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व्रत एवं त्यौहार

जन्माष्टमी 2025: भगवान श्रीकृष्ण  प्रसिद्ध मंदिर
जन्माष्टमी 2025: भगवान श्रीकृष्ण प्रसिद्ध मंदिर
भगवान श्रीकृष्ण केवल एक देवता ही नहीं, बल्कि भक्ति, प्रेम और ज्ञान के अवतार भी माने जाते हैं। भारत में कई ऐसे मंदिर हैं जो उनकी दिव्यता और चचमत्कारी उपस्थिति से जुड़े हुए हैं।
भगवान कृष्ण के जन्म से जुड़ी कथा
भगवान कृष्ण के जन्म से जुड़ी कथा
हर साल जन्माष्टमी का त्योहार बड़े उल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जन्माष्टमी के दिन व्रत रखने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इस दिन यशोदा नंदन की विधिपूर्वक पूजा करने से सुख-समृद्धि का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है।
जन्माष्टमी पर 56 भोग का महत्व
जन्माष्टमी पर 56 भोग का महत्व
जन्माष्टमी का त्योहार हर साल पूरे भारत में बड़े उल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इस दिन भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव की खुशियों में मंदिरों और घरों में विशेष पूजा-अर्चना होती है।
जन्माष्टमी पर खीर का महत्व
जन्माष्टमी पर खीर का महत्व
हिंदू धर्म में जन्माष्टमी का पर्व भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। इस साल जन्माष्टमी 16 अगस्त 2025 को मनाई जाएगी। पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान कृष्ण का जन्म भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में हुआ था।
जन्माष्टमी की पौराणिक कथा
जन्माष्टमी की पौराणिक कथा
हर साल भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव जन्माष्टमी के रूप में पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, यह पर्व हर साल भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। श्रीकृष्ण जन्म की कथा भागवत पुराण सहित कई अन्य पुराणों में वर्णित है।
कजरी तीज पर करें ये उपाय
कजरी तीज पर करें ये उपाय
कजरी तीज, जिसे बड़ी तीज भी कहा जाता है, भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। यह व्रत विवाहित महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है क्योंकि इसे पति की लंबी उम्र, दांपत्य जीवन में सुख और अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए किया जाता है।
महिलाओं के लिए कजरी तीज का महत्व
महिलाओं के लिए कजरी तीज का महत्व
कजरी तीज, जिसे ‘बड़ी तीज’ भी कहा जाता है, भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। यह व्रत उत्तर भारत के कई राज्यों में विशेष रूप से विवाहित और अविवाहित महिलाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
बहुला चतुर्थी 2025 तिथि-मुहूर्त
बहुला चतुर्थी 2025 तिथि-मुहूर्त
हुला चतुर्थी, जिसे बहुला चौथ भी कहा जाता है, भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाई जाती है। यह व्रत मुख्य रूप से गौ माता की पूजा के लिए प्रसिद्ध है और विशेष रूप से मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े श्रद्धा भाव से मनाया जाता है।
भाद्रपद माह 2025
भाद्रपद माह 2025
पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास, जिसे भादो भी कहा जाता है, यह महीना चातुर्मास का हिस्सा होने के कारण विशेष संयम और सत्कर्म करने के लिए उपयुक्त माना जाता है। इसमें तपस्या, ब्रह्मचर्य और सात्विक आहार-विहार को अपनाना श्रेष्ठ माना गया है।
कजरी तीज व्रत कथा
कजरी तीज व्रत कथा
कजरी तीज उत्तर भारत के कई राज्यों में भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। यह व्रत विवाहित महिलाओं के लिए अखंड सौभाग्य, पति की लंबी आयु और परिवार में सुख-समृद्धि लाने वाला माना जाता है।
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