा)
Shri Santoshi Mata Chalisa (श्री संतोषी माता चालीसा)
श्री गणपति पद नाय सिर , धरि हिय शारदा ध्यान ।
सन्तोषी मां की करूँ , कीरति सकल बखान ।
Shri Saraswati Chalisa (श्री सरस्वती चालीसा)
Shri Saraswati Chalisa (श्री सरस्वती चालीसा)
जनक जननि पद कमल रज, निज मस्तक पर धारि।
बन्दौं मातु सरस्वती, बुद्धि बल दे दातारि॥
श्री रामदेव चालीसा (Shri Ramdev Chalisa)
श्री रामदेव चालीसा (Shri Ramdev Chalisa)
जय जय जय प्रभु रामदे, नमो नमो हरबार।
लाज रखो तुम नन्द की, हरो पाप का भार।
Shri Ram Chalisa (श्री राम चालीसा)
Shri Ram Chalisa (श्री राम चालीसा)
आदौ राम तपोवनादि गमनं हत्वाह् मृगा काञ्चनं
वैदेही हरणं जटायु मरणं सुग्रीव संभाषणं
Shri Navgraha Chalisa (श्री नवग्रह चालीसा)
Shri Navgraha Chalisa (श्री नवग्रह चालीसा)
श्री गणपति गुरुपद कमल, प्रेम सहित सिरनाय ।
नवग्रह चालीसा कहत, शारद होत सहाय ॥
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