Logo

1 से 7 सितंबर 2025 व्रत-त्योहार

1 से 7 सितंबर 2025 व्रत-त्योहार

September 2025 First Week Vrat Tyohar: 1 से 7 सितंबर तक पहले हफ्ते में पड़ेंगे ये त्योहार, देखें लिस्ट

अंग्रेजी कैलेंडर के हिसाब से सितंबर साल का 9वां महीना होता है। सितंबर के पहले हफ्ते में कई व्रत और त्योहार पड़ने वाले हैं। जिनमें परिवर्तिनी एकादशी, वामन जयंती, अनन्त चतुर्दशी, पूर्णिमा श्राद्ध और अन्य शामिल हैं। ये व्रत और त्योहार न केवल हमारी सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा हैं, बल्कि हमारे जीवन को अध्यात्मिक और धार्मिक मूल्यों से भी भर सकते हैं। आइए इस आर्टिकल में सितंबर के पहले हफ्ते में पड़ने वाले महत्वपूर्ण व्रत और त्योहारों के बारे में जानते हैं। साथ ही उनके धार्मिक महत्व को समझते हैं।

1 से 7 सितंबर 2025 के व्रत-त्यौहार

  • 1 सितंबर 2025 - कोई व्रत या त्योहार नहीं है। 
  • 2 सितंबर 2025 - कोई व्रत या त्योहार नहीं है। 
  • 3 सितंबर 2025 - परिवर्तिनी एकादशी
  • 4 सितंबर 2025 - वामन जयंती, भुवनेश्वरी जयंती और कल्की द्वादशी
  • 5 सितंबर 2025 - ओणम, शुक्र प्रदोष व्रत
  • 6 सितंबर 2025 - गणेश विसर्जन, अनन्त चतुर्दशी
  • 7 सितंबर 2025 - पूर्णिमा श्राद्ध, चन्द्र ग्रहण *पूर्ण, भाद्रपद पूर्णिमा व्रत, भाद्रपद पूर्णिमा

1 सितंबर 2025 के व्रत और त्योहार 

1 सितंबर 2025 के व्रत और त्योहारों के बारे में यहां पूरी जानकारी दी गई है: 

  • सोमवार का व्रत- आज आप सोमवार का व्रत रख सकते हैं, जो भगवान शिव को समर्पित है। 

2 सितंबर 2025 के व्रत और त्योहार 

2 सितंबर 2025 के व्रत और त्योहारों के बारे में यहां पूरी जानकारी दी गई है: 

  • मंगलवार का व्रत- आज आप मंगलवार का व्रत रख सकते हैं, जो हनुमान जी को समर्पित है। 

3 सितंबर 2025 के व्रत और त्योहार 

3 सितंबर 2025 के व्रत और त्योहारों के बारे में यहां पूरी जानकारी दी गई है: 

  • बुधवार का व्रत- आज आप बुधवार का व्रत रख सकते हैं, जो भगवान गणेश को समर्पित है। 
  • परिवर्तिनी एकादशी - भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को परिवर्तिनी एकादशी कहा जाता है, जिसे मध्य प्रदेश में डोल ग्यारस और कई स्थानों पर जलझूलनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा में शयन करते हुए अपनी करवट बदलते हैं, इसलिए इसे "परिवर्तिनी" कहा गया है। इस दिन विशेष रूप से भगवान श्रीविष्णु के वामन अवतार की पूजा होती है और कुछ स्थानों पर भगवान को पालकी में विराजमान कर शोभा यात्रा भी निकाली जाती है। एक कथा के अनुसार, इस दिन माता यशोदा ने भगवान विष्णु के वस्त्र जल में धोए थे, इसलिए इसे जलझूलनी के रूप में भी पूजा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस एकादशी का व्रत करने से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

4 सितंबर 2025 के व्रत और त्योहार 

4 सितंबर 2025 को चैत्र नवरात्रि का छठा दिन है, ऐसे में आप मां दुर्गा की उपासना कर सकते हैं। 

