सनातन धर्म में शुभ कार्यों की शुरुआत करने से पहले शुभ तिथि और मुहूर्त का महत्व बहुत अधिक है। यह मान्यता है कि शुभ तिथि और मुहूर्त में किया गया कार्य अवश्य सफल होता है।
उपनयन संस्कार, जिसे जनेऊ संस्कार के नाम से भी जाना जाता है। हिंदू धर्म में 16 संस्कारों में से 10वां संस्कार है। यह संस्कार पुरुषों में जनेऊ धारण करने की पारंपरिक प्रथा को दर्शाता है, जो सदियों से चली आ रही है।
हिंदू धर्म की समृद्ध परंपरा में "सोलह संस्कार" का महत्वपूर्ण स्थान है, जो जीवन के हर महत्वपूर्ण पड़ाव को दिशा देते हैं। इन संस्कारों में से एक है अन्नप्राशन, जब बच्चा पहली बार ठोस आहार का स्वाद लेता है।
नई दुकान खोलना एक महत्वपूर्ण कदम है जिसमें आपके भविष्य की सफलता और समृद्धि की नींव रखी जाती है। हिंदू पंचांग के अनुसार, किसी भी नए उद्यम की शुरुआत करने से पहले शुभ मुहूर्त और तिथि का चयन करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
हिंदू धर्म में 16 संस्कारों का विशेष महत्व है और उनमें नौवां संस्कार है कर्णवेध। यह संस्कार बच्चे के कान छिदवाने का समय होता है जो सामान्यतः 1 से 5 वर्ष की उम्र में किया जाता है।
बच्चे के जन्म के बाद हिंदू परंपरा में एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान किया जाता है जिसे मुंडन संस्कार कहा जाता है। यह अनुष्ठान न केवल धार्मिक महत्व रखता है बल्कि यह व्यक्ति की आत्मा की शुद्धि और नई शुरुआत का प्रतीक भी है।
बसंत के सुहावने मौसम में शादी करना आपके लिए एक सपने जैसा अनुभव हो सकता है। यह महीना सर्दियों के ठंडे दिनों से गर्म दिनों में परिवर्तन का प्रतीक है जो शादी के लिए एक खास और यादगार समय बनाता है।
मार्च का महीना नई शुरुआत और उत्साह का प्रतीक है, जब लोग अपने जीवन में नए लक्ष्यों को प्राप्त करने की योजना बनाते हैं। चाहे वह अपने करियर में नए अवसरों की तलाश हो, अपने सपनों का घर बनाना हो, या जीवन के नए अध्याय की शुरुआत करना हो I
आज 12 फरवरी 2025 माघ माह का 30वां दिन का है और आज इस पंचांग के अनुसार माघ माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि है। वहीं आज बुधवार का दिन है। इस तिथि पर सौभाग्य योग का संयोग बन रहा है।
आज 11 फरवरी 2025 माघ माह का 29वां दिन का है और आज इस पंचांग के अनुसार माघ माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि है। वहीं आज मंगलवार का दिन है। इस तिथि पर सौभाग्य और आयुष्मान योग का संयोग बन रहा है।