जो अपनी स्वरूपभूत विविध शासन-शक्तियों द्वारा इन सब लोकों पर शासन करता है, वह रुद्र एक ही है, (इसीलिए विद्वान पुरुषों ने जगत के कारण का निश्चय करते समय दूसरे का आश्रय नहीं लिया)।
प्रातःकाल मैं उन भगवान शिव का स्मरण करता हूँ जो संसार के भय को हरने वाले हैं, देवताओं के स्वामी हैं, जिनके जटाओं में पवित्र गंगा विराजमान है, जो वृषभ (नंदी) पर सवार हैं और माता अंबा के पति हैं।
कल्याण एवं सुख के मूल स्रोत रूप भगवान् शिवको नमस्कार है। कल्याण के विस्तार करनेवाले तथा सुखके विस्तार करनेवाले भगवान् शिवको नमस्कार है। मण्डलस्वरूप और मण्डलमया की सीमा भगवान् शिवको नमस्कार है।
नरसिंह द्वादशी के दिन भगवान विष्णु के सिंह अवतार की पूजा की जाती है। पौराणिक कथा और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी तिथि पर भगवान विष्णु ने भक्त प्रहलाद की रक्षा करने के लिए नरसिंह रूप में अवतार लेकर हिरण्यकश्यप का वध किया था।