Vrat Tyohar February 2026: महाशिवरात्रि, माघ पूर्णिमा से लेकर विजया एकादशी, यहां फरवरी में पड़ने वाले व्रत-त्योहार
फरवरी 2026 में व्रतों और त्योहारों की एक पावन श्रृंखला देखने को मिलेगी, जिनमें विजया एकादशी, महाशिवरात्रि, माघ पूर्णिमा, भानु सप्तमी और आमलकी एकादशी जैसे प्रमुख पर्व शामिल हैं। ये त्योहार न केवल धार्मिक आस्था को सुदृढ़ करते हैं, बल्कि जीवन में अनुशासन, आत्मचिंतन और सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी करते हैं। आइए, फरवरी 2026 में आने वाले प्रमुख व्रत और त्योहारों पर एक विस्तृत दृष्टि डालते हैं।
फरवरी 2026 व्रत-त्योहार कैलेंडर लिस्ट यहां देखें
- 1 फरवरी (रविवार): गुरु रविदास जयंती, ललिता जयंती, थाई पूसम, माघ पूर्णिमा
- गुरु रविदास जयंती - माघ पूर्णिमा को भक्ति आंदोलन के महान संत गुरु रविदास जी की जयंती मनाई जाती है। उनके भजन और पद सामाजिक समरसता और समानता का संदेश देते हैं। इस दिन विशेष सत्संग और भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाता है।
- ललिता जयंती - माघ पूर्णिमा को देवी षोडशी अर्थात ललिता त्रिपुरसुंदरी जयंती मनाई जाती है। वे श्रीविद्या परंपरा की अधिष्ठात्री देवी हैं। मान्यता है कि उनकी साधना से भोग-मोक्ष और आत्मबल की प्राप्ति होती है।
- थाई पूसम - यह पर्व भगवान मुरुगन को समर्पित है और देवी पार्वती द्वारा उन्हें दिव्य भाला प्रदान करने की स्मृति में मनाया जाता है। तमिल समुदाय में इसका विशेष धार्मिक महत्व है।
- माघ पूर्णिमा - माघ माह की पूर्णिमा को स्नान-दान का विशेष महत्व है। प्रयागराज त्रिवेणी संगम में इस दिन कल्पवास और माघ स्नान का समापन होता है।
2 फरवरी (सोमवार): फाल्गुन मास प्रारंभ
फाल्गुन मास प्रारंभ - फाल्गुन मास भगवान श्रीकृष्ण को अत्यंत प्रिय माना जाता है। इसी मास में महाशिवरात्रि और होली जैसे प्रमुख पर्व आते हैं।
5 फरवरी (गुरुवार): द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी
द्विजप्रिय संकष्टी - माघ कृष्ण चतुर्थी को द्विजप्रिय संकष्टी मनाई जाती है। इस दिन भगवान गणेश के द्विजप्रिय स्वरूप की पूजा से विघ्नों का नाश होता है। उत्तर भारत में इसे सकट चौथ भी कहा जाता है।
7 फरवरी (शनिवार): यशोदा जयंती
यशोदा जयंती - माता यशोदा की जयंती फाल्गुन कृष्ण षष्ठी को मनाई जाती है। वे भगवान श्रीकृष्ण की पालक माता थीं और वात्सल्य भक्ति का प्रतीक मानी जाती हैं।
8 फरवरी (रविवार): भानु सप्तमी, शबरी जयंती
- भानु सप्तमी - इस दिन सूर्य देव की पूजा की जाती है। मान्यता है कि भानु सप्तमी व्रत से मान-सम्मान, करियर और स्वास्थ्य में वृद्धि होती है।
- शबरी जयंती - माता शबरी की जयंती उनकी निष्कलंक भक्ति और श्रीराम के प्रति समर्पण की स्मृति में मनाई जाती है।
9 फरवरी (सोमवार): जानकी जयंती, कालाष्टमी, मासिक कृष्ण जन्माष्टमी
- जानकी जयंती - माता सीता के प्राकट्य दिवस के रूप में जानकी जयंती मनाई जाती है।
- कालाष्टमी - भगवान कालभैरव की पूजा का यह विशेष दिन भय और नकारात्मकता से मुक्ति दिलाने वाला माना जाता है।
