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व्रत एवं त्यौहार

दामोदर द्वादशी 2025
दामोदर द्वादशी 2025
सावन मास का प्रत्येक दिन धार्मिक रूप से विशेष माना जाता है, लेकिन दामोदर द्वादशी दामोदर द्वादशी विशेष रूप से भगवान विष्णु के ‘दामोदर’ स्वरूप की पूजा के लिए प्रसिद्ध है।
सावन पुत्रदा एकादशी की पूजा विधि
सावन पुत्रदा एकादशी की पूजा विधि
श्रावण मास का प्रत्येक पर्व और व्रत अत्यंत पवित्र और शुभ माना जाता है। ऐसे में जब सावन माह की पुत्रदा एकादशी आती है, तो इसका महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है।
पुत्रदा एकादशी के उपाय
पुत्रदा एकादशी के उपाय
हिंदू धर्म में एकादशी व्रतों का विशेष स्थान है, और श्रावण मास में आने वाली पुत्रदा एकादशी संतान सुख की कामना करने वाले दंपतियों के लिए अत्यंत फलदायी मानी जाती है। वर्ष 2025 में यह पावन तिथि 5 अगस्त, मंगलवार को आ रही है।
सावन पुत्रदा एकादशी 2025
सावन पुत्रदा एकादशी 2025
सावन माह की एकादशी तिथि को पुत्रदा एकादशी कहा जाता है। यह तिथि हिंदू पंचांग के अनुसार श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को आती है।
22 से 31 अगस्त  2025 व्रत-त्योहार
22 से 31 अगस्त 2025 व्रत-त्योहार
अंग्रेजी कैलेंडर के हिसाब से अगस्त साल का आठवां महीना होता है। अगस्त का चौथा हफ्ता विभिन्न त्योहारों और उत्सवों से भरा हुआ है। इस हफ्ते में कई महत्वपूर्ण त्योहार पड़ेंगे। जिनमेंहरतालिका तीज, गणेश चतुर्थी, ऋषि पंचमी, ललिता सप्तमी, राधा अष्टमी और अन्य शामिल हैं।
15 से 21 अगस्त 2025 व्रत-त्योहार
15 से 21 अगस्त 2025 व्रत-त्योहार
अंग्रेजी कैलेंडर के हिसाब से अगस्त साल का 8वां महीना होता है। अगस्त का तीसरा हफ्ता विभिन्न व्रत और त्योहारों से भरा हुआ है। इस हफ्ते में कई महत्वपूर्ण त्योहार पड़ेंगे। जिनमें जन्माष्टमी, शीतला सातम, अजा एकादशी, मासिक शिवरात्रि और अन्य शामिल हैं।
8 से 14 अगस्त 2025 व्रत-त्योहार
8 से 14 अगस्त 2025 व्रत-त्योहार
अंग्रेजी कैलेंडर के हिसाब से अगस्त साल का 8वां महीना होता है। अगस्त का दूसरा हफ्ता विभिन्न व्रत और त्योहारों से भरा हुआ है। इस हफ्ते में कई महत्वपूर्ण त्योहार पड़ेंगे। जिनमें रक्षाबंधन, श्रावण पूर्णिमा, कजरी तीज और अन्य शामिल और अन्य शामिल हैं।
1 से 7 अगस्त 2025 व्रत-त्योहार
1 से 7 अगस्त 2025 व्रत-त्योहार
अंग्रेजी कैलेंडर के हिसाब से अगस्त साल का 8वां महीना होता है। अगस्त का पहले हफ्ते में कई व्रत और त्योहार पड़ने वाले हैं। जिनमें मासिक दुर्गाष्टमी, श्रावण का चौथा सोमवार, पुत्रदा एकादशी और अन्य शामिल हैं।
कल्कि धाम मंदिर का इतिहास
कल्कि धाम मंदिर का इतिहास
सनातन परंपरा में भगवान विष्णु के दस अवतारों की विशेष मान्यता है। इन दस अवतारों में अंतिम अवतार ‘कल्कि अवतार’ माना गया है, जो कलयुग के अंत में अधर्म का नाश करने और धर्म की पुनः स्थापना के लिए प्रकट होंगे।
कल्कि जयंती पर ऐसे करें पूजा
कल्कि जयंती पर ऐसे करें पूजा
हिंदू धर्म में भगवान विष्णु के कल्कि अवतार को कलयुग का उद्धारकर्ता माना गया है। पुराणों के अनुसार जब कलयुग में अधर्म, अन्याय और अराजकता अपने चरम पर होगी, तब भगवान विष्णु कल्कि रूप में अवतार लेकर धर्म की पुनर्स्थापना करेंगे।
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