हिन्दू पंचांग के अनुसार पद्मिनी एकादशी अधिक मास के शुक्ल पक्ष में आती है। वर्ष 2026 में यह व्रत बुधवार 27 मई को रखा जाएगा। यह एकादशी पुरुषोत्तम मास में आने के कारण विशेष फलदायी मानी जाती है।
साल 2026 में परम एकादशी अधिक मास के कृष्ण पक्ष में आएगी। पंचांग के अनुसार यह एकादशी 18 जुलाई 2026 को रखी जाएगी। व्रत का पारण अगले दिन सूर्योदय के बाद किया जाता है।
हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक वर्ष श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को कामिका एकादशी मनाई जाती है। यह एकादशी सावन माह की पहली एकादशी होती है, इसलिए इसका आध्यात्मिक और पौराणिक महत्व अत्यंत विशेष माना गया है।
हिन्दू पंचांग में देवशयनी एकादशी का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान विष्णु क्षीरसागर में शेषनाग पर योगनिद्रा में चले जाते हैं। इस कारण चार माह तक विवाह जैसे शुभ संस्कार नहीं किए जाते और आत्मसंयम का काल आरम्भ होता है।
वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को वरूथिनी एकादशी कहा जाता है। उत्तर भारतीय पूर्णिमान्त और दक्षिण भारतीय अमान्त पन्चांग में नाम अलग हो सकता है, लेकिन व्रत का दिन एक ही माना जाता है।
चैत्र मास की शुक्ल पक्ष एकादशी को कामदा एकादशी कहा जाता है। यह चैत्र नवरात्रि और राम नवमी के बाद आने वाली पहली एकादशी है। धर्मशास्त्रों में इसे अत्यंत पुण्यदायी बताया गया है।
होलिका दहन और चैत्र नवरात्रि के बीच पड़ने वाली पापमोचनी एकादशी वर्ष की अंतिम एकादशी मानी जाती है। यह एक ऐसा व्रत है जिसके बारे में कहा गया है कि इसके प्रभाव से असम्भव प्रतीत होने वाले पाप भी नष्ट हो जाते हैं।
आमलकी एकादशी महाशिवरात्रि और होली के मध्य पड़ने वाली अत्यंत शुभ तिथि है, जिसका वर्णन पुराणों में मोक्षदायिनी और सर्वसिद्धिदायिनी एकादशी के रूप में मिलता है।
हिंदू धर्म में फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को विजया एकादशी कहा जाता है। यह एकादशी विशेष रूप से विजय, साहस और दृढ़ संकल्प का प्रतीक मानी जाती है।
हिंदू पंचांग में माघ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को जया एकादशी कहा जाता है। यह एकादशी विशेष रूप से भय, पिशाच योनि और नकारात्मक प्रभावों से मुक्ति के लिए जानी जाती है।