हिंदू धर्म में 16 संस्कारों का विशेष महत्व है, जिनमें मुंडन संस्कार को भी एक अहम स्थान प्राप्त है। इसे चूड़ाकरण संस्कार भी कहा जाता है, जो बच्चे के जीवन का पहला संस्कार माना जाता है। यह संस्कार सामान्यतः 1 से 3 वर्ष की आयु में शुभ मुहूर्त में किया जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सही समय पर किया गया मुंडन संस्कार बच्चे के स्वास्थ्य, बुद्धि और दीर्घायु के लिए शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे नकारात्मक प्रभाव दूर होते हैं और बालक के जीवन की सकारात्मक शुरुआत होती है। इस लेख में हम मुंडन संस्कार से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियों के साथ वर्ष 2026 के शुभ मुहूर्त के बारे में बताएंगे।
सनातन धर्म में मुंडन संस्कार को एक अनिवार्य और महत्वपूर्ण संस्कार माना गया है, जिसे शुभ मुहूर्त में संपन्न किया जाता है। धार्मिक दृष्टि से यह संस्कार पूर्व जन्म के पापों के नाश, आत्मा की शुद्धि और बच्चे के जीवन की नई एवं सकारात्मक शुरुआत का प्रतीक माना जाता है, जिससे उसके जीवन में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। वैज्ञानिक रूप से मुंडन संस्कार सिर की स्वच्छता बनाए रखने, त्वचा और बालों की सेहत सुधारने तथा मानसिक शांति प्रदान करने में सहायक माना जाता है। मान्यता है कि इससे बच्चे की बुद्धि और स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसके साथ ही, पारंपरिक और सांस्कृतिक रूप से यह संस्कार परिवार और समाज में मान-सम्मान एवं संस्कारों की निरंतरता को दर्शाता है।
पंचांग के अनुसार, यहां हम मुंडन संस्कार के लिए शुभ तिथियां, मुहूर्त और अनुकूल नक्षत्रों की जानकारी दे रहे हैं-
जनवरी 2026 में मुंडन संस्कार के लिए कुछ शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं, जिनमें 21 जनवरी और 29 जनवरी प्रमुख हैं। पंचांग के अनुसार कई दिनों में सूर्य या बृहस्पति के अस्त होने, भद्रा, राहुकाल या अन्य पंचांग दोषों के कारण मुहूर्त नहीं बन पाते। सामान्य रूप से माघ–फाल्गुन (जनवरी–फरवरी) का समय मुंडन के लिए शुभ माना जाता है, लेकिन हर तिथि पर ग्रहों की स्थिति समान नहीं होती। इसलिए सटीक मुहूर्त शिशु की कुंडली, चंद्र-तारा शुद्धि और ग्रहों की दशा देखकर ही तय किया जाता है। इसी कारण जनवरी 2026 में 21 और 29 जनवरी जैसी कुछ चुनिंदा तिथियों पर ही मुंडन संस्कार के शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सूर्य के मीन राशि में प्रवेश करने पर मीन संक्रांति या खरमास का समय शुरू हो जाता है, जिसे मुंडन संस्कार के लिए अशुभ माना जाता है, इसलिए मार्च के मध्य के बाद कुछ अवधि वर्जित हो सकती है। वहीं हिंदू पंचांग में चैत्र मास का आरंभ (मार्च के अंत में) कुछ क्षेत्रों में मुंडन के लिए टाल दिया जाता है, हालांकि शास्त्रों में इसे पूरी तरह अशुभ नहीं माना गया है। इसके अलावा, यदि बच्चे के जन्म नक्षत्र या उस दिन चंद्रमा की स्थिति अनुकूल न हो, तो उस तिथि पर भी मुंडन का शुभ मुहूर्त नहीं बनता।
मई 2026 में मुंडन संस्कार के शुभ मुहूर्त कम या स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं होने का कारण ग्रहों की अनुकूल न होने वाली स्थिति और पंचांग दोष माने जाते हैं। इस दौरान ग्रहों का अस्त होना, संक्रांति या अन्य अशुभ योग मुहूर्त को प्रभावित करते हैं, हालांकि कुछ पंचांगों में मई के अंत या जून की शुरुआत की कुछ तिथियां संभावित बताई गई हैं, लेकिन अंतिम निर्णय बच्चे की कुंडली और स्थान के अनुसार ज्योतिषीय परामर्श के बाद ही उपयुक्त माना जाता है।
25 जुलाई से देवशयनी एकादशी के कारण चातुर्मास शुरू हो जाता है, इसलिए उसके बाद मुंडन के मुहूर्त नहीं होते। इस दौरान तिथि, नक्षत्र और लग्न का विशेष ध्यान रखना जरूरी है, और शुभ दिन सामान्यतः सोमवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार माने जाते हैं। स्थानीय शहर के अनुसार मुहूर्त में थोड़ी भिन्नता हो सकती है।
अगस्त 2026 में मुंडन संस्कार के लिए कोई शुभ मुहूर्त नहीं है। इसका मुख्य कारण 25 जुलाई से शुरू होने वाला चातुर्मास है, जिसके दौरान मुंडन और अन्य मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं।
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, चातुर्मास (25 जुलाई 2026 से) के दौरान अधिकांश मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं, लेकिन पंचांग में कुछ तिथियां मुंडन संस्कार के लिए उपयुक्त बताई गई हैं। मुंडन के लिए सोमवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार को सबसे उत्तम माना जाता है। सटीक मुहूर्त के लिए बालक की जन्म कुंडली और चंद्र शुद्धि का ध्यान रखना आवश्यक है, और अंतिम निर्णय से पहले अपने पारिवारिक पुरोहित या किसी विशेषज्ञ ज्योतिषी से परामर्श लेना चाहिए।
अक्टूबर 2026 में मुंडन संस्कार के लिए कोई विशेष शुभ मुहूर्त उपलब्ध नहीं है। इसका मुख्य कारण चातुर्मास के दौरान अधिकांश मांगलिक कार्य वर्जित होना है। कुछ पंचांगों में दशहरा (20 अक्टूबर) और दिवाली (9 नवंबर) के आस-पास अबूझ मुहूर्त दिखाए जाते हैं, लेकिन शास्त्रों के अनुसार अक्टूबर में मुंडन के लिए उपयुक्त समय नहीं बनता।
नवंबर में 2026 में मुंडन संस्कार के लिए शुभ मुहूर्त न होने का मुख्य कारण चातुर्मास है, जो 25 जुलाई (देवशयनी एकादशी) से 20 नवंबर 2026 (देवोत्थान एकादशी) तक रहेगा। इस अवधि में मुंडन जैसे मांगलिक संस्कार वर्जित माने जाते हैं। मुंडन के लिए सोमवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार को सबसे उत्तम दिन माना जाता है। चूंकि नवंबर में मुख्य मुहूर्त सीमित हैं, इसलिए बच्चे की जन्म कुंडली और चंद्र शुद्धि के अनुसार किसी विद्वान ज्योतिषी से व्यक्तिगत परामर्श लेना जरूरी है।