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स्तोत्र

श्रीरामरक्षास्तोत्र | Shri Ram Raksha Stotra Lyrics in Hindi
श्रीरामरक्षास्तोत्र | Shri Ram Raksha Stotra Lyrics in Hindi
राम रक्षा स्तोत्र एक अत्यंत शक्तिशाली स्तोत्र है, जिसकी रचना ऋषि बुध कौशिक ने की थी। इस स्तोत्र का नियमित पाठ करने से भगवान श्रीराम की कृपा प्राप्त होती है, जिससे जीवन के सभी भय, कष्ट और नकारात्मक शक्तियां दूर हो जाती हैं। नवरात्रि में नौ दिन पाठ करने से ये स्तोत्र सिद्ध होता है और जातक को सुरक्षा, साहस और मानसिक शांति प्रदान करता है।
नवदुर्गा स्तोत्र
नवदुर्गा स्तोत्र
यह पावन नव दुर्गा स्तोत्रम् मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना का दिव्य माध्यम है। नवरात्रि के पवित्र नौ दिनों में या प्रतिदिन इसका श्रद्धापूर्वक पाठ करने से भक्त को मां शैलपुत्री से लेकर सिद्धिदात्री तक सभी स्वरूपों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस स्तोत्र के जप से जीवन में शक्ति, साहस, सुख-समृद्धि, सफलता और सिद्धि की प्राप्ति होती है तथा सभी कष्ट दूर होते हैं।
महिषासुरमर्दिनि स्तोत्रम् (Mahishasuramardini Stotram)
महिषासुरमर्दिनि स्तोत्रम् (Mahishasuramardini Stotram)
महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र माता दुर्गा की स्तुति में रचित एक अत्यंत प्रसिद्ध और शक्तिशाली स्तोत्र है। इस स्तोत्र में देवी दुर्गा के महिषासुर पर विजय प्राप्त करने की महिमा का वर्णन किया गया है। “अयि गिरि नंदिनी नंदित मेदिनी” से शुरू होने वाला यह स्तोत्र भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है और नवरात्रि के समय विशेष रूप से इसका पाठ किया जाता है।
दुर्गा कीलक स्तोत्र (Durga Kilak Stotra)
दुर्गा कीलक स्तोत्र (Durga Kilak Stotra)
कीलकम् का पाठ देवी कवचम् और अर्गला स्तोत्रम् के बाद किया जाता है। और इसके बाद वेदोक्तम् रात्रि सूक्तम् का पाठ किया जाता है। कीलकम् एक महत्वपूर्ण स्तोत्रम् है जो चण्डी पाठ से पहले सुनाया जाता है। इसके पाठ से माता रानी प्रसन्न होकर आशीर्वाद प्रदान करती हैं।
अथ वेदोक्तं रात्रिसूक्तम् (Ath Vedokta Ratri Suktam)
अथ वेदोक्तं रात्रिसूक्तम् (Ath Vedokta Ratri Suktam)
वेदोक्तं रात्रिसूक्तम् ऋग्वेद में वर्णित एक प्रसिद्ध वैदिक सूक्त है, जिसमें रात्रि देवी की स्तुति की गई है। इस सूक्त में रात्रि को एक दिव्य शक्ति के रूप में वर्णित किया गया है जो संसार की रक्षा करती है और अंधकार में भी सुरक्षा प्रदान करती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार वेदोक्तं रात्रिसूक्तम् का पाठ करने से भय और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती।
तन्त्रोक्तं रात्रिसूक्तम् (Ath Tantroktam Ratri Suktam)
तन्त्रोक्तं रात्रिसूक्तम् (Ath Tantroktam Ratri Suktam)
तन्त्रोक्तं रात्रिसूक्तम् देवी दुर्गा की स्तुति में वर्णित एक महत्वपूर्ण स्तोत्र है, जो दुर्गा सप्तशती में वर्णित है। इस स्तोत्र में देवी की उस दिव्य शक्ति की स्तुति की गई है जो सम्पूर्ण सृष्टि की रक्षा करती है और भक्तों के भय, कष्ट और बाधाओं को दूर करती है।
दुर्गाद्वात्रिंशन्नाममाला (Ath Durgadwatrishanmala)
दुर्गाद्वात्रिंशन्नाममाला (Ath Durgadwatrishanmala)
दुर्गाद्वात्रिंशन्नाममाला माता दुर्गा के 32 पवित्र नामों का एक महत्वपूर्ण स्तोत्र है। इस स्तोत्र में देवी दुर्गा के विभिन्न दिव्य स्वरूपों और शक्तियों का वर्णन किया गया है। देवी के इन 32 नामों का स्मरण करने से संकट दूर होते हैं और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। विशेष रूप से नवरात्रि, दुर्गा पूजा और देवी साधना के समय दुर्गाद्वात्रिंशन्नाममाला का पाठ अत्यंत शुभ माना जाता है।
देव्यपराधक्षमापनस्तोत्रम् (Devyaparadha Kshamapana Stotram)
देव्यपराधक्षमापनस्तोत्रम् (Devyaparadha Kshamapana Stotram)
देव्यपराध क्षमापन स्तोत्रम् देवी दुर्गा की स्तुति में रचित एक अत्यंत भावपूर्ण स्तोत्र है, जिसमें भक्त अपने द्वारा जाने-अनजाने में हुए अपराधों के लिए माता से क्षमा मांगता है। इस स्तोत्र में भक्त अपनी अज्ञानता और त्रुटियों को स्वीकार करते हुए देवी से कृपा और क्षमा की प्रार्थना करता है। नवरात्रि, दुर्गा पूजा और देवी साधना के बाद देव्यपराध क्षमापन स्तोत्र का पाठ करना अनिवार्य माना जाता है।
सिद्ध-कुञ्जिका स्तोत्रम् (Siddha Kunjika Stotram)
सिद्ध-कुञ्जिका स्तोत्रम् (Siddha Kunjika Stotram)
सिद्ध कुञ्जिका स्तोत्रम् देवी दुर्गा की उपासना में अत्यंत महत्वपूर्ण स्तोत्र माना जाता है। यह स्तोत्र दुर्गा सप्तशती का एक गुप्त और शक्तिशाली मंत्रात्मक स्तोत्र है, जिसके बारे में मान्यता है कि इसके पाठ से चंडी पाठ का पूर्ण फल प्राप्त होता है। नवरात्रि, दुर्गा पूजा और देवी साधना के समय इस स्तोत्र का पाठ अत्यंत शुभ माना जाता है।
दकारादि श्री दुर्गा सहस्त्रनाम स्तोत्रम्  (Dakaradi Shri Durga Sahasranama Stotram)
दकारादि श्री दुर्गा सहस्त्रनाम स्तोत्रम् (Dakaradi Shri Durga Sahasranama Stotram)
दकारादि दुर्गा सहस्त्रनाम देवी दुर्गा के हजार पवित्र नामों का एक महत्वपूर्ण स्तोत्र है, जिसमें अधिकांश नाम ‘द’ अक्षर से प्रारंभ होते हैं। इस स्तोत्र में माता दुर्गा के विभिन्न दिव्य स्वरूपों और शक्तियों का वर्णन किया गया है। इस स्तोत्र का पाठ करने से भक्तों को साहस, शक्ति और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा प्राप्त होती है। विशेष रूप से नवरात्रि और देवी साधना के समय दकारादि दुर्गा सहस्त्रनाम का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
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