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कथा

धनतेरस की पौराणिक कथा
धनतेरस की पौराणिक कथा
कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाने वाला धनतेरस दीपावली उत्सव का प्रथम दिन माना जाता है। यह दिन धन, आरोग्य और समृद्धि का प्रतीक है। धर्मशास्त्रों के अनुसार, इस दिन समुद्र मंथन के समय भगवान धन्वंतरि अमृत कलश के साथ प्रकट हुए थे।
शारदीय नवरात्रि पौराणिक कहानी
शारदीय नवरात्रि पौराणिक कहानी
शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व मां दुर्गा की भक्ति और साधना के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा-अर्चना और व्रत किया जाता है, जिससे जातक को मां की विशेष कृपा प्राप्त होती है। देवी भागवत पुराण के अनुसार, नवरात्रि के व्रत की पूर्णता के लिए नवरात्रि व्रत कथा का पाठ करना अनिवार्य माना गया है।
शिव पुराण में महाशिवरात्रि कथा
शिव पुराण में महाशिवरात्रि कथा
हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को शिवरात्रि मनाई जाती है, जिसे मासिक शिवरात्रि कहते हैं। फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को महाशिवरात्रि के नाम से जाना जाता है, जिसका विशेष महत्व है। महाशिवरात्रि का पर्व शिव भक्तों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
तमिल हनुमान जयंती कथा
तमिल हनुमान जयंती कथा
तमिलनाडु में हनुमान जयंती मार्गशीर्ष अमावस्या के दौरान मनाई जाती है। यह दिन हनुमान जी को समर्पित है। हिंदू पौराणिक कथाओं में, हनुमान जी शक्ति, भक्ति और निस्वार्थ सेवा के प्रतीक हैं।
नरक चतुर्दशी की कथा (Narak Chaturdashi ki Katha)
नरक चतुर्दशी की कथा (Narak Chaturdashi ki Katha)
पौराणिक कथा के अनुसार भगवान कृष्ण अपनी पत्नियों के साथ द्वारिका में निवास कर रहे थे।
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि व्रत कथा
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि व्रत कथा
हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2025 में 26 जून से प्रारंभ होकर 4 जुलाई तक चलेगी। यह नवरात्रि विशेष रूप से तांत्रिक साधना, सिद्धि प्राप्ति और देवी दुर्गा की दस महाविद्याओं की उपासना के लिए जानी जाती है।
आदि गुरु शंकराचार्य की जीवन कथा
आदि गुरु शंकराचार्य की जीवन कथा
हिंदू धर्म में अनेक संत और महापुरुष हुए हैं, लेकिन आदि गुरु शंकराचार्य का स्थान उनमें सर्वोच्च है। उन्हें भगवान शिव का अवतार माना जाता है और हर साल वैशाख मास की शुक्ल पंचमी के दिन उनकी जयंती श्रद्धा और भक्ति से मनाई जाती है।
श्रीराम पर क्यों क्रोधित हुए थे परशुराम
श्रीराम पर क्यों क्रोधित हुए थे परशुराम
भगवान परशुराम भगवान विष्णु के छठे अवतार माने जाते हैं, जिनका जन्म ब्राह्मण कुल में हुआ था लेकिन उन्होंने क्षत्रिय धर्म अपनाया था। भगवान परशुराम के जन्म का उद्देश्य अधर्म और अत्याचार का अंत करना था।
भगवान परशुराम की 5 कथाएं
भगवान परशुराम की 5 कथाएं
परशुराम जयंती हर साल भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम की जयंती के रूप में अक्षय तृतीया की शुभ तिथि पर मनाई जाती है। इस साल यह पर्व 29 अप्रैल को पड़ रहा है।
परशुराम ने सहस्त्रबाहु का वध क्यों किया था
परशुराम ने सहस्त्रबाहु का वध क्यों किया था
हिंदू धर्म में भगवान परशुराम महान योद्धा और ऋषियों में से एक माने जाते हैं। वे भगवान विष्णु के छठे अवतार हैं, जिन्हें धर्म की रक्षा और अधर्म के विनाश के लिए जाना जाता है।
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