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स्तोत्र

दुर्गा सप्तशती नवम अध्याय | निशुंभ वध | Durga Saptashati Chapter 9 Hindi
दुर्गा सप्तशती नवम अध्याय | निशुंभ वध | Durga Saptashati Chapter 9 Hindi
दुर्गा सप्तशती का नवम अध्याय “निशुंभ वध” देवी माहात्म्य का अत्यंत वीरता और पराक्रम से भरपूर प्रसंग है। इसमें देवी चंडिका और असुर निशुंभ के बीच भीषण युद्ध का वर्णन मिलता है। निशुंभ अपनी विशाल सेना और अनेक आयुधों के साथ देवी पर आक्रमण करता है, लेकिन अंततः मां दुर्गा अपनी दिव्य शक्ति से उसका वध करती हैं। यह अध्याय दर्शाता है कि अहंकार और अधर्म चाहे कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, देवी शक्ति के सामने उसका अंत निश्चित है। इसका पाठ करने से शत्रु बाधा, भय और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है तथा आत्मबल और विजय की प्राप्ति होती है। नवरात्रि में इसका जप अत्यंत फलदायी माना जाता है।
दुर्गा सप्तशती अष्टम अध्याय | रक्तबीज वध | Durga Saptashati Chapter 8 Hindi
दुर्गा सप्तशती अष्टम अध्याय | रक्तबीज वध | Durga Saptashati Chapter 8 Hindi
दुर्गा सप्तशती का अष्टम अध्याय “रक्तबीज वध” देवी माहात्म्य का अत्यंत रहस्यमयी और शक्तिशाली प्रसंग है, जिसमें रक्तबीज नामक असुर का वर्णन है, जिसकी हर रक्त बूंद से नया असुर उत्पन्न हो जाता था। इस अध्याय में मां चामुंडा (काली) अपने विस्तृत मुख से रक्त को पीकर उसकी शक्ति का अंत करती हैं और देवी चंडिका उसे मारती हैं। यह अध्याय दर्शाता है कि बुराई चाहे कितनी भी बढ़ती जाए, देवी शक्ति के सामने उसका अंत निश्चित है। इसका पाठ करने से नकारात्मक ऊर्जा, भय और बाधाओं का नाश होता है तथा जीवन में विजय और सुरक्षा प्राप्त होती है। नवरात्रि में इसका जप अत्यंत फलदायी माना जाता है।
दुर्गा सप्तशती सप्तम अध्याय | चंड-मुंड वध | Durga Saptashati Chapter 7 Hindi
दुर्गा सप्तशती सप्तम अध्याय | चंड-मुंड वध | Durga Saptashati Chapter 7 Hindi
दुर्गा सप्तशती का सप्तम अध्याय “चंड-मुंड वध” देवी माहात्म्य का अत्यंत उग्र और शक्तिशाली प्रसंग है, जिसमें मां दुर्गा के क्रोध से उत्पन्न काली स्वरूप का वर्णन मिलता है। इस अध्याय में देवी काली चंड और मुंड नामक भयंकर असुरों का वध करती हैं और देवी चामुंडा के रूप में प्रसिद्ध होती हैं। यह अध्याय दर्शाता है कि जब अधर्म अपनी सीमा पार करता है, तब देवी अपने उग्र रूप में प्रकट होकर उसका संहार करती हैं। इसका पाठ करने से भय, शत्रु और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है तथा साहस और सुरक्षा की प्राप्ति होती है। नवरात्रि में इसका जप विशेष रूप से शक्ति और विजय प्रदान करता है।
दुर्गा सप्तशती षष्ठ अध्याय | धूम्रलोचन वध | Durga Saptashati Chapter 6 Hindi
दुर्गा सप्तशती षष्ठ अध्याय | धूम्रलोचन वध | Durga Saptashati Chapter 6 Hindi
दुर्गा सप्तशती का षष्ठ (छठवां) अध्याय “धूम्रलोचन वध” देवी माहात्म्य का अत्यंत शक्तिशाली प्रसंग है, जिसमें मां अम्बिका द्वारा शुंभ-निशुंभ के सेनापति धूम्रलोचन का संहार वर्णित है। इस अध्याय में देवी की अद्भुत शक्ति का वर्णन मिलता है, जहां वे केवल अपने “हूंकार” से ही दैत्य का अंत कर देती हैं और उनका वाहन सिंह पूरी असुर सेना का विनाश करता है। इस अध्याय का पाठ करने से शत्रुओं का नाश, भय से मुक्ति और आत्मबल में वृद्धि होती है। नवरात्रि में इसका जप विशेष रूप से रक्षा और विजय प्रदान करता है।
