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पूजा विधि

बुधवार पूजा विधि
बुधवार पूजा विधि
सनातन धर्म में सप्ताह का हर दिन किसी न किसी भगवान को समर्पित है। जैसा कि आपको बता दें कि सोमवार को भगवान शिव की पूजा-अर्चना की जाती है।
मंगलवार पूजा विधि
मंगलवार पूजा विधि
हिंदू धर्म में प्रत्येक दिन किसी-न-किसी देवी-देवता की पूजा-अर्चना की जाती है। अगर आपको बजरंगबली की कृपा प्राप्त करनी हैं तो आप मंगलवार को उनकी पूजा-अर्चना कर सकते हैं।
सोमवार पूजा विधि
सोमवार पूजा विधि
सनातन धर्म में प्रत्येक दिन किसी-न-किसी देवी-देवता को समर्पित होता है। ऐसी मान्यता है कि प्रत्येक दिन अलग-अलग देवी-देवताओं की विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की जाती है।
हरियाली तीज की पूजा विधि
हरियाली तीज की पूजा विधि
श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाने वाली हरियाली तीज महिलाओं के लिए अत्यंत पावन और भावनात्मक पर्व होता है।
पोंगल त्योहार की पूजा विधि
पोंगल त्योहार की पूजा विधि
पोंगल दक्षिण भारत का एक प्रमुख त्योहार है, जिसे खासकर तमिलनाडु में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। यह त्योहार सूर्य देवता की उपासना का प्रतीक है और खासकर कृषि उत्पादकता और समृद्धि से जुड़ा हुआ है।
मकर संक्रांति की पूजा विधि
मकर संक्रांति की पूजा विधि
मकर संक्रांति की ग्रह स्थिति तब बनती है जब सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करता है। इसे सूर्य का मकर संक्रांति में गोचर कहा जाता है। यही समय मकर संक्रांति का प्रमुख क्षण माना जाता है।
बुध ग्रह दोष निवारण की पूजा विधि
बुध ग्रह दोष निवारण की पूजा विधि
क्या आपके जीवन में निर्णय लेने में दिक्कत आ रही है? क्या पढ़ाई या व्यापार में बार-बार बाधाएं आ रही हैं? अगर हां तो हो सकता है आपकी कुंडली में बुध ग्रह दोष हो।
कुंडली मिलान की पूजा विधि
कुंडली मिलान की पूजा विधि
शादी से पहले जब लड़का-लड़की की कुंडली मिलाई जाती है, तो कई बार उसमें दोष या मेल की असमानता सामने आती है। ऐसे में वैवाहिक जीवन में आने वाली अड़चनों से बचने के लिए कुछ खास पूजा और उपाय किए जाते हैं।
मंगल दोष निवारण की पूजा विधि
मंगल दोष निवारण की पूजा विधि
मंगल दोष को लेकर आम धारणा यही है कि इससे विवाह में बाधा आती है, लेकिन इसके साथ ही ये दोष जीवन के कई अन्य पहलुओं पर भी प्रभाव डालता है।
नवग्रह शांति की पूजा विधि
नवग्रह शांति की पूजा विधि
ज्योतिषशास्त्र मानता है कि हमारे जीवन में जो भी उतार-चढ़ाव आते हैं, उसके पीछे ग्रहों की स्थिति और दशा जिम्मेदार होती है। जन्म के समय जातक की तिथि, स्थान और समय के अनुसार कुंडली बनती हैI
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