हरियाली तीज हिंदू धर्म का एक पावन और विशेष पर्व है, जिसे श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को पूरे भक्ति भाव से मनाया जाता है। यह पर्व सुहागिन स्त्रियों द्वारा अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए रखा जाता है।
हिन्दू पंचांग के अनुसार, हरियाली तीज श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। यह पर्व विशेष रूप से महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।
सावन मास में चंद्र दर्शन का विशेष महत्व होता है। यह दिन चंद्रमा के प्रथम दर्शन का होता है, जो अमावस्या के बाद शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को आता है। 2025 में सावन मास का चंद्र दर्शन 26 जुलाई, शनिवार को मनाया जाएगा।
आदि अमावस्या, जिसे दक्षिण भारत विशेषकर तमिलनाडु में अत्यंत श्रद्धा के साथ मनाया जाता है, एक पवित्र अमावस्या तिथि है जो आध्यात्मिक शुद्धि और पितृ कर्मों के लिए विशेष मानी जाती है।
सावन मास भगवान शिव की आराधना का सबसे उत्तम समय माना जाता है। इस पवित्र माह में आने वाले प्रत्येक व्रत, पर्व और योग का विशेष महत्व होता है। खासकर प्रदोष व्रत, जो त्रयोदशी तिथि को आता है, शिव उपासना के लिए सर्वश्रेष्ठ समय माना जाता है।
सावन मास भगवान शिव की उपासना का सबसे पवित्र समय माना जाता है। इस मास में आने वाले प्रत्येक सोमवार और प्रदोष व्रत का विशेष महत्व होता है। प्रदोष व्रत त्रयोदशी तिथि को आता है और यह दिन भगवान शिव की कृपा प्राप्ति के लिए उपयुक्त माना जाता है।
कामिका एकादशी श्रावण मास की पहली एकादशी होती है, जो हर वर्ष आषाढ़ शुक्ल पक्ष की समाप्ति के बाद आती है। यह दिन भगवान विष्णु को समर्पित होता है और व्रत, पूजा व मंत्र जाप के माध्यम से भगवान की कृपा पाने का उत्तम अवसर माना जाता है।
हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का अत्यंत महत्व है, और उसमें भी कामिका एकादशी, जो श्रावण मास में आती है, विशेष पुण्यदायिनी मानी जाती है। यह व्रत भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने और पापों से मुक्ति के लिए रखा जाता है।
श्रावण मास का प्रत्येक सोमवार धार्मिक दृष्टि से अत्यंत फलदायी माना गया है, लेकिन जब सोमवार के दिन एकादशी जैसे पुण्यदायी व्रत का संयोग बने, तो यह दिन दुर्लभ और चमत्कारी माना जाता है।
श्रावण मास में जब कोई एकादशी व्रत सोमवार के दिन पड़ता है, तो यह दिन अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। वर्ष 2025 में सावन का दूसरा सोमवार 21 जुलाई को है और इसी दिन कामिका एकादशी भी पड़ रही है।