- मासिक कृष्ण जन्माष्टमी - प्रत्येक माह कृष्ण पक्ष अष्टमी को भगवान श्रीकृष्ण की उपासना हेतु यह व्रत किया जाता है।
13 फरवरी (शुक्रवार): कृष्ण भीष्म द्वादशी, कुम्भ संक्रांति, विजया एकादशी
- कृष्ण भीष्म द्वादशी - यह व्रत भगवान विष्णु और भीष्म पितामह से जुड़ा है। इस दिन विष्णु उपासना से मोक्ष की प्राप्ति मानी जाती है।
- विजया एकादशी - यह एकादशी शत्रु-नाश और विजय प्रदान करने वाली मानी जाती है।
14 फरवरी (शनिवार): शनि त्रयोदशी, शनि प्रदोष व्रत
शनि त्रयोदशी - जब त्रयोदशी शनिवार को पड़ती है, तब शनि त्रयोदशी कहलाती है। इस दिन शनि और शिव की संयुक्त पूजा की जाती है।
शनि प्रदोष व्रत - इस व्रत से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और शनि दोष शांत होता है।
15 फरवरी (रविवार): महाशिवरात्रि, मासिक शिवरात्रि
- महाशिवरात्रि - फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को मनाया जाने वाला यह पर्व शिव-शक्ति के मिलन का प्रतीक है। व्रत, रात्रि जागरण और अभिषेक से मोक्ष की प्राप्ति मानी जाती है।
- मासिक शिवरात्रि - भगवान शिव की मासिक आराधना का विशेष दिन।
17 फरवरी (मंगलवार): सूर्य ग्रहण, दर्श अमावस्या, फाल्गुन अमावस्या, द्वापर युग दिवस
- सूर्य ग्रहण - ग्रहण काल में सूतक मान्य होता है। ग्रहण के बाद स्नान-दान का विशेष महत्व है।
- दर्श एवं फाल्गुन अमावस्या - पितृ तर्पण और दान-पुण्य के लिए यह दिन अत्यंत शुभ माना जाता है।
- द्वापर युग दिवस - भगवान श्रीकृष्ण के युग की स्मृति में मनाया जाने वाला दिवस।
18 फरवरी (बुधवार): चंद्र दर्शन
- चंद्र दर्शन - इस दिन चंद्रमा के दर्शन से मानसिक शांति और मनोकामना पूर्ति की मान्यता है।
19 फरवरी (गुरुवार): फुलैरा दूज, रामकृष्ण जयंती
- फुलैरा दूज - वसंत ऋतु और कृषि से जुड़ा पर्व, जिसमें फूलों से पूजा की जाती है।
- रामकृष्ण जयंती - स्वामी रामकृष्ण परमहंस की जयंती आध्यात्मिक प्रेरणा का दिन है।
21 फरवरी (शनिवार): ढुंढिराज चतुर्थी
ढुंढिराज चतुर्थी - भगवान गणेश के ढुंढिराज स्वरूप की पूजा से विघ्नों का नाश होता है।
22 फरवरी (रविवार): स्कंद षष्ठी
स्कंद षष्ठी - भगवान कार्तिकेय को समर्पित यह पर्व साहस और विजय का प्रतीक है।
23 फरवरी (सोमवार): मासिक कार्तिगाई
मासिक कार्तिगाई - शिव ज्योति की उपासना का पर्व, जिसमें दीप प्रज्ज्वलन किया जाता है।
24 फरवरी (मंगलवार): होलाष्टक प्रारंभ, मासिक दुर्गाष्टमी
- होलाष्टक - फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से होली तक का अशुभ काल, जिसमें शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं।
- मासिक दुर्गाष्टमी - माता दुर्गा की उपासना से शक्ति और संरक्षण की प्राप्ति होती है।
27 फरवरी (शुक्रवार): आमलकी एकादशी
आमलकी एकादशी - भगवान विष्णु और आंवला वृक्ष की पूजा से स्वास्थ्य और मोक्ष का लाभ मिलता है।
28 फरवरी (शनिवार): नृसिंह द्वादशी
नृसिंह द्वादशी - भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार को समर्पित यह व्रत भय और बाधाओं से मुक्ति दिलाने वाला माना जाता है।