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स्तोत्र

गुरु प्रदोष व्रत: शिव मृत्युञ्जय स्तोत्र का पाठ
गुरु प्रदोष व्रत: शिव मृत्युञ्जय स्तोत्र का पाठ
प्रदोष व्रत त्रयोदशी तिथि को किया जाता है, जो भगवान शिव को समर्पित तिथि है। इस दिन भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। मार्गशीर्ष मास में कृष्ण पक्ष के प्रदोष व्रत का वर्णन और महत्व धार्मिक ग्रंथों और पंचांग में बताया गया है।
गोविंद दामोदर स्त्रोत
गोविंद दामोदर स्त्रोत
हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर मासिक कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाती है, जो भगवान श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्ति का एक शुभ अवसर है।
कृष्ण जन्माष्टमी स्त्रोत
कृष्ण जन्माष्टमी स्त्रोत
पंचांग के अनुसार, हर महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मासिक कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाती है। 3 का जन्म कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को हुआ था, इसलिए इस दिन को मासिक कृष्ण जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाता है।
छठी देवी स्तोत्र (Chhathi  Devi Stotram)
छठी देवी स्तोत्र (Chhathi Devi Stotram)
नमो देव्यै महादेव्यै सिद्ध्यै शान्त्यै नमो नम:।
शुभायै देवसेनायै षष्ठी देव्यै नमो नम: ।।
सूर्य स्तोत्र
सूर्य स्तोत्र
विकर्तनो विवस्वांश्च मार्तण्डो भास्करो रविः।
लोक प्रकाशकः श्री मांल्लोक चक्षुर्मुहेश्वरः ॥ लोकसाक्षी त्रिलोकेशः कर्ता हर्ता तमिस्रहा।
धन्वंतरि स्तोत्र (Dhanvantari Stotram)
धन्वंतरि स्तोत्र (Dhanvantari Stotram)
ॐ शंखं चक्रं जलौकां दधदमृतघटं चारुदोर्भिश्चतुर्मिः।
सूक्ष्मस्वच्छातिहृद्यांशुक परिविलसन्मौलिमंभोजनेत्रम॥
श्रीदुर्गाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् (Durga Ashtottara Shatanama Stotram)
श्रीदुर्गाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् (Durga Ashtottara Shatanama Stotram)
दुर्गाअष्टोत्तरशतनामस्तोत्र एक पवित्र हिंदू मंत्र या स्तोत्र है, जिसमें देवी दुर्गा के 108 नामों का वर्णन है। यह स्तोत्र दुर्गा सप्तशती के अंदर आता है और देवी दुर्गा की महिमा और शक्ति का वर्णन करता है।
आदित्य हृदय स्तोत्रम् (Aditya Hridaya Stotram)
आदित्य हृदय स्तोत्रम् (Aditya Hridaya Stotram)
ॐ अस्य आदित्यह्रदय स्तोत्रस्य, aaditya hriday stotra
ऋण-मोचक मंगल-स्तोत्रं (Rin Mochak Mangal Stotram)
ऋण-मोचक मंगल-स्तोत्रं (Rin Mochak Mangal Stotram)
मंगलो भूमिपुत्रश्च ऋणहर्ता धनप्रद:। स्थिरासनो महाकाय: सर्व-कर्मावरोधकः॥1॥
विष्णु सहस्त्रनाम (Vishnu Sahastranam )
विष्णु सहस्त्रनाम (Vishnu Sahastranam )
ॐ विश्वं विष्णु: वषट्कारो भूत-भव्य-भवत-प्रभुः ।
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