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ज्ञानगंगा

छठ पूजा अर्घ्य विधि
छठ पूजा अर्घ्य विधि
छठ पूजा बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में प्रमुखता से मनाया जाने वाला पर्व है। जिसमें सूर्य देव और छठी मैया की पूजा की जाती है।
छठ पर्व में लोहंडा क्या है
छठ पर्व में लोहंडा क्या है
छठ महापर्व का दूसरा दिन खरना कहलाता है। जिसे लोहंडा भी कहा जाता है। इस दिन का उद्देश्य मानसिक और शारीरिक शुद्धिकरण है।
एकांत कमरे में होता है खरना का व्रत
एकांत कमरे में होता है खरना का व्रत
छठ पूजा के दूसरे दिन को खरना कहा जाता है। इसी दिन से व्रतधारी प्रसाद ग्रहण कर 36 घंटे के निर्जला व्रत का आरंभ करते हैं। इस दिन खरना विशेष महत्व रखता है और इसे एकांत या बंद कमरे में संपन्न किया जाता है।
खरना का प्रसाद बनाने की विधि
खरना का प्रसाद बनाने की विधि
छठ पूजा में खरना का दिन बहुत महत्व रखता है। इस दिन के बाद से व्रत करने वाले 36 घंटे तक बिना जल के उपवास रखते हैं। खरना के दिन व्रती नए मिट्टी के चूल्हे पर गुड़, दूध, और साठी के चावल से प्रसाद तैयार करते हैं।
खरना पूजा के नियम
खरना पूजा के नियम
लोक आस्था के चार दिवसीय महापर्व छठ पूजा की शुरुआत 5 नवंबर से नहाय खाय के साथ हो चुकी है। यह पर्व दिवाली के बाद मनाया जाता है और खासकर उत्तर भारत में इसका विशेष महत्व है।
छठ पूजा की सामग्री लिस्ट 2024
छठ पूजा की सामग्री लिस्ट 2024
कार्तिक मास में शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से सप्तमी तक मनाया जाने वाला छठ महापर्व सूर्य देव और छठी मईया की आराधना का पर्व है। इस साल यह 5 नवंबर 2024 को नहाय-खाय से शुरू होगा और 8 नवंबर को उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के साथ समाप्त होगा।
छठ पर्व में जरूर करें ये उपाय
छठ पर्व में जरूर करें ये उपाय
छठ पूजा का पर्व आस्था, संयम और शुद्धता का प्रतीक है। इसे बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में बड़े उत्साह से मनाया जाता है।
छठ पूजा के पहले दिन नहाय-खाय पूजा विधि
छठ पूजा के पहले दिन नहाय-खाय पूजा विधि
छठ पूजा 5 नवंबर से नहाय-खाय के साथ शुरू होने जा रहा है। यह 04 दिनों तक चलने वाला पर्व है। जो शुद्धता, संकल्प और यम- नियमों पर आधारित है।
देश में भगवान चित्रगुप्त के टॉप 5 मंदिर
देश में भगवान चित्रगुप्त के टॉप 5 मंदिर
भारत में भगवान चित्रगुप्त जी के कई प्रमुख मंदिर हैं। जिनमें पटना, गोरखपुर, कांचीपुरम और उज्जैन के मंदिर विशेष महत्व रखते हैं। ये मंदिर वास्तुकला, सांस्कृतिक धरोहर और धार्मिक आस्था का प्रतीक माने जाते हैं।
भाई दूज पर बहनें इस समय न करें तिलक
भाई दूज पर बहनें इस समय न करें तिलक
भाई दूज 2024: भाई दूज पर बहनें शुभ मुहूर्त में अपने भाई को तिलक लगाकर उनके दीर्घायु और समृद्धि की कामना करती हैं। यह त्योहार भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक है और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार विशेष धार्मिक महत्व रखता है।
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