Logo

व्रत एवं त्यौहार

उगादी त्योहार क्यों मनाया जाता है
उगादी त्योहार क्यों मनाया जाता है
उगादि दक्षिण भारत में एक महत्वपूर्ण नववर्ष उत्सव होता है। "उगादि" शब्द संस्कृत के "युग" अर्थात् "युग की शुरुआत" और "आदि" अर्थात् "आरंभ" से मिलकर बना है, जिसका अर्थ होता है नए युग का आरंभ।
उगादि 2025 कब मनाई जाएगी
उगादि 2025 कब मनाई जाएगी
हिंदू पंचांग के अनुसार, उगादि पर्व चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है। इसे हिन्दू नववर्ष का पहला दिन माना जाता है। इसलिए इसकी तिथि और मुहूर्त जानना बहुत जरूरी होता है।
चैत्र अमावस्या पर ये गलतियां न करें
चैत्र अमावस्या पर ये गलतियां न करें
हिंदू धर्म में चैत्र अमावस्या का विशेष महत्व है। यह दिन पितृ शांति और आशीर्वाद की प्राप्ति के लिए बहुत शुभ माना जाता है।
चैत्र अमावस्या पर करें पितृ सूक्त पाठ
चैत्र अमावस्या पर करें पितृ सूक्त पाठ
हिंदू धर्म में चैत्र मास की अमावस्या का विशेष महत्व माना गया है। यह दिन पूर्वजों को याद करने और उनकी आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध कर्म और तर्पण करने के लिए शुभ माना जाता है।
भूतड़ी अमावस्या के उपाय
भूतड़ी अमावस्या के उपाय
चैत्र मास की अमावस्या को भूतड़ी अमावस्या भी कहते हैं। यह तिथि पितृ तर्पण, श्राद्ध और खास उपायों के लिए बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
चैत्र मासिक शिवरात्रि कब है
चैत्र मासिक शिवरात्रि कब है
प्रदोष व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा को समर्पित है। इस दिन व्रत और पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है। साथ ही जीवन में आने वाली सभी बाधाएं दूर होती हैं।
प्रदोष व्रत पर शिव की पूजा
प्रदोष व्रत पर शिव की पूजा
प्रदोष व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा को समर्पित है। इस दिन व्रत और पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है। साथ ही जीवन में आने वाली सभी बाधाएं दूर होती हैं।
चैत्र प्रदोष व्रत की तिथियां और मुहूर्त
चैत्र प्रदोष व्रत की तिथियां और मुहूर्त
सनातन धर्म में प्रदोष व्रत का बहुत महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रदोष व्रत महादेव और माता पार्वती को समर्पित है।
चैत्र में चंद्र दर्शन के मुहूर्त
चैत्र में चंद्र दर्शन के मुहूर्त
हिंदू धर्म में चंद्रमा को देवता समान माना जाता है और उनकी पूजा करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। चंद्र दर्शन का विशेष महत्व अमावस्या के बाद पहली बार चंद्रमा के दर्शन करने से जुड़ा हुआ है।
झूलेलाल जयंती क्यों और कैसे मनाए
झूलेलाल जयंती क्यों और कैसे मनाए
झूलेलाल जयंती, जिसे चेटीचंड के नाम से भी जाना जाता है, सिंधी समुदाय के लिए एक पवित्र और महत्वपूर्ण दिन होता है। यह पर्व चैत्र शुक्ल द्वितीया को मनाया जाता है, जो हिंदू नववर्ष के प्रारंभिक दिनों में आता है।
HomeBook PoojaBook PoojaChadhavaChadhavaKundliKundliPanchangPanchang