शिव स्तुति: आशुतोष शशाँक शेखर
शिव स्तुति: आशुतोष शशाँक शेखर
आशुतोष शशाँक शेखर, चन्द्र मौली चिदंबरा,
कोटि कोटि प्रणाम शम्भू, कोटि नमन दिगम्बरा ॥
दुर्गा सप्तशती पंचम अध्याय | Devya Doot Samvad | Durga Saptashati Chapter 5 Hindi
दुर्गा सप्तशती पंचम अध्याय | Devya Doot Samvad | Durga Saptashati Chapter 5 Hindi
दुर्गा सप्तशती का पंचम अध्याय “देव्या दूत संवाद” देवी माहात्म्य का महत्वपूर्ण भाग है, जिसमें देवी और शुंभ-निशुंभ के दूत के बीच संवाद का वर्णन है। इस अध्याय में देवी के आत्मविश्वास, संकल्प और दिव्य शक्ति का अद्भुत चित्रण मिलता है। इसका पाठ करने से साहस, आत्मबल और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा प्राप्त होती है। नवरात्रि के दौरान इसका जप विशेष फलदायी माना जाता है।
दुर्गा सप्तशती चतुर्थ अध्याय | Shakradi Stuti | Durga Saptashati Chapter 4 Hindi
दुर्गा सप्तशती चतुर्थ अध्याय | Shakradi Stuti | Durga Saptashati Chapter 4 Hindi
दुर्गा सप्तशती का चतुर्थ अध्याय “शक्रादि स्तुति” देवी माहात्म्य का अत्यंत महत्वपूर्ण भाग है, जिसमें देवताओं द्वारा मां चंडी की महिमा और स्तुति का वर्णन किया गया है। इस अध्याय का पाठ करने से भय, संकट और नकारात्मकता दूर होती है और जीवन में सुख, शांति के साथ देवी कृपा का आगमन होता है। नवरात्रि के दौरान इसका पाठ विशेष फलदायी माना जाता है।
दुर्गा सप्तशती तृतीय अध्याय | Mahishasur Vadh | Durga Saptashati Chapter 3 Hindi
दुर्गा सप्तशती तृतीय अध्याय | Mahishasur Vadh | Durga Saptashati Chapter 3 Hindi
दुर्गा सप्तशती का तृतीय अध्याय “महिषासुर वध” देवी माहात्म्य का अत्यंत महत्वपूर्ण भाग है, जिसमें मां महालक्ष्मी द्वारा महिषासुर का संहार और अधर्म पर धर्म की विजय का वर्णन किया गया है। इस अध्याय का पाठ करने से जीवन में शक्ति, साहस और आत्मविश्वास का संचार होता है तथा नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है। नवरात्रि के दौरान इस अध्याय का पाठ विशेष फलदायी माना जाता है।
दुर्गा सप्तशती द्वितीय अध्याय | Mahishasur Sainya Vadh | Durga Saptashati Chapter 2 Hindi
दुर्गा सप्तशती द्वितीय अध्याय | Mahishasur Sainya Vadh | Durga Saptashati Chapter 2 Hindi
दुर्गा सप्तशती का द्वितीय अध्याय “महिषासुर सैन्य वध” देवी माहात्म्य का अत्यंत महत्वपूर्ण भाग है, जिसमें मां महालक्ष्मी के दिव्य स्वरूप और उनके द्वारा असुर सेना के विनाश का वर्णन किया गया है। इस अध्याय का पाठ करने से जीवन में साहस, शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है तथा सभी प्रकार के संकट दूर होते हैं। इस अध्याय का पाठ नवरात्रि के दूसरे दिन किया जाता है।
दुर्गा सप्तशती प्रथम अध्याय | Durga Saptashati Chapter 1 Hindi
दुर्गा सप्तशती प्रथम अध्याय | Durga Saptashati Chapter 1 Hindi
दुर्गा सप्तशती का प्रथम अध्याय “मधुकैटभ वध” देवी माहात्म्य का प्रारंभिक और अत्यंत महत्वपूर्ण भाग है। इसमें मां महाकाली की शक्ति और उनके द्वारा असुरों के संहार का वर्णन किया गया है। इस अध्याय का पाठ करने से जीवन के सभी भय, संकट और नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं तथा भक्त को शक्ति, साहस और देवी कृपा प्राप्त होती है। इस अध्याय का पाठ नवरात्रि में पहले दिन किया जाता है।
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