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व्रत एवं त्यौहार

सावन के पहले प्रदोष व्रत पर अद्भुत संयोग
सावन के पहले प्रदोष व्रत पर अद्भुत संयोग
सावन मास भगवान शिव की आराधना का सबसे उत्तम समय माना जाता है। इस पवित्र माह में आने वाले प्रत्येक व्रत, पर्व और योग का विशेष महत्व होता है। खासकर प्रदोष व्रत, जो त्रयोदशी तिथि को आता है, शिव उपासना के लिए सर्वश्रेष्ठ समय माना जाता है।
सावन प्रदोष व्रत कब है
सावन प्रदोष व्रत कब है
सावन मास भगवान शिव की उपासना का सबसे पवित्र समय माना जाता है। इस मास में आने वाले प्रत्येक सोमवार और प्रदोष व्रत का विशेष महत्व होता है। प्रदोष व्रत त्रयोदशी तिथि को आता है और यह दिन भगवान शिव की कृपा प्राप्ति के लिए उपयुक्त माना जाता है।
कामिका एकादशी पर मंत्रों का जाप
कामिका एकादशी पर मंत्रों का जाप
कामिका एकादशी श्रावण मास की पहली एकादशी होती है, जो हर वर्ष आषाढ़ शुक्ल पक्ष की समाप्ति के बाद आती है। यह दिन भगवान विष्णु को समर्पित होता है और व्रत, पूजा व मंत्र जाप के माध्यम से भगवान की कृपा पाने का उत्तम अवसर माना जाता है।
कामिका एकादशी पर करें इन चीजों का दान
कामिका एकादशी पर करें इन चीजों का दान
हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का अत्यंत महत्व है, और उसमें भी कामिका एकादशी, जो श्रावण मास में आती है, विशेष पुण्यदायिनी मानी जाती है। यह व्रत भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने और पापों से मुक्ति के लिए रखा जाता है।
सावन दूसरे सोमवार पर 4 राशियों को लाभ
सावन दूसरे सोमवार पर 4 राशियों को लाभ
श्रावण मास का प्रत्येक सोमवार धार्मिक दृष्टि से अत्यंत फलदायी माना गया है, लेकिन जब सोमवार के दिन एकादशी जैसे पुण्यदायी व्रत का संयोग बने, तो यह दिन दुर्लभ और चमत्कारी माना जाता है।
सावन कामिका एकादशी व्रत विधि
सावन कामिका एकादशी व्रत विधि
श्रावण मास में जब कोई एकादशी व्रत सोमवार के दिन पड़ता है, तो यह दिन अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। वर्ष 2025 में सावन का दूसरा सोमवार 21 जुलाई को है और इसी दिन कामिका एकादशी भी पड़ रही है।
सावन कामिका एकादशी 2025
सावन कामिका एकादशी 2025
श्रावण मास में आने वाली एकादशियों का विशेष महत्व होता है और उनमें भी कामिका एकादशी का स्थान अत्यंत पुण्यदायिनी माना गया है। यह एकादशी भगवान विष्णु की उपासना का श्रेष्ठ दिन होता है और इसे श्रद्धा, भक्ति एवं नियमपूर्वक रखने से समस्त पापों का क्षय होता है।
सावन में कब है मासिक कार्तिगाई
सावन में कब है मासिक कार्तिगाई
हिंदू पंचांग में मासिक कार्तिगाई एक विशेष पर्व के रूप में मनाई जाती है जो भगवान कार्तिकेय ‘मुरुगन’ को समर्पित होती है। दक्षिण भारत में यह पर्व विशेष रूप से तमिल समुदाय द्वारा बड़े श्रद्धा भाव से मनाया जाता है।
विवाह पंचमी पर शादी क्यों नहीं होती ?
विवाह पंचमी पर शादी क्यों नहीं होती ?
मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को विवाह पंचमी का त्योहार मनाया जाता है। यह हिंदू धर्म का प्रमुख पर्व है। आमतौर पर हिंदू कैलेंडर के अनुसार यह तिथि नवंबर या दिसंबर के महीने में आती है।
नवंबर-दिसंबर से लेकर साल 2025 तक यह हैं शादी के लिए सबसे शुभ मुहूर्त
नवंबर-दिसंबर से लेकर साल 2025 तक यह हैं शादी के लिए सबसे शुभ मुहूर्त
हिन्दू धर्म में मुहुर्त का कितना महत्व है इस बात को समझने के लिए इतना ही काफी है कि हम मुहुर्त न होने पर शादी विवाह जैसी रस्मों को भी कई कई महिनों तक रोक लेते हैं।
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