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मार्च 2026 चौथे हफ्ते के व्रत-त्योहार

मार्च 2026 चौथे हफ्ते के व्रत-त्योहार

अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार मार्च वर्ष का तीसरा महीना होता है। यह महीना ऋतु परिवर्तन का संकेत देता है और आध्यात्मिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। मार्च 2026 के चौथे सप्ताह में कई प्रमुख व्रत और त्योहार पड़ रहे हैं, वासुदेव चतुर्थी, लक्ष्मी पंचमी, राम नवमी, कामदा एकादशी, सोम प्रदोष व्रत और अन्य शामिल हैं। इन व्रत-पर्वों का सनातन परंपरा में विशेष स्थान है, जो भक्तों के जीवन में श्रद्धा, अनुशासन, सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक शांति का संचार करते हैं। आइए इस आर्टिकल में मार्च 2026 के चौथे सप्ताह में आने वाले प्रमुख व्रत और त्योहारों के साथ-साथ उनके धार्मिक महत्व के बारे में विस्तार से जानते हैं।

22 से 31 मार्च 2026 के व्रत-त्योहार

  • 22 मार्च 2026 - वासुदेव चतुर्थी
  • 23 मार्च 2026 - लक्ष्मी पंचमी, मासिक कार्तिगाई
  • 24 मार्च 2026 - यमुना छठ, स्कन्द षष्ठी
  • 26 मार्च 2026 - राम नवमी, महातारा जयंती, अशोक अष्टमी व्रत, मासिक दुर्गाष्टमी
  • 27 मार्च 2026 - राम नवमी (इस्कॉन), स्वामीनारायण जयन्ती
  • 29 मार्च 2026 - कामदा एकादशी, वामन द्वादशी
  • 30 मार्च 2026 - सोम प्रदोष व्रत
  • 31 मार्च 2026 - महावीर स्वामी जयंती

22 मार्च 2026 के व्रत और त्योहार

22 मार्च 2026 के व्रत और त्योहारों के बारे में यहां पूरी जानकारी दी गई है:

वासुदेव चतुर्थी - हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र शुक्ल चतुर्थी के दिन भगवान गणेश के वासुदेव रूप की पूजा की जाती है। इस दिन व्रत रखने के बाद ब्राह्मणों को स्वर्ण मुद्राएँ दान करने की परंपरा बताई गई है। मान्यता है कि श्रद्धा से यह व्रत करने पर भगवान विष्णु के लोक की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख-समृद्धि बढ़ती है। धर्मग्रंथ मुद्गलपुराण के अनुसार इस दिन मध्याह्न काल में गणेश पूजन करने से विशेष फल मिलता है।

23 मार्च 2026 के व्रत और त्योहार

23 मार्च 2026 के व्रत और त्योहारों के बारे में यहां पूरी जानकारी दी गई है:

लक्ष्मी पंचमी - चैत्र शुक्ल पंचमी को कल्पादि तिथि माना जाता है, जो वैदिक समय गणना के अनुसार सृष्टि के आरंभ से जुड़ी मानी जाती है। इस दिन को लक्ष्मी पंचमी, श्री पंचमी या श्री व्रत के नाम से भी जाना जाता है और यह धन-समृद्धि की देवी माता लक्ष्मी को समर्पित होता है। हिंदू नववर्ष के शुरुआती दिनों में आने वाली इस तिथि पर लक्ष्मी पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है। भक्त इस दिन व्रत रखते हैं और घर तथा कार्यस्थल पर विधि-विधान से पूजा करते हैं, जिससे सुख-समृद्धि और उन्नति की कामना की जाती है।

मासिक कार्तिगाई - कार्तिगाई दीपम तमिल हिंदुओं का प्रमुख पर्व है, जिसे भगवान शिव की पूजा के लिए मनाया जाता है। इस दिन घरों और गलियों में तेल के दीप जलाए जाते हैं, जिससे वातावरण भक्तिमय हो जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, शिव ने इस दिन ब्रह्मा और विष्णु को अपनी श्रेष्ठता दिखाने के लिए अनन्त प्रकाश ज्योति धारण की थी। कार्तिकाई माह की यह दीपावली विशेष रूप से तिरुवन्नामलई की पहाड़ी पर महादीपम के रूप में मनाई जाती है, जहाँ हज़ारों श्रद्धालु आराधना करते हैं।

