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व्रत एवं त्यौहार

सावन पूर्णिमा पर करें इन चीजों का दान
सावन पूर्णिमा पर करें इन चीजों का दान
श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को सावन पूर्णिमा कहा जाता है, जो भगवान शिव की आराधना का अंतिम और विशेष दिन माना जाता है। इस दिन शिव पूजा के साथ-साथ दान-पुण्य करने का विशेष महत्व है।
सावन पूर्णिमा पर लाएं ये शुभ चीजें
सावन पूर्णिमा पर लाएं ये शुभ चीजें
श्रावण मास का समापन सावन पूर्णिमा के दिन होता है, जो न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि आध्यात्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से भी अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए कई उपाय किए जाते हैं।
रक्षाबंधन पर बहन को न दें ये उपहार
रक्षाबंधन पर बहन को न दें ये उपहार
रक्षाबंधन भाई-बहन के रिश्ते की वह डोर है, जो हर साल श्रावण मास की पूर्णिमा को और मजबूत होती है। इस दिन बहनें भाई की कलाई पर रक्षा-सूत्र बांधकर उसकी लंबी उम्र की कामना करती हैं, वहीं भाई बहनों को उपहार देकर अपने स्नेह और वचन को प्रकट करता है।
रक्षाबंधन पर 100 साल बाद विशेष संयोग
रक्षाबंधन पर 100 साल बाद विशेष संयोग
इस साल रक्षाबंधन का पर्व सिर्फ भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक नहीं, बल्कि ग्रहों के विशेष संयोगों की दृष्टि से भी बेहद खास रहने वाला है। ज्योतिष शास्त्र के जानकारों के अनुसार, 9 अगस्त 2025 को रक्षाबंधन पर तीन ऐसे महत्वपूर्ण योग बन रहे हैं जो करीब सौ वर्षों बाद एक साथ देखने को मिलेंगे।
रक्षाबंधन 2025 राखी बांधने के मुहूर्त
रक्षाबंधन 2025 राखी बांधने के मुहूर्त
श्रावण माह की पूर्णिमा तिथि... भाई की कलाई पर राखी बंधती है, और बहन की आंखों में आशीर्वाद बनकर चमकते हैं प्रेम के मोती। रक्षाबंधन सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि वो डोर है जो भाई-बहन के रिश्ते को हर जन्म के लिए जोड़ देती है।
सावन पूर्णिमा 2025 तिथि और पूजा विधि
सावन पूर्णिमा 2025 तिथि और पूजा विधि
हिंदू धर्म में श्रावण मास यानी सावन का विशेष महत्व है। यह महीना भगवान शिव की आराधना और व्रत-उपवास के लिए जाना जाता है। श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को ही सावन पूर्णिमा कहा जाता है।
नारली पूर्णिमा क्यों मनाई जाती है
नारली पूर्णिमा क्यों मनाई जाती है
श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि भारतीय संस्कृति में अत्यंत विशेष मानी जाती है। यह दिन एक ओर जहां भाई-बहन के प्रेम के प्रतीक रक्षा बंधन के रूप में मनाया जाता है, वहीं दूसरी ओर समुद्र से जुड़ी मान्यताओं और समुद्र देवता वरुण की आराधना के पर्व नारली पूर्णिमा के रूप में भी इसे मनाया जाता है।
नारली पूर्णिमा की तिथि और मुहूर्त
नारली पूर्णिमा की तिथि और मुहूर्त
श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाने वाला नारली पूर्णिमा का पर्व विशेष रूप से समुद्र से जुड़े समुदायों, विशेषकर मछुआरों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। यह पर्व भगवान वरुण को समर्पित है, जो जल के देवता माने जाते हैं। नारली पूर्णिमा को ‘श्रावणी पूर्णिमा’ और ‘कोकोनट फुल मून’ के नाम से भी जाना जाता है।
रक्षाबंधन की पौराणिक कथाएं
रक्षाबंधन की पौराणिक कथाएं
रक्षाबंधन का पर्व आज जिस रूप में मनाया जाता है, उसकी जड़ें बेहद गहराई तक पौराणिक कथाओं में फैली हुई हैं। राखी केवल एक धागा नहीं, बल्कि रक्षक का वचन है और यह परंपरा हजारों साल पुरानी है।
रक्षाबंधन की थाली में क्या रखें
रक्षाबंधन की थाली में क्या रखें
रक्षाबंधन का पर्व केवल एक रक्षा-सूत्र बांधने की रस्म नहीं, बल्कि भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और श्रद्धा का पर्व है। हर साल सावन मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला यह उत्सव इस बार और भी खास रहने वाला है।
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