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ज्ञानगंगा

विद्यारंभ मुहूर्त नवंबर 2025 (Vidyarambh Muhurat November 2025)
विद्यारंभ मुहूर्त नवंबर 2025 (Vidyarambh Muhurat November 2025)
विद्यारंभ संस्कार बच्चे की शिक्षा यात्रा की शुरुआत का प्रतीक है और भारतीय परंपरा में इसका विशेष महत्व है। मान्यता है कि ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति देखकर चुना गया शुभ मुहूर्त शिक्षा और जीवन में सफलता के लिए सकारात्मक ऊर्जा लाता है।
कर्णवेध संस्कार शुभ मुहूर्त नवंबर 2025 (Karnavedh Sanskar Shubh Muhurat November 2025)
कर्णवेध संस्कार शुभ मुहूर्त नवंबर 2025 (Karnavedh Sanskar Shubh Muhurat November 2025)
हिंदू धर्म में 16 संस्कारों में से नौवां है कर्णवेध संस्कार, जिसमें बच्चे के कान छिदवाए जाते हैं। यह सामान्यतः 1 से 5 वर्ष की उम्र में किया जाता है। मान्यता है कि सही मुहूर्त में कर्णवेध कराने से बच्चे की सुनने की क्षमता, बुद्धिमत्ता, सौंदर्य और स्वास्थ्य में सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
प्रॉपर्टी खरीद शुभ मुहूर्त नवंबर 2025 (Property Kharid Shubh Muhurat November 2025)
प्रॉपर्टी खरीद शुभ मुहूर्त नवंबर 2025 (Property Kharid Shubh Muhurat November 2025)
जमीन या संपत्ति खरीदना एक महत्वपूर्ण निर्णय है जिसमें आपका भविष्य और वित्तीय स्थिरता शामिल है। ऐसे में शुभ मुहूर्त का चयन करना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। यह न केवल आपके निवेश को सफल और लाभदायक बनाता है बल्कि आपके जीवन में स्थिरता और सुख-शांति भी लाता है।
वाहन खरीद शुभ मुहूर्त नवंबर 2025 (Vahan Kharid Shubh Muhurat Novemeber)
वाहन खरीद शुभ मुहूर्त नवंबर 2025 (Vahan Kharid Shubh Muhurat Novemeber)
वाहन खरीदना एक महत्वपूर्ण काम होता है, जहां आपका एक सपना वास्तविकता में बदलने वाला होता है। हिंदू धर्म में जिस तरह लोग मांगलिक कार्य से पहले शुभ मुहूर्त देखते हैं।
छठ पर क्यों बनता है ठेकुआ
छठ पर क्यों बनता है ठेकुआ
लोक आस्था का महापर्व छठ पूजा अब शुरू होने वाला है। इस पवित्र पर्व की तैयारियां पूरे उत्साह के साथ चल रही हैं। कार्तिक माह में मनाया जाने वाला यह पर्व सूर्यदेव और छठी मैया की उपासना को समर्पित है।
ऊषा अर्घ्य की पूजा विधि
ऊषा अर्घ्य की पूजा विधि
छठ पूजा सूर्य उपासना और आत्मसंयम का सबसे पवित्र पर्व माना जाता है। यह पर्व चार दिनों तक अत्यंत अनुशासन, पवित्रता और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। कार्तिक शुक्ल चतुर्थी से शुरू होकर सप्तमी तक चलने वाले इस पर्व में भक्त सूर्यदेव और छठी मैया की आराधना करते हैं।
छठ पूजा पर संध्या अर्घ्य की पूजा विधि
छठ पूजा पर संध्या अर्घ्य की पूजा विधि
छठ पूजा आस्था, अनुशासन और आत्मशुद्धि का पर्व है। यह कार्तिक शुक्ल चतुर्थी से शुरू होकर सप्तमी तक मनाया जाता है। चार दिनों तक चलने वाले इस पर्व में सूर्यदेव और छठी मैया की आराधना की जाती है।
खरना पूजा पर गुड़ की खीर की रेसिपी
खरना पूजा पर गुड़ की खीर की रेसिपी
छठ पूजा का दूसरा दिन सबसे पवित्र दिन होता है, जिसे खरना या लोहंडा भी कहा जाता है। इस दिन व्रती महिलाएं पूरे दिन निर्जला उपवास रखती हैं और सूर्यास्त के बाद भगवान सूर्य और छठी मैया की पूजा करती हैं।
छठ पर्व की खरना पूजा का महत्व
छठ पर्व की खरना पूजा का महत्व
छठ पूजा चार दिनों तक चलने वाला सूर्य उपासना का पर्व है, जो कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से आरंभ होता है। पहले दिन ‘नहाय-खाय’ के बाद दूसरा दिन ‘खरना’ कहलाता है। इस दिन व्रती पूरे दिन निर्जला उपवास रखते हैं और शाम को सूर्यास्त के बाद भगवान सूर्य और छठी मइया की पूजा करते हैं।
घर पर छठ पूजा कैसे करें
घर पर छठ पूजा कैसे करें
छठ पूजा हिंदू धर्म का अत्यंत पवित्र पर्व है, जो मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और नेपाल के कुछ क्षेत्रों में मनाया जाता है। यह पर्व कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि पर की जाती है। कई बार ऐसा होता है कि व्रती किसी कारणवश घाट नहीं जा पाते।
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