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स्तोत्र

श्रीदेव्यथर्वशीर्षम् (Sri Devi Atharvashirsha)
श्रीदेव्यथर्वशीर्षम् (Sri Devi Atharvashirsha)
देव्यथर्वशीर्षम् जिसे देवी अथर्वशीर्ष के नाम से भी जाना जाता है, चण्डी पाठ से पहले पाठ किए जाने वाले छह महत्वपूर्ण स्तोत्र का हिस्सा है।
अथ तन्त्रोक्तं रात्रिसूक्तम् (Ath Tantroktam Ratri Suktam)
अथ तन्त्रोक्तं रात्रिसूक्तम् (Ath Tantroktam Ratri Suktam)
तन्त्रोक्तम् रात्रि सूक्तम् यानी तंत्र से युक्त रात्रि सूक्त का पाठ कवच, अर्गला, कीलक और वेदोक्त रात्रि सूक्त के बाद किया जाता है।
अथ वेदोक्तं रात्रिसूक्तम् (Ath Vedokta Ratri Suktam)
अथ वेदोक्तं रात्रिसूक्तम् (Ath Vedokta Ratri Suktam)
वेदोक्तम् रात्रि सूक्तम् यानी वेद में वर्णन आने वाले इस रात्रि सूक्त का पाठ कवच, अर्गला और कीलक के बाद किया जाता है। इसके बाद तन्त्रोक्त रात्रि सूक्त और देव्यथर्वशीर्षम् स्तोत्रम् का पाठ किया जाता है।
अथ कीलकम् (Ath Keelakam)
अथ कीलकम् (Ath Keelakam)
कीलकम् का पाठ देवी कवचम् और अर्गला स्तोत्रम् के बाद किया जाता है और इसके बाद वेदोक्तम रात्रि सूक्तम् का पाठ किया जाता है। कीलकम् एक महत्वपूर्ण स्तोत्र है जो चण्डी पाठ से पहले सुनाया जाता है।
अथार्गलास्तोत्रम् (Athargala Stotram)
अथार्गलास्तोत्रम् (Athargala Stotram)
पवित्र ग्रंथ दुर्गा सप्तशती में देवी अर्गला का पाठ देवी कवचम् के बाद और कीलकम् से पहले किया जाता है। अर्गला को शक्ति के रूप में व्यक्त किया जाता है और यह चण्डी पाठ का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
अथ श्री देव्याः कवचम् (Ath Shree Devya Kavacham)
अथ श्री देव्याः कवचम् (Ath Shree Devya Kavacham)
देव्याः कवचम् का अर्थात देवी कवच यानी रक्षा करने वाला ढाल होता है ये व्यक्ति के शरीर के चारों ओर एक प्रकार का आवरण बना देता है, जिससे नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है।
श्रीदुर्गाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् (Durga Ashtottara Shatanama Stotram)
श्रीदुर्गाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् (Durga Ashtottara Shatanama Stotram)
दुर्गाअष्टोत्तरशतनामस्तोत्र एक पवित्र हिंदू मंत्र या स्तोत्र है, जिसमें देवी दुर्गा के 108 नामों का वर्णन है। यह स्तोत्र दुर्गा सप्तशती के अंदर आता है और देवी दुर्गा की महिमा और शक्ति का वर्णन करता है।
आदित्य हृदय स्तोत्रम् (Aditya Hridaya Stotram)
आदित्य हृदय स्तोत्रम् (Aditya Hridaya Stotram)
ॐ अस्य आदित्यह्रदय स्तोत्रस्य, aaditya hriday stotra
ऋण-मोचक मंगल-स्तोत्रं (Rin Mochak Mangal Stotram)
ऋण-मोचक मंगल-स्तोत्रं (Rin Mochak Mangal Stotram)
मंगलो भूमिपुत्रश्च ऋणहर्ता धनप्रद:। स्थिरासनो महाकाय: सर्व-कर्मावरोधकः॥1॥
काली सहस्त्रनाम (Kali Sahastranam)
काली सहस्त्रनाम (Kali Sahastranam)
श्मशान-कालिका काली भद्रकाली कपालिनी ।
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