  • गुरूवार का व्रत- आज आप गुरूवार का व्रत रख सकते हैं, जो भगवान विष्णु को समर्पित है। 
  • वामन जयंती - वामन जयंती भगवान विष्णु के वामन अवतार के जन्मदिवस के रूप में मनाई जाती है, जो भाद्रपद शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को पड़ती है। भगवान विष्णु के दशावतार में से पांचवें अवतार वामन थे, जो त्रेता युग के पहले अवतार भी थे। वामन अवतार से पहले भगवान विष्णु के चार अवतार पशु रूप में थे - मत्स्य, कूर्म, वराह और नृसिंह। वामन अवतार मानव रूप में भगवान विष्णु का पहला अवतार था। इस अवतार में भगवान विष्णु ने माता अदिति और ऋषि कश्यप के पुत्र के रूप में जन्म लिया था, जो भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष द्वादशी को श्रवण नक्षत्र में अभिजित मुहूर्त में हुआ था।
  • भुवनेश्वरी जयंती - भाद्रपद शुक्ल द्वादशी के दिन भुवनेश्वरी जयंती मनाई जाती है, जो दस महाविद्याओं में से चतुर्थ महाविद्या हैं। देवी भुवनेश्वरी भुवनेश्वर रूद्र की शक्ति के रूप में वर्णित की गई हैं और अपने भक्तों को अभय और विभिन्न सिद्धियां प्रदान करती हैं। गृहस्थजन सन्तान प्राप्ति की कामना से देवी भुवनेश्वरी की आराधना करते हैं। देवी पुराण के अनुसार, मूल प्रकृति स्वयं देवी भुवनेश्वरी के रूप में विद्यमान हैं और उन्हें वामा, ज्येष्ठा, रौद्री आदि नामों से भी जाना जाता है। देवी भुवनेश्वरी सम्पूर्ण सृष्टि की अधिष्ठात्री हैं और अपने भक्तों को सन्तान, धन, ज्ञान और सौभाग्य प्रदान करती हैं। वह मणिद्वीप पर निवास करती हैं और महानिर्वाण तन्त्र के अनुसार, समस्त महाविद्यायें उनकी सेवा में तत्पर रहती हैं।

5 सितंबर 2025 के व्रत और त्योहार 

5 सितंबर 2025 के व्रत और त्योहारों के बारे में यहां पूरी जानकारी दी गई है: 

  • शुक्रवार का व्रत- आज आप शुक्रवार का व्रत रख सकते हैं, जो माता लक्ष्मी को समर्पित है। 
  • ओणम - ओणम एक प्रमुख मलयाली त्योहार है, जो मलयालम भाषी लोगों द्वारा मनाया जाता है। यह त्योहार सौर कैलेंडर के चिंगम माह में आता है, जो अन्य कैलेंडरों में सिंह या अवनी माह के नाम से जाना जाता है। ओणम का दिन थिरुवोणम नक्षत्र के प्रबल होने पर निर्धारित होता है, जिसे श्रवण नक्षत्र भी कहा जाता है। यह त्योहार भगवान विष्णु के वामन अवतार और महान सम्राट महाबलि के पाताल लोक से पृथ्वी पर पुनः आगमन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। ओणम का उत्सव 10 दिनों तक चलता है, जो अथम नक्षत्र (हस्त नक्षत्र) से शुरू होकर थिरुवोणम तक जारी रहता है। इस दौरान, दैत्य राज महाबलि की पाताल लोक से पृथ्वी पर वार्षिक यात्रा का जश्न मनाया जाता है।
  • शुक्र प्रदोष व्रत - प्रदोष व्रत चन्द्र मास की दोनों त्रयोदशी के दिन किया जाता है, जो शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष में आती हैं। यह व्रत तब किया जाता है जब त्रयोदशी तिथि प्रदोष काल के समय व्याप्त होती है, जो सूर्यास्त से शुरू होता है। प्रदोष व्रत में शिव पूजा के लिए त्रयोदशी और प्रदोष का अधिव्यापन सर्वश्रेष्ठ समय होता है। शुक्र प्रदोष व्रत, जो शुक्रवार को पड़ता है, सौन्दर्य, भोग, वैवाहिक सुख और धन-सम्पदा की प्राप्ति के लिए किया जाता है। यह व्रत विशेष रूप से स्त्रियों के लिए कल्याणकारी है और इससे वैवाहिक जीवन सुखमय होता है, घर में देवी लक्ष्मी का वास होता है और शुक्र ग्रह से सम्बन्धित समस्याओं से मुक्ति मिलती है। नियम और निष्ठा से यह व्रत करने से जीवन में धन-वैभव और प्रणय जीवन में सुख प्राप्त होता है।

6 सितंबर 2025 के व्रत और त्योहार 

6 सितंबर 2025 के व्रत और त्योहारों के बारे में यहां पूरी जानकारी दी गई है: 

