February 2026 Vrat Tyohar: महाशिवरात्रि से लेकर फाल्गुन अमावस्या तक, फरवरी के तीसरे हफ्ते में पड़ेंगे ये त्योहार
अंग्रेजी कैलेंडर के हिसाब से फरवरी साल का दूसरा महीना होता है। फरवरी का तीसरा हफ्ता विभिन्न व्रत और त्योहारों के मामले में सामान्य रहने वाला है।महा शिवरात्रि, सूर्य ग्रहण, फाल्गुन अमावस्या, ढुण्ढिराज चतुर्थी और अन्य त्योहार शामिल हैं। ये त्योहार न केवल हमारी सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा हैं, बल्कि हमारे जीवन को अध्यात्मिक और धार्मिक मूल्यों से भी भरते हैं। आइए इस आर्टिकल में फरवरी के तीसरे हफ्ते में पड़ने वाले इन महत्वपूर्ण त्योहारों के बारे में जानते हैं। साथ ही उनके धार्मिक महत्व को समझते हैं।
15 से 21 फरवरी 2026 के व्रत-त्योहार
- 15 फरवरी 2026 - महा शिवरात्रि, मासिक शिवरात्रि
- 17 फरवरी 2026 - सूर्य ग्रहण, दर्श अमावस्या, फाल्गुन अमावस्या और द्वापर युग दिवस
- 18 फरवरी 2026 - चन्द्र दर्शन
- 19 फरवरी 2026 - फुलैरा दूज, रामकृष्ण जयंती
- 21 फरवरी 2026 - ढुण्ढिराज चतुर्थी
15 फरवरी 2026 के व्रत और त्योहार
15 फरवरी 2026 के व्रत और त्योहारों के बारे में यहां पूरी जानकारी दी गई है:
- महा शिवरात्रि - शिव पुराण के अनुसार महाशिवरात्रि भगवान शिव की उपासना का सबसे पावन पर्व माना गया है। यह पर्व फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है और शिव-शक्ति के दिव्य मिलन का प्रतीक है। मान्यता है कि इसी रात्रि भगवान शिव ने लिंग रूप में प्रकट होकर सृष्टि का कल्याण किया था। महाशिवरात्रि पर व्रत, रात्रि जागरण और शिवलिंग का अभिषेक करने से पापों का नाश होता है तथा मोक्ष की प्राप्ति होती है।
- मासिक शिवरात्रि - शिव पुराण के अनुसार मासिक शिवरात्रि प्रत्येक माह कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है। यह दिन भगवान शिव की विशेष उपासना के लिए अत्यंत पुण्यकारी माना गया है। मान्यता है कि मासिक शिवरात्रि पर व्रत, रात्रि जागरण और शिवलिंग का अभिषेक करने से शिव कृपा प्राप्त होती है, कष्टों का नाश होता है और साधक को आध्यात्मिक शांति की अनुभूति होती है।
17 फरवरी 2026 के व्रत और त्योहार
17 फरवरी 2026 के व्रत और त्योहारों के बारे में यहां पूरी जानकारी दी गई है:
- सूर्य ग्रहण - सूर्य ग्रहण एक खगोलीय घटना है, जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आकर सूर्य को आंशिक या पूर्ण रूप से ढक लेता है। हिंदू धर्म में सूर्य ग्रहण के दौरान सूतक काल का विशेष महत्व माना गया है, जिसमें पूजा-पाठ और शुभ कार्य वर्जित रहते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान, दान और जप करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।
- दर्श अमावस्या - दर्श अमावस्या हिंदू पंचांग की वह अमावस्या तिथि है, जिस दिन पितृ तर्पण, श्राद्ध और दान-पुण्य का विशेष महत्व होता है। धर्मग्रंथों के अनुसार इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, पितरों का स्मरण और दान करने से पितृ दोष शांत होता है तथा कुल की उन्नति होती है। दर्श अमावस्या को आध्यात्मिक शुद्धि और पितृ कृपा प्राप्ति का पावन अवसर माना गया है।
- फाल्गुन अमावस्या - फाल्गुन अमावस्या हिंदू पंचांग की फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को आती है। इस दिन पितृ तर्पण, श्राद्ध और दान-पुण्य का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार फाल्गुन अमावस्या को पवित्र नदियों में स्नान और दान करने से पितृ दोष शांत होता है और परिवार में सुख-शांति व समृद्धि आती है।
- द्वापर युग दिवस - द्वापर युग दिवस वह दिन है जिसे हिन्दू धर्म में द्वापर युग की स्मृति में मनाया जाता है। द्वापर युग, चार युगों में तीसरा युग है, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण का अवतार हुआ और धर्म की स्थापना की गई। इस दिन को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाने से धर्म की रक्षा और जीवन में आध्यात्मिक उन्नति की प्राप्ति होती है।
18 फरवरी 2026 के व्रत और त्योहार
18 फरवरी 2026 के व्रत और त्योहारों के बारे में यहां पूरी जानकारी दी गई है:
- चन्द्र दर्शन - चंद्र दर्शन वह धार्मिक अनुष्ठान है जिसमें चंद्रमा को देखकर पूजन, मंत्र जाप या प्रार्थना की जाती है। मान्यता है कि चंद्र दर्शन से मनोकामनाएं पूरी होती हैं, मानसिक शांति मिलती है और व्रत का फल अधिकाधिक प्राप्त होता है।
19 फरवरी 2026 के व्रत और त्योहार
19 फरवरी 2026 के व्रत और त्योहारों के बारे में यहां पूरी जानकारी दी गई है:
- फुलैरा दूज - फुलैरा दूज, जिसे फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि पर मनाया जाता है, एक पावन पर्व है। यह दिन विशेष रूप से कृषि, वसंत ऋतु और प्राकृतिक सौंदर्य के प्रति आभार प्रकट करने के लिए समर्पित माना जाता है। फुलैरा दूज के अवसर पर भक्तजन फूलों से सजावट, पूजा और विशेष उत्सव करते हैं, जिससे जीवन में खुशहाली और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
- रामकृष्ण जयंती - रामकृष्ण जयंती, जिसे स्वामी रामकृष्ण परमहंस की जन्म-जयंती के रूप में मनाया जाता है, भक्तों के लिए आध्यात्मिक प्रेरणा का पावन अवसर है। यह दिन श्रद्धा, भक्ति और आत्मज्ञान के महत्व को याद करने के लिए समर्पित है। जयंती के अवसर पर उनके उपदेशों का स्मरण करते हुए भजन, कीर्तन और सामाजिक सेवा के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
21 फरवरी 2026 के व्रत और त्योहार
21 फरवरी 2026 के व्रत और त्योहारों के बारे में यहां पूरी जानकारी दी गई है:
- ढुंढिराज चतुर्थी - ढुंढिराज चतुर्थी हिंदू पंचांग में विनायक चतुर्थी का एक रूप है, जो फाल्गुन माह की चतुर्थी तिथि पर मनाई जाती है और भगवान गणेश को समर्पित होती है। इसे ढुंढिराज गणपति के रूप में पूजा जाता है, जिसका प्रमुख मंदिर वाराणसी में श्री विश्वनाथ मंदिर के भीतर स्थित है। ढुंढिराज गणेश को ‘विघ्नों को हराने वाले’ के रूप में भी प्रतिष्ठित माना जाता है, और श्रद्धालु इस दिन गणेश जी के दर्शन, पूजा‑अर्चना तथा फल, फूल और मोदक का भोग लगाकर उनकी कृपा प्राप्त करते हैं।