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स्तोत्र

द्वादश ज्योतिर्लिङ्ग स्तोत्रम्
द्वादश ज्योतिर्लिङ्ग स्तोत्रम्
सौराष्ट्रदेशे विशदेऽतिरम्ये ज्योतिर्मयं चन्द्रकलावतंसम् | भक्तिप्रदानाय कृपावतीर्णं तं सोमनाथं शरणं प्रपद्ये || १||
द्वादशज्योतिर्लिङ्गस्मरणम्
द्वादशज्योतिर्लिङ्गस्मरणम्
सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्। उज्जयिन्यां महाकालमोङ्कारममलेश्वरम् ॥ १ ॥
वेदसारशिवस्तवः
वेदसारशिवस्तवः
पशूनां पतिं पापनाशं परेशं गजेन्द्रस्य कृत्तिं वसानं वरेण्यम। जटाजूटमध्ये स्फुरद्गाङ्गवारिं महादेवमेकं स्मरामि स्मरारिम।1।
श्रीशिवापराधक्षमापनस्तोत्रम्
श्रीशिवापराधक्षमापनस्तोत्रम्
आदौ कर्मप्रसङ्गात् कलयति कलुषं मातृकुक्षौ स्थितं मां विण्मूत्रामेध्यमध्ये क्वथयति नितरां जाठरो जातवेदाः ।
शिवमानस पूजा
शिवमानस पूजा
रत्नैः कल्पितमासनं हिमजलैः स्नानं च दिव्याम्बरं नानारत्नविभूषितं मृगमदामोदाङ्कितं चन्दनम् ।
सदा शिव के विभिन्न स्वरूपों का ध्यान
सदा शिव के विभिन्न स्वरूपों का ध्यान
यो धत्ते भुवनानि सप्त गुणवान् स्त्रष्टा रजःसंश्रयः संहर्ता तमसान्वितो गुणवतीं मायामतीत्य स्थितः ।
शिव महिमा एवं स्तुति
शिव महिमा एवं स्तुति
जो अपनी स्वरूपभूत विविध शासन-शक्तियों द्वारा इन सब लोकों पर शासन करता है, वह रुद्र एक ही है, (इसीलिए विद्वान पुरुषों ने जगत के कारण का निश्चय करते समय दूसरे का आश्रय नहीं लिया)।
श्री शिवप्रात:स्मरणस्त्रोतम्
श्री शिवप्रात:स्मरणस्त्रोतम्
प्रातःकाल मैं उन भगवान शिव का स्मरण करता हूँ जो संसार के भय को हरने वाले हैं, देवताओं के स्वामी हैं, जिनके जटाओं में पवित्र गंगा विराजमान है, जो वृषभ (नंदी) पर सवार हैं और माता अंबा के पति हैं।
 भगवान् शिवको नमस्कार
भगवान् शिवको नमस्कार
कल्याण एवं सुख के मूल स्रोत रूप भगवान् शिवको नमस्कार है। कल्याण के विस्तार करनेवाले तथा सुखके विस्तार करनेवाले भगवान् शिवको नमस्कार है। मण्डलस्वरूप और मण्डलमया की सीमा भगवान् शिवको नमस्कार है।
श्री नृसिंह द्वादशनाम स्तोत्रम्
श्री नृसिंह द्वादशनाम स्तोत्रम्
नरसिंह द्वादशी के दिन भगवान विष्णु के सिंह अवतार की पूजा की जाती है। पौराणिक कथा और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी तिथि पर भगवान विष्णु ने भक्त प्रहलाद की रक्षा करने के लिए नरसिंह रूप में अवतार लेकर हिरण्यकश्यप का वध किया था।
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