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फरवरी 2026 चौथे हफ्ते के व्रत-त्योहार

फरवरी 2026  चौथे हफ्ते के व्रत-त्योहार

February 2026 Vrat Tyohar: स्कंद षष्ठी से लेकर नृसिंह द्वादशी तक, फरवरी के चौथे हफ्ते में पड़ेंगे ये त्योहार

अंग्रेजी कैलेंडर के हिसाब से फरवरी साल का दूसरा महीना होता है। फरवरी का तीसरा हफ्ता विभिन्न व्रत और त्योहारों के मामले में सामान्य रहने वाला है। इस हफ्ते में स्कंद षष्ठी, मासिक दुर्गाष्टमी, आमलकी एकादशी, नृसिंह द्वादशी और अन्य त्योहार शामिल हैं। ये त्योहार न केवल हमारी सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा हैं, बल्कि हमारे जीवन को अध्यात्मिक और धार्मिक मूल्यों से भी भरते हैं। आइए इस आर्टिकल में फरवरी के चौथे हफ्ते में पड़ने वाले इन महत्वपूर्ण त्योहारों के बारे में जानते हैं। साथ ही उनके धार्मिक महत्व को समझते हैं।

22 से 28 फरवरी 2026 के व्रत-त्योहार

  • 22 फरवरी 2026 - स्कंद षष्ठी
  • 23 फरवरी 2026 - मासिक कार्तिगाई 
  • 24 फरवरी 2026 - होलाष्टक शुरू, मासिक दुर्गाष्टमी
  • 27 फरवरी 2026 - आमलकी एकादशी
  • 28 फरवरी 2026 - नृसिंह द्वादशी

22 फरवरी 2026 के व्रत और त्योहार 

22 फरवरी 2026 के व्रत और त्योहारों के बारे में यहां पूरी जानकारी दी गई है:

स्कंद षष्ठी - स्कंद षष्ठी एक महत्वपूर्ण पर्व है जो भगवान स्कंद (मुरुगन, कार्तिकेय और सुब्रहमन्य)को समर्पित है। यह पर्व शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। साथ ही यदि यह पंचमी तिथि के साथ संयुक्त होती है, तो इसे विशेष रूप से मनाया जाता है। श्रद्धालु इस दिन उपवास करते हैं और भगवान स्कन्द की पूजा करते हैं। कार्तिक चन्द्र मास के दौरान शुक्ल पक्ष की षष्ठी सबसे मुख्य होती है, जब श्रद्धालु छः दिन का उपवास करते हैं जो सूरसम्हाराम तक चलता है।

23 फरवरी 2026 के व्रत और त्योहार 

23 फरवरी 2026 के व्रत और त्योहारों के बारे में यहां पूरी जानकारी दी गई है:

मासिक कार्तिगाई - कार्तिगाई दीपम तमिल हिंदुओं का प्रमुख पर्व है, जिसे भगवान शिव की पूजा के लिए मनाया जाता है। इस दिन घरों और गलियों में तेल के दीप जलाए जाते हैं, जिससे वातावरण भक्तिमय हो जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, शिव ने इस दिन ब्रह्मा और विष्णु को अपनी श्रेष्ठता दिखाने के लिए अनन्त प्रकाश ज्योति धारण की थी। कार्तिकाई माह की यह दीपावली विशेष रूप से तिरुवन्नामलई की पहाड़ी पर महादीपम के रूप में मनाई जाती है, जहाँ हज़ारों श्रद्धालु आराधना करते हैं।

24 फरवरी 2026 के व्रत और त्योहार 

24 फरवरी 2026 के व्रत और त्योहारों के बारे में यहां पूरी जानकारी दी गई है:

होलाष्टक शुरू - होलाष्टक फाल्गुन माह की शुक्ल अष्टमी से शुरू होकर होली (पूर्णिमा) तक आठ दिन तक चलता है। इस अवधि को अशुभ माना जाता है, इसलिए विवाह, गृह प्रवेश और नए कार्य टालने की परंपरा है। होलाष्टक में लोग धार्मिक अनुष्ठान, दान‑दान, मंत्र जाप और ध्यान में समय बिताते हैं। पौराणिक कथा के अनुसार यह वह समय है जब प्रह्लाद को हिरण्यकशिपु द्वारा आठ दिन तक परीक्षा दी गई थी।

मासिक दुर्गाष्टमी - हर महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर दुर्गाष्टमी का उपवास किया जाता है, जिसमें श्रद्धालु दुर्गा माता की पूजा करते हैं और पूरे दिन का व्रत रखते हैं। मुख्य दुर्गाष्टमी, जिसे महाष्टमी कहते हैं, आश्विन माह के शारदीय नवरात्रि उत्सव के दौरान पड़ती है। इस दिन को दुर्गा अष्टमी भी कहा जाता है और मासिक दुर्गाष्टमी को मास दुर्गाष्टमी के नाम से भी जाना जाता है। इस व्रत और पूजा से भक्त दुर्गा माता की कृपा प्राप्त करते हैं और अपने जीवन में सुख-शांति और शक्ति की कामना करते हैं।

27 फरवरी 2026 के व्रत और त्योहार 

27 फरवरी 2026 के व्रत और त्योहारों के बारे में यहां पूरी जानकारी दी गई है:

आमलकी एकादशी - आमलकी एकादशी हिंदू धर्म में फाल्गुन शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाने वाला एक प्रमुख व्रत है, जिसे भगवान विष्णु और आंवले के वृक्ष की पूजा के लिए विशेष रूप से माना जाता है। इस दिन व्रत रखने और आंवले के पेड़ के नीचे भगवान विष्णु को अर्पण करने से स्वास्थ्य, समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है, साथ ही पापों से मुक्ति के पुण्य की प्राप्ति होती है। आमलकी एकादशी को रंगभरी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है और यह होली से कुछ पूर्व मनाई जाती है।

28 फरवरी 2026 के व्रत और त्योहार 

28 फरवरी 2026 के व्रत और त्योहारों के बारे में यहां पूरी जानकारी दी गई है:

नृसिंह द्वादशी - नरसिंह द्वादशी हिंदू धर्म में भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार को समर्पित एक पावन व्रत है, जो फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि पर मनाया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु ने भक्त प्रह्लाद की रक्षा और दैत्यराज हिरण्यकशिपु का वध करने के लिए स्वयं नरसिंह‑स्वरूप धारण किया था, इसलिए इसे विधिपूर्वक पूजा और उपवास का दिन माना जाता है। भक्तजन इस अवसर पर भगवान नरसिंह की पूजा‑अर्चना कर अपने जीवन से भय, बाधाएँ और पापों का नाश होने की कामना करते हैं।

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