दुर्गा सप्तशती अष्टम अध्याय | रक्तबीज वध | Durga Saptashati Chapter 8 Hindiदुर्गा सप्तशती का अष्टम अध्याय “रक्तबीज वध” देवी माहात्म्य का अत्यंत रहस्यमयी और शक्तिशाली प्रसंग है, जिसमें रक्तबीज नामक असुर का वर्णन है, जिसकी हर रक्त बूंद से नया असुर उत्पन्न हो जाता था। इस अध्याय में मां चामुंडा (काली) अपने विस्तृत मुख से रक्त को पीकर उसकी शक्ति का अंत करती हैं और देवी चंडिका उसे मारती हैं। यह अध्याय दर्शाता है कि बुराई चाहे कितनी भी बढ़ती जाए, देवी शक्ति के सामने उसका अंत निश्चित है। इसका पाठ करने से नकारात्मक ऊर्जा, भय और बाधाओं का नाश होता है तथा जीवन में विजय और सुरक्षा प्राप्त होती है। नवरात्रि में इसका जप अत्यंत फलदायी माना जाता है।