  • शनिवार का व्रत- आज आप शनिवार का व्रत रख सकते हैं, जो न्याय के देवता शनि देव को समर्पित है। 
  • गणेश विसर्जन - गणेश विसर्जन चतुर्थी तिथ ि के दिन भी किया जा सकता है, लेकिन यह कम लोकप्रिय है। परंपरागत रूप से, हिन्दू धर्म में देवी-देवताओं की पूजा का समापन विसर्जन या उत्थापना के साथ होता है। आमतौर पर गणेश विसर्जन अनंत चतुर्दशी के दिन किया जाता है, जो गणेश चतुर्थी के 10 दिन बाद आता है। इस दिन गणेश जी की प्रतिमा को विधि-विधान से विसर्जित किया जाता है और उनकी वापसी के लिए प्रार्थना की जाती है।
  • अनंत चतुर्दशी - अनंत चतुर्दशी भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है, जिसे अनंत चौदस भी कहते हैं। इस दिन भगवान विष्णु, माता यमुना और शेषनाग की पूजा की जाती है और अनन्त सूत्र बांधा जाता है, जिसमें भगवान विष्णु का वास माना जाता है। अनंत सूत्र में 14 गांठें होती हैं, जो 14 लोकों का प्रतीक हैं। इस दिन भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा के लिए विशेष महत्व है और भक्त पूरे दिन उपवास रखते हैं। अनन्त चतुर्दशी के दिन गणेश उत्सव का समापन भी होता है, जो इस त्योहार को और भी विशेष बनाता है।

7 सितंबर 2025 के व्रत और त्योहार 

7 सितंबर 2025 के व्रत और त्योहारों के बारे में यहां पूरी जानकारी दी गई है: 

  • रविवार का व्रत- आज आप रविवार का व्रत रख सकते हैं, जो सूर्य देव को समर्पित है। 
  • पूर्णिमा श्राद्ध - भाद्रपद माह की पूर्णिमा तिथि को पूर्णिमा श्राद्ध किया जाता है, जिसे श्राद्धि पूर्णिमा और प्रोष्ठपदी पूर्णिमा श्राद्ध भी कहा जाता है। यह श्राद्ध पितृ पक्ष से एक दिन पहले पड़ता है, लेकिन पितृ पक्ष का हिस्सा नहीं है। पूर्णिमा तिथि पर मृत्यु प्राप्त करने वालों के लिए महालय श्राद्ध अमावस्या श्राद्ध तिथि पर किया जाता है। पूर्णिमा श्राद्ध पार्वण श्राद्ध होते हैं और इन्हें कुतुप, रौहिण आदि शुभ मुहूर्त में सम्पन्न करना चाहिए। श्राद्ध के अनुष्ठान अपराह्न काल समाप्त होने तक पूरे कर लेने चाहिए और अंत में तर्पण किया जाता है।
  • चंद्र ग्रहण - हिन्दू धर्म में चन्द्रग्रहण एक महत्वपूर्ण धार्मिक घटना है, जिसका धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व है। लेकिन इसका महत्व तभी माना जाता है जब यह नग्न आंखों से स्पष्ट दिखाई दे। उपच्छाया वाले चन्द्रग्रहण, जो नग्न आंखों से नहीं दिखाई देते, उनका पंचांग में समावेश नहीं होता और न ही कोई ग्रहण से सम्बन्धित कर्मकाण्ड किया जाता है। केवल प्रच्छाया वाले चन्द्रग्रहण, जो नग्न आंखों से दृष्टिगोचर होते हैं, धार्मिक कर्मकाण्डों के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं और सभी परम्परागत पंचांग इन्हीं को सम्मिलित करते हैं।
  • भाद्रपद पूर्णिमा व्रत - हिन्दू धर्म में पूर्णिमा व्रत अत्यन्त महत्वपूर्ण माना जाता है, जो प्रत्येक माह की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को किया जाता है। बत्तीसी पूर्णिमा व्रत, जिसे द्वात्रिंशी पूर्णिमा व्रत भी कहा जाता है, भविष्यपुराण में वर्णित है और इसके अनुसार मार्गशीर्ष से भाद्रपद और पौष माह की पूर्णिमा तक व्रत करना चाहिए। इस व्रत से सुख-सौभाग्य, पुत्र-पौत्रादि की प्राप्ति होती है और भगवान विष्णु के पूजन के लिए भी पूर्णिमा तिथि महत्वपूर्ण है। पूर्णिमा के दिन चन्द्रदेव की उपासना का विशेष लाभ होता है और स्कन्दपुराण, पद्मपुराण, नारदपुराण, भविष्यपुराण और महाभारत जैसे धार्मिक ग्रन्थों में इसका उल्लेख है। पूर्णिमा व्रत पापों के क्षय, पुण्य वृद्धि और मानसिक शुद्धि के लिए फलदायी माना गया है।

........................................................................................................
यह भी जाने

संबंधित लेख

HomeBook PoojaBook PoojaTempleTempleKundliKundliPanchangPanchang