हिंदू धर्म में भगवान श्रीकृष्ण को करुणा, प्रेम और धर्म का प्रतीक माना गया है। जिस प्रकार भाद्रपद माह की कृष्ण जन्माष्टमी का विशेष महत्व है, उसी तरह मासिक कृष्ण जन्माष्टमी भी भक्तों के लिए अत्यंत फलदायी मानी जाती है। यह व्रत हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है और विशेष रूप से मध्यरात्रि में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया जाता है। मान्यता है कि नियमित रूप से इस व्रत का पालन करने से भक्त के जीवन में शांति, स्थिरता और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। वर्ष 2026 में पंचांग के अनुसार मासिक कृष्ण जन्माष्टमी की तिथियां अलग अलग दिन पड़ रही हैं, जिनका विधिपूर्वक पालन करने से भगवान श्रीकृष्ण की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
इन सभी तिथियों पर मध्यरात्रि काल में भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करना श्रेष्ठ माना गया है।
मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत भगवान श्रीकृष्ण की निरंतर कृपा प्राप्त करने का साधन माना गया है। शास्त्रों के अनुसार इस व्रत को करने से व्यक्ति को यश, कीर्ति, धन, संतान सुख और दीर्घायु का आशीर्वाद प्राप्त होता है। जो भक्त नियमित रूप से इस व्रत का पालन करते हैं, उनके जीवन में मानसिक शांति बनी रहती है और नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं। यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी माना गया है जो जीवन में अस्थिरता, तनाव या पारिवारिक समस्याओं से जूझ रहे हों।
व्रत के दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और घर के पूजा स्थल को शुद्ध करें। भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर व्रत का संकल्प लें। दिनभर निर्जल या फलाहार व्रत रखें। मध्यरात्रि के समय पंचामृत से भगवान का अभिषेक करें और तुलसी पत्र, माखन, मिश्री तथा फूल अर्पित करें। श्रीकृष्ण के नामों का जाप करें और जन्माष्टमी की कथा का श्रवण करें। अंत में आरती कर प्रसाद वितरण करें और अगले दिन पारण करें।
इस व्रत के प्रभाव से पापों का नाश होता है और जीवन में नए सकारात्मक परिवर्तन आते हैं। भगवान श्रीकृष्ण की उपासना से आत्मबल बढ़ता है और निर्णय क्षमता मजबूत होती है। पारिवारिक सुख, आर्थिक स्थिरता और आध्यात्मिक उन्नति के लिए मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत अत्यंत शुभ माना गया है। नियमित रूप से इस व्रत को करने से भक्त के जीवन में संतुलन, श्रद्धा और भक्ति की भावना निरंतर बनी रहती है।