हिंदू धर्म में भगवान श्रीकृष्ण को करुणा, प्रेम और धर्म का प्रतीक माना गया है। जिस प्रकार भाद्रपद माह की कृष्ण जन्माष्टमी का विशेष महत्व है, उसी तरह मासिक कृष्ण जन्माष्टमी भी भक्तों के लिए अत्यंत फलदायी मानी जाती है।
हिंदू धर्म में दुर्गाष्टमी का विशेष स्थान है। प्रत्येक माह शुक्ल पक्ष की अष्टमी को मासिक दुर्गाष्टमी के रूप में माता दुर्गा की उपासना की जाती है। यह व्रत शक्ति, सुरक्षा और साधना से जुड़ा माना गया है।
हिंदू पंचांग में अमावस्या के बाद आने वाली प्रतिपदा तिथि को चंद्र दर्शन का विशेष महत्व माना गया है। इस दिन भक्त चंद्र देव के दर्शन और पूजन के बाद ही भोजन ग्रहण करते हैं। शास्त्रों के अनुसार चंद्रमा मन, भावनाओं और मानसिक शांति का कारक है।
हिन्दू धर्म में शिवरात्रि को शिव और शक्ति के मिलन का पावन पर्व माना गया है। प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि का व्रत रखा जाता है।
हिंदू पंचांग में एकादशी व्रतों का विशेष स्थान है और उनमें पापांकुशा एकादशी का महत्व अत्यंत उच्च माना गया है। कहा जाता है कि पाप रूपी हाथी को पुण्य रूपी अंकुश से वश में करने के कारण ही इस एकादशी का नाम पापांकुशा पड़ा।
हिन्दू धर्म में गणेश चतुर्थी को अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व माना गया है। भगवान गणेश को प्रथम पूज्य और विघ्नहर्ता कहा जाता है, इसलिए किसी भी शुभ कार्य से पहले उनका स्मरण किया जाता है।
हिन्दू धर्म में सकट चौथ का व्रत संतान सुख और परिवार की मंगल कामना से जुड़ा हुआ माना जाता है। उत्तर भारत में इसे सकट चौथ कहा जाता है, जबकि कई क्षेत्रों में यह संकष्टी चतुर्थी के नाम से प्रसिद्ध है।
हिन्दू धर्म में एकादशी व्रतों का विशेष आध्यात्मिक महत्व है और मोक्षदा एकादशी उनमें अत्यंत पुण्यदायी मानी जाती है। मोक्षदा का अर्थ है मोह और कर्म बंधन से मुक्ति देने वाली।
हिन्दू धर्म में एकादशी व्रतों का विशेष महत्व है और उत्पन्ना एकादशी को सभी एकादशियों की आदि एकादशी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी तिथि को देवी एकादशी का जन्म हुआ था।