हिंदू पंचांग के अनुसार प्रदोष व्रत हर महीने के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। यह व्रत विशेष रूप से भगवान शिव को समर्पित होता है। भाद्रपद महीने का पहला प्रदोष व्रत 2025 में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्रदोष व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन व्रत रखने और शिवलिंग का पूजन करने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
हर माह की शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को स्कंद षष्ठी का पर्व मनाया जाता है। स्कंद देव यानी भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र कार्तिकेय की पूजा की जाती हैं।
सकट चौथ व्रत करने से भगवान गणेश जी प्रसन्न होते हैं और सभी प्रकार के दुखों को हर लेते हैं। इस दिन माताएं अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य और दीर्घायु की कामना के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। पूजा के दौरान व्रत कथा का पाठ करना बेहद आवश्यक माना गया है।
हिंदू धर्म में माघ माह का विशेष महत्व है। इस साल 14 जनवरी से माघ माह शुरू हो रहा है। माघ माह कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि के पहले दिन से शुरू होकर माघ पूर्णिमा तक चलता है।
कार्तिक मास के दौरान लोग दिल खोल कर दान पुण्य करते हैं। भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तर पूर्वी क्षेत्र में बसे वैसे लोग जो गंगा किनारे नहीं हैं वे कार्तिक माह में गंगा किनारे आकर रहते हैं।
कालाष्टमी का दिन भगवान काल भैरव को समर्पित होता है, जो भगवान शिव के रौद्र रूप माने जाते हैं। काल भैरव की उपासना करने से भक्तों के जीवन से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है, भय समाप्त होता है और कठिनाइयों का निवारण होता है।
हिन्दू धर्म में देवी आद्या काली को परम शक्ति, समय और संहार की देवी माना जाता है। वे दश महाविद्याओं में से एक हैं और देवी दुर्गा, काली तथा पार्वती का स्वरूप मानी जाती हैं।
हिन्दू धर्म में भगवान बलराम जी को शक्ति और धर्म के प्रतीक के रूप में पूजा जाता है। वे भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई और भगवान विष्णु के शेषनाग अवतार माने जाते हैं।