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Karnavedha Muhurat February 2026 (कर्णवेध संस्कार शुभ मुहूर्त फरवरी 2026)

Karnavedha Muhurat February 2026 (कर्णवेध संस्कार शुभ मुहूर्त फरवरी 2026)

February 2025 karnavedha Muhurat: फरवरी 2026 में कर रहे हैं कर्णवेध संस्कार या कान छेदन प्लान? यहां जानें शुभ मुहूर्त और नक्षत्र

हिंदू धर्म में 16 संस्कारों में से नौवां है कर्णवेध संस्कार, जिसमें बच्चे के कान छिदवाए जाते हैं। यह सामान्यतः 1 से 5 वर्ष की उम्र में किया जाता है। मान्यता है कि सही मुहूर्त में कर्णवेध कराने से बच्चे की सुनने की क्षमता, बुद्धिमत्ता, सौंदर्य और स्वास्थ्य में सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। परंपरा के अनुसार, लड़कों का पहले दायां कान और लड़कियों का पहले बायां कान छेदा जाता है। इस लेख में हम कर्णवेध संस्कार से जुड़ी खास बातें और फरवरी 2026 के कर्णवेध के शुभ मुहूर्त जानेंगे।

कर्णवेध संस्कार शुभ मुहूर्त फरवरी 2026 

पंचांग के अनुसार, जनवरी माह में कर्णवेध संस्कार के लिए 6 शुभ मुहूर्त है, जो इस प्रकार है- 

  • 06 फरवरी, कर्णवेध संस्कार शुभ मुहूर्त: 09:33 एएम से 10:24 एएम तक, नक्षत्र: हस्त, लग्न: मीन, तिथि: कृष्ण पंचमी
  • 06 फरवरी, कर्णवेध संस्कार शुभ मुहूर्त: 11:59 एएम से 01:41 पीएम तक, नक्षत्र: हस्त, लग्न: वृषभ, तिथि: कृष्ण पंचमी
  • 11 फरवरी, कर्णवेध संस्कार शुभ मुहूर्त: 09:58 एएम से 10:04 एएम तक, नक्षत्र: अनुराधा, लग्न: मीन, तिथि: कृष्ण दशमी
  • 26 फरवरी, कर्णवेध संस्कार शुभ मुहूर्त: 07:40 एएम से 09:05 एएम तक, नक्षत्र: मृगशिरा, लग्न: मीन, तिथि: शुक्ल दशमी
  • 26 फरवरी, कर्णवेध संस्कार शुभ मुहूर्त: 10:40 एएम से 12:11 पीएम तक, नक्षत्र: मृगशिरा, लग्न: वृषभ, तिथि: शुक्ल दशमी
  • 27 फरवरी, कर्णवेध संस्कार शुभ मुहूर्त: 10:48 एएम से 11:31 एएम तक, नक्षत्र: पुनर्वसु, लग्न: वृषभ, तिथि: शुक्ल एकादशी

कर्णवेध संस्कार का महत्व

कर्णवेध संस्कार एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान है जो बच्चे के जीवन में सकारात्मक प्रभाव लाने के लिए किया जाता है। कुछ स्थानों पर कर्णवेध को "कथु कुथु" भी कहा जाता है, जिसका हिंदी में अर्थ है - कान छिदवाना। यह संस्कार बच्चे की सुंदरता, बुद्धि, और सुनने की क्षमता में वृद्धि करने के लिए किया जाता है। इसके अलावा यह संस्कार बच्चे को हर्निया जैसी गंभीर बीमारी से बचाने में मदद करता है और लकवा आदि आने की आशंका को कम करता है। यह संस्कार बच्चे के जीवन में समृद्धि, सुख और स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में मदद करता है।

कर्णवेध संस्कार से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातें

  • बच्चे के जन्म के महीने में कर्णवेध न करें।
  • कर्णवेध संस्कार सुबह सूर्योदय के बाद और दोपहर से पहले संपन्न करना चाहिए।
  • आप अपने बच्चों के जन्म के बारहवें या 16वें दिन भी कर्णवेध संस्कार करवा सकते हैं।
  • बहुत से लोग बच्चे के जन्म के छठे, सातवें या फिर आठवें महीने में भी यह संस्कार पूरा करवाते हैं।
  • इसके अलावा प्राचीन मान्यताओं के अनुसार कहा जाता है कि यदि यह संस्कार बच्चों के जन्म के 1 साल के अंदर नहीं किया जाता है, तो फिर इसे विषम वर्ष यानी तीसरे, पांचवें या फिर सातवें वर्ष में करा लेना चाहिए।

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