24 मार्च 2026 के व्रत और त्योहार

24 मार्च 2026 के व्रत और त्योहारों के बारे में यहां पूरी जानकारी दी गई है:

स्कंद षष्ठी - स्कंद षष्ठी एक महत्वपूर्ण पर्व है जो भगवान स्कंद (मुरुगन, कार्तिकेय और सुब्रहमन्य)को समर्पित है। यह पर्व शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। साथ ही यदि यह पंचमी तिथि के साथ संयुक्त होती है, तो इसे विशेष रूप से मनाया जाता है। श्रद्धालु इस दिन उपवास करते हैं और भगवान स्कन्द की पूजा करते हैं। कार्तिक चन्द्र मास के दौरान शुक्ल पक्ष की षष्ठी सबसे मुख्य होती है, जब श्रद्धालु छः दिन का उपवास करते हैं जो सूरसम्हाराम तक चलता है।

यमुना छठ - यमुना छठ का पर्व खासतौर पर मथुरा और वृन्दावन में भक्ति और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन देवी यमुना के पृथ्वी पर अवतरण की स्मृति में यमुना जयंती मनाई जाती है, जो चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को, चैत्र नवरात्रि के दौरान आती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार देवी यमुना को भगवान श्री कृष्ण से विशेष संबंध होने के कारण ब्रज क्षेत्र में अत्यंत पूजनीय माना जाता है।

26 मार्च 2026 के व्रत और त्योहार

26 मार्च 2026 के व्रत और त्योहारों के बारे में यहां पूरी जानकारी दी गई है:

अशोक अष्टमी व्रत- हिन्दू पंचांग के अनुसार चैत्र शुक्ल अष्टमी को अशोक अष्टमी व्रत किया जाता है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान हनुमान माता सीता की खोज करते हुए अशोक वाटिका पहुँचे थे और भगवान श्रीराम का संदेश दिया था। इस व्रत में अशोक वृक्ष की कलियों या कोमल पत्तों का विशेष महत्व होता है, जिन्हें आरोग्य और रोगनाशक माना गया है। भक्त इस दिन अशोक वृक्ष का पूजन कर भगवान शिव की आराधना करते हैं और सुख-समृद्धि व स्वास्थ्य की कामना करते हैं। 

दुर्गाष्टमी - चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर दुर्गाष्टमी का उपवास किया जाता है, जिसमें श्रद्धालु दुर्गा माता की पूजा करते हैं और पूरे दिन का व्रत रखते हैं। इसके अलावा हर महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर मासिक दुर्गाष्टमी का व्रत किया जाता है। इस व्रत और पूजा से भक्त दुर्गा माता की कृपा प्राप्त करते हैं और अपने जीवन में सुख-शांति और शक्ति की कामना करते हैं।
 

27 मार्च 2026 के व्रत और त्योहार

27 मार्च 2026 के व्रत और त्योहारों के बारे में यहां पूरी जानकारी दी गई है:

राम नवमी - हिंदू मान्यताओं के अनुसार भगवान राम का जन्म चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मध्याह्न काल में हुआ था, इसलिए हर साल इस दिन राम नवमी के रूप में उनका जन्मोत्सव मनाया जाता है। पूजा और अनुष्ठान के लिए मध्याह्न का समय सबसे शुभ माना जाता है, जो आमतौर पर सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे के बीच होता है। राम नवमी पर भक्त व्रत रखते हैं, राम नाम का जाप करते हैं और मंदिरों में विशेष कार्यक्रम आयोजित होते हैं। अयोध्या में यह पर्व विशेष भव्यता से मनाया जाता है, जहां श्रद्धालु सरयू नदी में स्नान कर राम मंदिर में दर्शन करते हैं। इस दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक उपवास रखने की भी परंपरा है, जिसे अलग-अलग भाव से किया जाता है।

महातारा जयंती- हिन्दू पंचांग के अनुसार चैत्र शुक्ल नवमी तिथि को महातारा जयंती मनाई जाती है। इस दिन देवी तारा की विशेष पूजा-अर्चना और साधना की जाती है। देवी तारा को दस महाविद्याओं में एक माना जाता है तथा उन्हें संकटों से तारने वाली और मोक्ष प्रदान करने वाली शक्ति के रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि इस दिन भक्त श्रद्धा-भक्ति से उपासना करें तो उन्हें ज्ञान, वाक्-सिद्धि और आध्यात्मिक उन्नति की प्राप्ति होती है।

