हिंदू धर्म में 16 संस्कारों का विशेष महत्व है, जिनमें नौवां संस्कार कर्णवेध माना जाता है। यह संस्कार बच्चे के कान छिदवाने से जुड़ा होता है, जिसे आमतौर पर 1 से 5 वर्ष की उम्र में शुभ मुहूर्त में किया जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सही समय पर किया गया कर्णवेध संस्कार बच्चे के स्वास्थ्य, बुद्धिमत्ता और सुनने की क्षमता के लिए शुभ माना जाता है। हिंदू परंपरा में लड़कों का दायां और लड़कियों का बायां कान पहले छेदने की मान्यता है। इस लेख में हम कर्णवेध संस्कार से जुड़ी अहम जानकारियों के साथ वर्ष 2026 के शुभ मुहूर्त के बारे में बताएंगे।
पंचांग के अनुसार, यहां हम कर्णवेध संस्कार के लिए शुभ तिथियां, मुहूर्त और अनुकूल नक्षत्रों की जानकारी दे रहे हैं-
जनवरी 2026 में कर्णवेध संस्कार के शुभ मुहूर्त इसलिए नहीं मिलते क्योंकि ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस माह ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति अनुकूल नहीं मानी गई है। कर्णवेध के लिए वर्जित तिथियां, अशुभ नक्षत्र, गुरु की प्रतिकूल स्थिति और खरमास जैसे योग इस दौरान पड़ सकते हैं, साथ ही बच्चे की चंद्र और तारा शुद्धि भी हर दिन संभव नहीं होती। इन्हीं कारणों से जनवरी 2026 में व्यापक रूप से मान्य शुभ मुहूर्त नहीं दर्शाए गए हैं, हालांकि व्यक्तिगत कुंडली के आधार पर ज्योतिषी से परामर्श लेकर मुहूर्त निकाला जा सकता है।
05 मार्च 2026, कर्णवेध संस्कार शुभ मुहूर्त: 10:13 एएम से 12:08 पीएम तक, नक्षत्र: हस्त, लग्न: वृषभ, तिथि: कृष्ण द्वितीया
अप्रैल 2026 में कर्णवेध संस्कार के लिए शुभ मुहूर्त नहीं मिलने का मुख्य कारण सूर्य का धनु और मीन राशि में गोचर (खरमास) और अन्य ग्रहों की अनुकूल न होने वाली स्थितियां हैं। इस दौरान चतुर्मास या अमावस्या, नवमी, चतुर्दशी जैसी वर्जित तिथियों के कारण भी मुहूर्त नहीं होते। इसलिए अप्रैल में व्यापक रूप से शुभ समय नहीं दिखता, लेकिन मई या अन्य अनुकूल महीनों में बच्चे की जन्मतिथि और ग्रहों की स्थिति अनुसार शुभ मुहूर्त निकल सकते हैं।
14 मई 2026, कर्णवेध संस्कार शुभ मुहूर्त: 05:38 एएम से 07:33 एएम तक, नक्षत्र: रेवती, लग्न: वृषभ, तिथि: कृष्ण द्वादशी
जून 2026 में कर्णवेध संस्कार के लिए शुभ मुहूर्त नहीं बनने का मुख्य कारण गुरु ग्रह की अनुकूल न होने वाली स्थिति, शुभ महीनों का अभाव और नक्षत्रों का अनुकूल न होना है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, कर्णवेध के लिए गुरु का शुभ लग्न, विशेष नक्षत्र और कार्तिक, चैत्र, पौष, फाल्गुन जैसे महीने अनुकूल माने जाते हैं, जबकि जून में ये सभी योग उपलब्ध नहीं होते, इसलिए इस माह में व्यापक रूप से शुभ मुहूर्त नहीं दिखाई देते।
जुलाई 2026 में कर्णवेध संस्कार के लिए शुभ मुहूर्त नहीं मिलने का मुख्य कारण गुरु और सूर्य की अनुकूल न होने वाली स्थिति, खरमास और चातुर्मास (हरि शयन) जैसी निषेध अवधि है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, कार्तिक, चैत्र, पौष और फाल्गुन जैसे शुभ महीने, विशेष नक्षत्र और गुरु का शुभ लग्न कर्णवेध के लिए आवश्यक हैं, लेकिन जुलाई में ये सभी अनुकूल परिस्थितियां उपलब्ध नहीं होतीं, इसलिए इस माह में शुभ मुहूर्त नहीं बनते।
अगस्त 2026 में कर्णवेध संस्कार के लिए शुभ मुहूर्त नहीं मिलने का मुख्य कारण सूर्य का सिंह राशि में होना और चातुर्मास (हरि शयन) जैसी निषेध अवधि है। इस दौरान ग्रहों की स्थिति और नक्षत्र-तिथियां अनुकूल नहीं रहतीं, इसलिए अगस्त में कर्णवेध के लिए कोई विशेष शुभ मुहूर्त नहीं बनता। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, कार्तिक, चैत्र, पौष और फाल्गुन जैसे महीने, विशेष नक्षत्र और गुरु का शुभ लग्न कर्णवेध के लिए आवश्यक हैं, जो इस माह उपलब्ध नहीं होते।
सितंबर 2026 में कर्णवेध संस्कार के लिए शुभ मुहूर्त कम या न होने का मुख्य कारण गुरु की अनुकूल न होने वाली स्थिति, अशुभ नक्षत्र और तिथियां, मलमास या चातुर्मास जैसी निषेध अवधि है। इस दौरान कार्तिक, चैत्र, पौष और फाल्गुन जैसे शुभ महीने उपलब्ध नहीं होते और गुरु का गोचर अशुभ राशियों में होने के कारण शुभ मुहूर्त नहीं बनते, इसलिए सितंबर में कर्णवेध के लिए कोई विशेष समय उपयुक्त नहीं होता।
अक्टूबर 2026 में कर्णवेध संस्कार के शुभ मुहूर्त इसलिए स्पष्ट रूप से नहीं दिखते क्योंकि इस माह गुरु (बृहस्पति) की स्थिति अनुकूल नहीं रहती और शुभ नक्षत्र-तिथियों का आवश्यक संयोग नहीं बन पाता। साथ ही अमावस्या, रिक्ता तिथियों, संभावित खरमास या चातुर्मास जैसे निषेध काल के कारण भी यह संस्कार वर्जित माना जाता है, इसलिए अक्टूबर में व्यापक रूप से मान्य शुभ मुहूर्त उपलब्ध नहीं है।
26 नवम्बर, कर्णवेध संस्कार शुभ मुहूर्त: 08:29 एएम से 10:33 एएम तक, नक्षत्र: मृगशिरा, लग्न: धनु, तिथि: कृष्ण द्वितीया