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फरवरी 2026 दूसरे हफ्ते के व्रत-त्योहार

फरवरी 2026 दूसरे हफ्ते के व्रत-त्योहार

February 2026 Vrat Tyohar: भानु सप्तमी से शनि प्रदोष व्रत तक जानें फरवरी के दूसरे हफ्ते के व्रत-त्योहार

अंग्रेजी कैलेंडर के हिसाब से फरवरी साल का दूसरा महीना होता है। फरवरी का दूसरा हफ्ता व्रत और त्योहारों के मामले में सामान्य रहने वाला है। जिनमें भानु सप्तमी, जानकी जयंती, मासिक कृष्ण जन्माष्टमी, शनि प्रदोष व्रत, विजया एकादशी और अन्य शामिल है। आइए इस आर्टिकल में फरवरी के दूसरे हफ्ते में पड़ने वाले इन महत्वपूर्ण त्योहारों के बारे में जानते हैं। साथ ही उनके धार्मिक महत्व को समझते हैं।

8 से 14 फरवरी 2026 के व्रत-त्यौहार

  • 8 फरवरी 2026 - भानु सप्तमी, शबरी जयंती 
  • 9 फरवरी 2026 - जानकी जयंती, कालाष्टमी, मासिक कृष्ण जन्माष्टमी
  • 13 फरवरी 2026 - कृष्ण भीष्म द्वादशी, कुम्भ संक्रांति, विजया एकादशी
  • 14 फरवरी 2026 - शनि त्रयोदशी, शनि प्रदोष व्रत

8 फरवरी 2026 के व्रत और त्योहार 

8 फरवरी 2026 के व्रत और त्योहारों के बारे में यहां पूरी जानकारी दी गई है: 

  • भानु सप्तमी - भानु सप्तमी हर माह कृष्ण और शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाई जाती है। इस दिन आत्मा के कारक सूर्य देव की विशेष पूजा और सूर्य साधना की जाती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, भानु सप्तमी पर सूर्य उपासना से करियर, मान-सम्मान और सफलता प्राप्त होती है।
  • शबरी जयंती - शबरी जयंती उत्तर भारतीय चंद्र कैलेंडर के अनुसार फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी को मनाई जाती है। माता शबरी भगवान श्रीराम की अनन्य भक्त थीं और भील समुदाय में जन्म लेकर उन्होंने वैराग्य और सेवा-भाव से भरा जीवन जिया। उनकी भक्ति रामायण में आदर्श श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक मानी जाती है।

9 फरवरी 2026 के व्रत और त्योहार 

9 फरवरी 2026 के व्रत और त्योहारों के बारे में यहां पूरी जानकारी दी गई है: 

  • जानकी जयंती - उत्तर भारतीय चंद्र कैलेंडर के अनुसार जानकी जयंती फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाई जाती है। जानकी जयंती को सीता अष्टमी भी कहा जाता है।
  • कालाष्टमी - कालाष्टमी प्रत्येक माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है। इस दिन भगवान कालभैरव की विशेष पूजा व उपवास किया जाता है। वर्ष की प्रमुख कालाष्टमी को कालभैरव जयंती या भैरव अष्टमी कहा जाता है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव भैरव रूप में प्रकट हुए थे। कालाष्टमी व्रत उस दिन किया जाता है, जब रात्रि में अष्टमी तिथि प्रबल होती है।
  • मासिक कृष्ण जन्माष्टमी - मासिक कृष्ण जन्माष्टमी व्रत प्रत्येक माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्ति हेतु किया जाता है। यह व्रत वैष्णव भक्तों में विशेष रूप से लोकप्रिय है, हालांकि सामान्य श्रद्धालु भी इसे आत्मिक उन्नति के लिए करते हैं। इसे मासिक कृष्णाष्टमी या मासिक जन्माष्टमी भी कहा जाता है। इस दिन भक्त उपवास रखकर भगवान श्रीकृष्ण की विधिपूर्वक पूजा, भजन-कीर्तन और स्मरण करते हैं।

13 फरवरी 2026 के व्रत और त्योहार 

13 फरवरी 2026 के व्रत और त्योहारों के बारे में यहां पूरी जानकारी दी गई है: 

  • कृष्ण भीष्म द्वादशी - हिंदू पंचांग के अनुसार माघ शुक्ल द्वादशी के लगभग पंद्रह दिन बाद आने वाली कृष्ण पक्ष द्वादशी को कृष्ण भीष्म द्वादशी कहा जाता है। यह भगवान विष्णु को समर्पित अत्यंत पुण्यकारी व्रत है, जिसका नाम महाभारत के महान योद्धा भीष्म पितामह के नाम पर रखा गया है। मान्यता है कि द्वादशी तिथि पर विष्णु उपासना, व्रत और दान करने से पापों का नाश होता है तथा साधक को अंत में विष्णुलोक की प्राप्ति होती है।
  • विजया एकादशी - एकादशी व्रत का सनातन धर्म में विशेष महत्व है और वर्ष में कुल 24 एकादशी तिथियां आती हैं। इन्हीं में विजया एकादशी अत्यंत फलदायी मानी जाती है, जिस दिन साधु-संत, वैष्णव और गृहस्थजन भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा कर व्रत रखते हैं। मान्यता है कि विजया एकादशी का व्रत करने से रोग-शोक का नाश होता है, शत्रुओं पर विजय मिलती है और सभी क्षेत्रों में सफलता प्राप्त होती है।

14 फरवरी 2026 के व्रत और त्योहार 

14 फरवरी 2026 के व्रत और त्योहारों के बारे में यहां पूरी जानकारी दी गई है: 

  • शनि त्रयोदशी - हिंदू धर्म में शनि देव को न्याय का देवता और कर्मों का फल दाता माना गया है। उनकी कृपा से जीवन में सुख-समृद्धि और शांति मिलती है, जबकि उनकी नाराजगी से बाधाएँ आती हैं। हिंदू कैलेंडर में वर्ष में 24 त्रयोदशी तिथियां होती हैं, जो भगवान शिव को समर्पित हैं। पंचांग के अनुसार जब कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी शनिवार को पड़ती है, तो उसे शनि त्रयोदशी या शनि प्रदोष व्रत कहा जाता है। विशेष रूप से पौष माह की शनि त्रयोदशी अत्यंत फलदायी मानी जाती है। इस दिन शनिदेव और भगवान शिव की पूजा करने से दोनों की संयुक्त कृपा प्राप्त होती है और जीवन के कष्ट दूर होते हैं।
  • शनि प्रदोष व्रत - जब प्रदोष व्रत शनिवार के दिन पड़ता है, तब उसे शनि प्रदोष व्रत कहा जाता है। यह व्रत ज्योतिष की दृष्टि से अत्यंत विशेष माना जाता है, क्योंकि शनिवार शनि देव का दिन होता है और भगवान शिव को शनि देव का गुरु कहा गया है। मान्यता है कि इस दिन शिव और शनि दोनों की संयुक्त कृपा से जीवन के कष्ट और बाधाएं दूर होती हैं।

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