Logo

ज्ञानगंगा

विनायक चतुर्थी 2025
विनायक चतुर्थी 2025
पंचांग के अनुसार पौष माह में साल 2025 की पहली विनायक चतुर्थी 03 जनवरी को मनाई जाएगी। पौष माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरुआत 03 जनवरी को देर रात 01 बजकर 08 मिनट पर शुरू होगी।
विनायक चतुर्थी 2025 लिस्ट
विनायक चतुर्थी 2025 लिस्ट
सनातन धर्म में विनायक चतुर्थी का विशेष महत्व है। इस दिन भगवान गणेश की पूजा विधिवत रूप से करने का विधान है। विनायक चतुर्थी का व्रत हर महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है।
महाकुंभ में अखाड़ों की पेशवाई क्यों होती है
महाकुंभ में अखाड़ों की पेशवाई क्यों होती है
महाकुंभ की शुरुआत में 15 दिन से कम का समय रह गया है। 13 जनवरी से इसकी शुरुआत होने जा रही है।इससे पहले अलग-अलग अखाड़े प्रयागराज में अपनी पेशवाई निकल रहे हैं और नगर प्रवेश कर रहे हैं।
संगम में स्नान से किसकी पूजा होती है
संगम में स्नान से किसकी पूजा होती है
हिंदू धर्म की धार्मिक परंपराओं में प्रयागराज का खास स्थान है। यहां का त्रिवेणी संगम बेहद पवित्र माना जाता है। इस जगह पर गंगा, यमुना और सरस्वती नदी का मिलन होता है।
प्रयागराज के प्रमुख घाट
प्रयागराज के प्रमुख घाट
प्रयागराज को भारत की धार्मिक राजधानी कहा जाता है। यह नगर सदियों से हिंदुओं की आस्था का केंद्र हुआ है। यहां गंगा, यमुना और सरस्वती नदी का संगम होता है।
आचमन क्यों करते हैं?
आचमन क्यों करते हैं?
पूजा-पाठ से लेकर विशेष अनुष्ठान एवं हवन इत्यादि सभी तरह की पूजा में आचमन आवश्यक है। आचमन का शाब्दिक अर्थ है ‘मंत्रोच्चारण के साथ जल को ग्रहण करते हुए शरीर, मन और हृदय को शुद्ध करना।’ शास्त्रों में आचमन की विभिन्न विधियों के बारे में बताया गया है। आचमन किए बगैर पूजा अधूरी मानी जाती है।
अखाड़ों के नगर प्रवेश की प्रक्रिया क्या है
अखाड़ों के नगर प्रवेश की प्रक्रिया क्या है
महाकुंभ को हिंदू धर्म का सबसे बड़ा धार्मिक अनुष्ठान कहा गया है। अखाड़े इस धार्मिक अनुष्ठान की रौनक है, जो इसकी शोभा बढ़ाते हैं। इनका नगर प्रवेश हमेशा से एक चर्चा का विषय होता है।
नागा साधु  किसकी पूजा करते हैं?
नागा साधु किसकी पूजा करते हैं?
नागा साधु भारत की प्राचीन धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। वे केवल सनातन धर्म के संरक्षक भी माने जाते हैं। इनका जीवन कठोर तपस्चर्या, शैव परंपराओं और भगवान शिव की भक्ति में बीतता है। नागा साधु धार्मिक अनुष्ठानों के विशेषज्ञ होते हैं। साथ ही हिंदू धर्म की रक्षा में भी ऐतिहासिक योगदान भी देते हैं।
नागा भभूत क्यों लगाते हैं?
नागा भभूत क्यों लगाते हैं?
नागा साधु अपने पूरे शरीर पर भभूत लगाते हैं। ये हमेशा नग्न अवस्था में ही नजर आते हैं। चाहे कोई भी मौसम हो, उनके शरीर पर वस्त्र नहीं होते। वे शरीर पर भस्म लपेटकर घूमते हैं। नागाओं में भी दिगंबर साधु ही शरीर पर भभूत लगाते हैं। यह भभूत ही उनका वस्त्र और श्रृंगार होता है। यह भभूत उन्हें बहुत सारी आपदाओं से बचाता भी है।
गणेश विसर्जन की परंपरा कैसे शुरू हुई
गणेश विसर्जन की परंपरा कैसे शुरू हुई
सनातन धर्म में गणेश चतुर्थी का पर्व धूम-धाम से मनाया जाता है। इस दौरान भक्त पूरी श्रद्धा के साथ गणपति जी का अपने घर में स्वागत करते हैं। इस उत्सव को 10 दिनों तक मनाया जाता है। लोग अपनी श्रद्धा के अनुसार, डेढ़ दिन, 3 दिन, 5 दिन, 7 दिन या 10 दिनों के लिए गणेश जी की स्थापना करते हैं।
HomeBook PoojaBook PoojaChadhavaChadhavaKundliKundliPanchangPanchang