स्वामीनारायण जयंती - स्वामीनारायण जयंती हिंदू धर्म के महान संत एवं भगवान स्वरूप माने जाने वाले श्री स्वामीनारायण की जयंती के रूप में मनाई जाती है। यह पर्व चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को आता है, जो राम नवमी के दिन ही पड़ता है। भगवान स्वामीनारायण का जन्म 3 अप्रैल 1781 को उत्तर प्रदेश के छपैया गांव में हुआ था और उन्हें भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है। उन्होंने कठोर तपस्या के बाद भारत भ्रमण किया और अंततः गुजरात में धर्म प्रचार कर समाज सुधार का कार्य किया। इस दिन भक्त उपवास रखकर पूजा, आरती, कीर्तन और सत्संग करते हैं तथा मंदिरों में उनके जन्मोत्सव को विशेष रूप से मनाया जाता है।

29 मार्च 2026 के व्रत और त्योहार

29 मार्च 2026 के व्रत और त्योहारों के बारे में यहां पूरी जानकारी दी गई है:

कामदा एकादशी - चैत्र शुक्ल पक्ष की एकादशी को कामदा एकादशी कहा जाता है। यह चैत्र नवरात्रि और राम नवमी के बाद आने वाली पहली एकादशी होती है, जो सामान्यतः मार्च या अप्रैल महीने में पड़ती है। इस दिन भगवान की पूजा, व्रत और भक्ति का विशेष महत्व माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति को सभी प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। मान्यता यह भी है कि श्रद्धापूर्वक व्रत करने से अत्यंत बड़े पापों का भी नाश हो जाता है तथा भक्त को मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। इस दिन विशेष रूप से भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करने का विधान है।

वामन द्वादशी - हिन्दू पंचांग के अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को वामन द्वादशी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन भगवान को प्रसन्न करने के लिए व्रत, पूजा और दान का विशेष महत्व माना गया है। मान्यता है कि चैत्र शुक्ल द्वादशी को भगवान विष्णु के वामन अवतार की उपासना करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है तथा जीवन में सुख-समृद्धि आती है। भगवान वामन भगवान विष्णु के दशावतारों में पांचवें अवतार माने जाते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार इसी दिन भगवान वामन ने देवताओं के कल्याण हेतु दैत्यराज महाराज बलि से दान में तीन पग भूमि माँगकर त्रिभुवन प्राप्त किए थे। इसलिए इस तिथि पर भगवान वामन की पूजा-अर्चना विशेष फलदायी मानी जाती है। साथ ही इस दिन मदन द्वादशी व्रत करने का भी विधान है, जिसके प्रभाव से संतान सुख और मनोकामनाओं की पूर्ति होने की मान्यता है।

30 मार्च 2026 के व्रत और त्योहार

30 मार्च 2026 के व्रत और त्योहारों के बारे में यहां पूरी जानकारी दी गई है:

सोम प्रदोष व्रत - जब प्रदोष व्रत सोमवार के दिन पड़ता है, तो उसे सोम प्रदोष कहा जाता है। यह व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है और इसे बहुत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से मानसिक शांति, वैवाहिक सुख और परिवार में खुशहाली आती है। ज्योतिष के अनुसार चंद्र से जुड़े दोषों को दूर करने में भी यह व्रत लाभकारी माना जाता है। श्रद्धा से पूजा करने पर भगवान शिव की कृपा से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

31 मार्च 2026 के व्रत और त्योहार

31 मार्च 2026 के व्रत और त्योहारों के बारे में यहां पूरी जानकारी दी गई है:


महावीर स्वामी जयंती - महावीर जयंती जैन धर्म का प्रमुख पर्व है, जिसे भगवान महावीर के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। महावीर, जिन्हें वर्धमान के नाम से भी जाना जाता है, जैन धर्म के 24वें और अंतिम तीर्थंकर थे। उनका जन्म चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को 599 ईसा पूर्व बिहार के कुंडलग्राम (वैशाली) में हुआ था। उन्होंने अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह और तप के सिद्धांतों का उपदेश देकर समाज को नई दिशा दी। इस दिन जैन मंदिरों में पूजा, शोभायात्रा, दान-पुण्य और धार्मिक प्रवचन का आयोजन किया जाता है।

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