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व्रत एवं त्यौहार

 वामन जयंती 2025 कब है
वामन जयंती 2025 कब है
पंचांग के अनुसार, भाद्रपद के महीना में शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि पर वामन जयंती मनाई जाती है, जो भगवान विष्णु के पांचवें अवतार, वामन देव का जन्मोत्सव है। धार्मिक ग्रंथो के अनुसार, असुरराज बलि ने जब तीनों लोकों पर अधिकार कर लिया था तभी एक छोटे ब्राह्मण बालक का आगमन हुआ।
8 से 14 सितंबर 2025 व्रत-त्योहार
8 से 14 सितंबर 2025 व्रत-त्योहार
अंग्रेजी कैलेंडर के हिसाब से सितंबर साल का 9वां महीना होता है।सितंबर का दूसरा हफ्ता विभिन्न व्रत और त्योहारों के मामले में सामान्या रहने वाला है। इस हफ्ते में जिनमें जीवित्पुत्रिका व्रत, कालाष्टमी और मासिक कृष्ण जन्माष्टमी जैसे व्रत और त्योहार है।
सितंबर 2025 की एकादशी व्रत की तिथियां
सितंबर 2025 की एकादशी व्रत की तिथियां
सितंबर के महीने में वातावरण में एक आध्यात्मिक शांति सी घुलने लगती है। ऐसे ही शांत समय में एकादशी व्रत आता है, जो भक्तों के लिए केवल उपवास का नहीं, बल्कि आत्म-संयम और श्रीहरि विष्णु की भक्ति का प्रतीक होता है।
परिवर्तिनी एकादशी व्रत कथा
परिवर्तिनी एकादशी व्रत कथा
भाद्रपद मास की शुक्ल एकादशी को परिवर्तिनी एकादशी कहते हैं, इस दिन भगवान विष्णु क्षीरसागर में शयन करते हुए करवट बदलते हैं। इसी तिथि से जुड़ी है राजा बलि और वामन देव की अद्भुत कथा।
परिवर्तिनी एकादशी 2025 कब मनाई जाएगी
परिवर्तिनी एकादशी 2025 कब मनाई जाएगी
परिवर्तिनी एकादशी को ‘जलझूलनी एकादशी’ और ‘पद्मा एकादशी’ भी कहा जाता है। यह व्रत विशेष होता है, इस दिन भगवान विष्णु क्षीर सागर में शेषनाग की शैय्या पर शयन कर रहे होते हैं।
महालक्ष्मी व्रत के 5 उपाय
महालक्ष्मी व्रत के 5 उपाय
वैदिक पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से महालक्ष्मी व्रत की शुरुआत होती है और इसका समापन अश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को होता है।
महालक्ष्मी व्रत 2025 की तिथि
महालक्ष्मी व्रत 2025 की तिथि
हिंदू धर्म में महालक्ष्मी व्रत को अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है। पंचांग के अनुसार, यह व्रत भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से प्रारंभ होकर अश्विन कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि तक पूरे 16 दिनों तक चलता है।
भाद्रपद मास 2025 दुर्गा अष्टमी
भाद्रपद मास 2025 दुर्गा अष्टमी
भाद्रपद मास में आने वाली दुर्गा अष्टमी का हिंदू धर्म में अत्यंत विशेष महत्व माना गया है। इस दिन मां दुर्गा की आराधना करके भक्त अपनी शक्ति, साहस, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना करते हैं।
महालक्ष्मी व्रत पूजा में जरूरी चीजें
महालक्ष्मी व्रत पूजा में जरूरी चीजें
न, वैभव और समृद्धि की प्राप्ति के लिए श्री महालक्ष्मी व्रत का विशेष महत्व है। यह व्रत भाद्रपद शुक्ल अष्टमी से शुरू होकर आश्विन कृष्ण अष्टमी तक सोलह दिनों तक चलता है।
महालक्ष्मी व्रत उद्यापन विधि
महालक्ष्मी व्रत उद्यापन विधि
हर वर्ष भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से महालक्ष्मी व्रत की शुरुआत होती है और इसका समापन आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को होता है। इन 16 दिनों तक मां लक्ष्मी की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।
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