शारदीय नवरात्रि का हर दिन देवी दुर्गा की साधना और आराधना के लिए खास महत्व रखता है। नवरात्रि की सप्तमी तिथि पर नवपत्रिका पूजा की परंपरा है, जिसे पश्चिम बंगाल, असम और ओडिशा में विशेष धूमधाम से मनाया जाता है।
शारदीय नवरात्र का हर दिन देवी मां के अलग-अलग स्वरूप को समर्पित होता है। इसी क्रम में सप्तमी तिथि का विशेष महत्व है। इस दिन मां सरस्वती का आह्वान किया जाता है, जिसे सरस्वती आवाहन कहते हैं।
शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा की आराधना के कई विशेष अनुष्ठान होते हैं। इन्हीं में से एक है अकाल बोधन। इसका अर्थ है कि मां दुर्गा को उनके नियत समय से पहले जगाना और धरती पर आमंत्रित करना।
हिंदू धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व है। साल में दो प्रमुख नवरात्रियां पड़ती हैं – चैत्र और शारदीय। इनमें से शारदीय नवरात्रि को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा अर्चना की जाती है और भक्त पूरे नौ दिन उपवास रखते हैं।
शारदीय नवरात्रि का पर्व हर साल आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से आरंभ होकर दशमी तिथि तक चलता है। इस वर्ष नवरात्रि की शुरुआत 22 सितंबर से हो चुकी है और समापन 2 अक्टूबर को दशहरा पर्व के साथ होगा।
नवरात्रि में कन्या पूजन केवल धार्मिक परंपरा ही नहीं बल्कि देवी शक्ति के सम्मान का प्रतीक है। यह हमें यह संदेश देता है कि समाज में स्त्रियों और कन्याओं का स्थान सर्वोपरि है।
हिंदू पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शुरू हुआ शारदीय नवरात्र इस वर्ष 22 सितंबर, सोमवार को आरंभ हुआ है और 2 अक्टूबर को दशमी तिथि के साथ इसका समापन होगा।
नवरात्रि का पावन पर्व पूरे देश में बड़े श्रद्धा और भक्ति भाव से मनाया जाता है। हर दिन मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूप की पूजा की जाती है। सातवें दिन मां दुर्गा के कालरात्रि स्वरूप की आराधना की जाती है। मां कालरात्रि का रूप भले ही रौद्र और भयावह दिखाई देता है, लेकिन वे अपने भक्तों के लिए शुभ और मंगलकारी मानी जाती हैं।
शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व इन दिनों पूरे देशभर में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। हर दिन मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूप की पूजा-अर्चना की जाती है। आज नवरात्रि का छठा दिन है। इस दिन मां दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा की जाती है।
शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व इस समय पूरे देश में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। इस दौरान भक्त मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा करते हैं। नौवें दिन यानी नवमी को मां सिद्धिदात्री की आराधना की जाती है। इस शुभ अवसर पर भक्त कन्या पूजन और व्रत का पारण भी करते हैं।