Logo

स्तोत्र

दुर्गा सप्तशती पंचम अध्याय | Devya Doot Samvad | Durga Saptashati Chapter 5 Hindi
दुर्गा सप्तशती पंचम अध्याय | Devya Doot Samvad | Durga Saptashati Chapter 5 Hindi
दुर्गा सप्तशती का पंचम अध्याय “देव्या दूत संवाद” देवी माहात्म्य का महत्वपूर्ण भाग है, जिसमें देवी और शुंभ-निशुंभ के दूत के बीच संवाद का वर्णन है। इस अध्याय में देवी के आत्मविश्वास, संकल्प और दिव्य शक्ति का अद्भुत चित्रण मिलता है। इसका पाठ करने से साहस, आत्मबल और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा प्राप्त होती है। नवरात्रि के दौरान इसका जप विशेष फलदायी माना जाता है।
दुर्गा सप्तशती चतुर्थ अध्याय | Shakradi Stuti | Durga Saptashati Chapter 4 Hindi
दुर्गा सप्तशती चतुर्थ अध्याय | Shakradi Stuti | Durga Saptashati Chapter 4 Hindi
दुर्गा सप्तशती का चतुर्थ अध्याय “शक्रादि स्तुति” देवी माहात्म्य का अत्यंत महत्वपूर्ण भाग है, जिसमें देवताओं द्वारा मां चंडी की महिमा और स्तुति का वर्णन किया गया है। इस अध्याय का पाठ करने से भय, संकट और नकारात्मकता दूर होती है और जीवन में सुख, शांति के साथ देवी कृपा का आगमन होता है। नवरात्रि के दौरान इसका पाठ विशेष फलदायी माना जाता है।
दुर्गा सप्तशती तृतीय अध्याय | Mahishasur Vadh | Durga Saptashati Chapter 3 Hindi
दुर्गा सप्तशती तृतीय अध्याय | Mahishasur Vadh | Durga Saptashati Chapter 3 Hindi
दुर्गा सप्तशती का तृतीय अध्याय “महिषासुर वध” देवी माहात्म्य का अत्यंत महत्वपूर्ण भाग है, जिसमें मां महालक्ष्मी द्वारा महिषासुर का संहार और अधर्म पर धर्म की विजय का वर्णन किया गया है। इस अध्याय का पाठ करने से जीवन में शक्ति, साहस और आत्मविश्वास का संचार होता है तथा नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है। नवरात्रि के दौरान इस अध्याय का पाठ विशेष फलदायी माना जाता है।
दुर्गा सप्तशती द्वितीय अध्याय | Mahishasur Sainya Vadh | Durga Saptashati Chapter 2 Hindi
दुर्गा सप्तशती द्वितीय अध्याय | Mahishasur Sainya Vadh | Durga Saptashati Chapter 2 Hindi
दुर्गा सप्तशती का द्वितीय अध्याय “महिषासुर सैन्य वध” देवी माहात्म्य का अत्यंत महत्वपूर्ण भाग है, जिसमें मां महालक्ष्मी के दिव्य स्वरूप और उनके द्वारा असुर सेना के विनाश का वर्णन किया गया है। इस अध्याय का पाठ करने से जीवन में साहस, शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है तथा सभी प्रकार के संकट दूर होते हैं। इस अध्याय का पाठ नवरात्रि के दूसरे दिन किया जाता है।
दुर्गा सप्तशती प्रथम अध्याय | Durga Saptashati Chapter 1 Hindi
दुर्गा सप्तशती प्रथम अध्याय | Durga Saptashati Chapter 1 Hindi
दुर्गा सप्तशती का प्रथम अध्याय “मधुकैटभ वध” देवी माहात्म्य का प्रारंभिक और अत्यंत महत्वपूर्ण भाग है। इसमें मां महाकाली की शक्ति और उनके द्वारा असुरों के संहार का वर्णन किया गया है। इस अध्याय का पाठ करने से जीवन के सभी भय, संकट और नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं तथा भक्त को शक्ति, साहस और देवी कृपा प्राप्त होती है। इस अध्याय का पाठ नवरात्रि में पहले दिन किया जाता है।
श्रीरामरक्षास्तोत्र | Shri Ram Raksha Stotra Lyrics in Hindi
श्रीरामरक्षास्तोत्र | Shri Ram Raksha Stotra Lyrics in Hindi
राम रक्षा स्तोत्र एक अत्यंत शक्तिशाली स्तोत्र है, जिसकी रचना ऋषि बुध कौशिक ने की थी। इस स्तोत्र का नियमित पाठ करने से भगवान श्रीराम की कृपा प्राप्त होती है, जिससे जीवन के सभी भय, कष्ट और नकारात्मक शक्तियां दूर हो जाती हैं। नवरात्रि में नौ दिन पाठ करने से ये स्तोत्र सिद्ध होता है और जातक को सुरक्षा, साहस और मानसिक शांति प्रदान करता है।
नवदुर्गा स्तोत्र
नवदुर्गा स्तोत्र
यह पावन नव दुर्गा स्तोत्रम् मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना का दिव्य माध्यम है। नवरात्रि के पवित्र नौ दिनों में या प्रतिदिन इसका श्रद्धापूर्वक पाठ करने से भक्त को मां शैलपुत्री से लेकर सिद्धिदात्री तक सभी स्वरूपों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस स्तोत्र के जप से जीवन में शक्ति, साहस, सुख-समृद्धि, सफलता और सिद्धि की प्राप्ति होती है तथा सभी कष्ट दूर होते हैं।
महिषासुरमर्दिनि स्तोत्रम् (Mahishasuramardini Stotram)
महिषासुरमर्दिनि स्तोत्रम् (Mahishasuramardini Stotram)
महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र माता दुर्गा की स्तुति में रचित एक अत्यंत प्रसिद्ध और शक्तिशाली स्तोत्र है। इस स्तोत्र में देवी दुर्गा के महिषासुर पर विजय प्राप्त करने की महिमा का वर्णन किया गया है। “अयि गिरि नंदिनी नंदित मेदिनी” से शुरू होने वाला यह स्तोत्र भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है और नवरात्रि के समय विशेष रूप से इसका पाठ किया जाता है।
दुर्गा कीलक स्तोत्र (Durga Kilak Stotra)
दुर्गा कीलक स्तोत्र (Durga Kilak Stotra)
कीलकम् का पाठ देवी कवचम् और अर्गला स्तोत्रम् के बाद किया जाता है। और इसके बाद वेदोक्तम् रात्रि सूक्तम् का पाठ किया जाता है। कीलकम् एक महत्वपूर्ण स्तोत्रम् है जो चण्डी पाठ से पहले सुनाया जाता है। इसके पाठ से माता रानी प्रसन्न होकर आशीर्वाद प्रदान करती हैं।
अथ वेदोक्तं रात्रिसूक्तम् (Ath Vedokta Ratri Suktam)
अथ वेदोक्तं रात्रिसूक्तम् (Ath Vedokta Ratri Suktam)
वेदोक्तं रात्रिसूक्तम् ऋग्वेद में वर्णित एक प्रसिद्ध वैदिक सूक्त है, जिसमें रात्रि देवी की स्तुति की गई है। इस सूक्त में रात्रि को एक दिव्य शक्ति के रूप में वर्णित किया गया है जो संसार की रक्षा करती है और अंधकार में भी सुरक्षा प्रदान करती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार वेदोक्तं रात्रिसूक्तम् का पाठ करने से भय और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती।
HomeBook PoojaBook PoojaChadhavaChadhavaKundliKundliPanchangPanchang