अगस्त का महीना भारत में धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सवों का एक जीवंत समय होता है, जब प्रकृति और आस्था का अनूठा संगम देखने को मिलता है। इस माह में मानसून की बारिश से धरती हरियाली से आच्छादित हो जाती है और चारों ओर ताजगी का माहौल होता है।
नाग पंचमी हर साल पूरे श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जाती है। यह त्योहार नाग देवताओं की पूजा का खास अवसर होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि नाग वंश की शुरुआत कैसे हुई? और कौन थे इनके माता-पिता? आइए जानते हैं इस पौराणिक कथा के बारे में।
मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित महाकालेश्वर मंदिर अपने आप में अत्यंत प्रसिद्ध है। लेकिन इस मंदिर परिसर के ऊपर एक और खास मंदिर है, जिसका नाम है नागचंद्रेश्वर मंदिर। यह मंदिर नाग पंचमी के दिन ही भक्तों के लिए खोल दिया जाता है।
नाग देवता भारतीय संस्कृति और धर्म में बेहद महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। उन्हें धन, समृद्धि और सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है। खासकर नाग पंचमी का त्योहार नागों की पूजा-अर्चना का प्रमुख अवसर होता है।
नाग पंचमी का त्योहार इस साल 29 जुलाई 2025 को मनाया जाएगा। हिंदू धर्म में इस दिन का खास महत्व है। मान्यता है कि इस दिन नाग देवता की पूजा करने से विष और भय का नाश होता है।
नागपंचमी के मौके पर एक तरफ जहां सांपों की पूजा की जाती है, वहीं दूसरी ओर उनसे जुड़ी कई मान्यताएं और अंधविश्वास भी सदियों से हमारे समाज में प्रचलित हैं।
सावन महीने की शुक्ल पंचमी तिथि को नाग पंचमी का पर्व पूरे भारत में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है। इस दिन नाग देवता और भगवान शिव की पूजा की जाती है।
सावन महीने की पंचमी तिथि को मनाई जाने वाली नाग पंचमी सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि भक्ति, विश्वास और भाई-बहन के रिश्ते का प्रतीक भी है। इस दिन महिलाएं नाग देवता को भाई मानकर पूजा करती हैं।
सावन का महीना भगवान शिव को बहुत प्रिय होता है। इस महीने में कई खास व्रत-त्योहार आते हैं, उन्हीं में से एक है नाग पंचमी। शिव पुराण में इसका खास महत्व बताया गया है। नाग पंचमी सावन महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है।