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व्रत एवं त्यौहार

सावन का दूसरा मंगला गौरी व्रत
सावन का दूसरा मंगला गौरी व्रत
हिंदू धर्म में सावन मास का विशेष महत्व होता है, विशेषकर विवाहित महिलाओं के लिए यह समय अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। इस मास में आने वाले प्रत्येक मंगलवार को मंगला गौरी व्रत रखा जाता है।
मंगला गौरी व्रत के उपाय
मंगला गौरी व्रत के उपाय
मंगला गौरी व्रत सावन माह के मंगलवार को विशेष रूप से मनाया जाता है। यह व्रत माता पार्वती को समर्पित होता है, जिनकी पूजा से विवाह में आने वाली सभी बाधाएं दूर होती हैं।
मंगला गौरी व्रत स्तोत्र पाठ
मंगला गौरी व्रत स्तोत्र पाठ
श्रावण मास के मंगलवारों को किया जाने वाला मंगला गौरी व्रत विवाहित महिलाओं के लिए विशेष रूप से शुभ माना जाता है। यह व्रत माता पार्वती और भगवान शिव को समर्पित है और इसका पालन पति की दीर्घायु, वैवाहिक जीवन की सुख-शांति और सौभाग्य के लिए किया जाता है।
मंगला गौरी व्रत उद्यापन विधि
मंगला गौरी व्रत उद्यापन विधि
श्रावण मास के मंगलवारी व्रतों में मंगला गौरी व्रत का विशेष स्थान है। विवाहित महिलाएं यह व्रत अपने सुहाग की रक्षा, पति की लंबी आयु और वैवाहिक जीवन की सुख-शांति के लिए करती हैं।
मंगला गौरी व्रत कैसे करें
मंगला गौरी व्रत कैसे करें
श्रावण मास, जिसे सावन कहा जाता है, भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना का सबसे पावन महीना माना जाता है। इस महीने में मंगलवार के दिन मंगला गौरी व्रत का विशेष महत्व है।
गुरु पूर्णिमा पर इन राशियों के खुलेंगे भाग्य
गुरु पूर्णिमा पर इन राशियों के खुलेंगे भाग्य
गुरु पूर्णिमा का पर्व जहां अध्यात्म और गुरु भक्ति का प्रतीक होता है, वहीं ज्योतिषीय दृष्टिकोण से भी यह दिन अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। 10 जुलाई 2025, गुरुवार को मनाई जाने वाली गुरु पूर्णिमा पर बृहस्पति ग्रह (गुरु) मिथुन राशि में गोचर करेंगे।
गुरु पूर्णिमा के उपाय
गुरु पूर्णिमा के उपाय
गुरु पूर्णिमा का दिन न केवल आध्यात्मिक उन्नति के लिए, बल्कि ज्योतिषीय दृष्टिकोण से भी अत्यंत शुभ माना गया है। यह पर्व इस वर्ष 10 जुलाई, गुरुवार को मनाया जाएगा।
गुरु पूर्णिमा पर गुरू के अलावा इनकी पूजा करें
गुरु पूर्णिमा पर गुरू के अलावा इनकी पूजा करें
गुरु पूर्णिमा का पर्व भारतीय संस्कृति में गुरु-शिष्य परंपरा की दिव्यता और गंभीरता को दर्शाने वाला अत्यंत महत्वपूर्ण दिन है। इस दिन शिष्य अपने गुरुओं के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हैं और उनके ज्ञान को नमन करते हैं।
गुरु पूर्णिमा पर क्यों करते हैं व्यास पूजा
गुरु पूर्णिमा पर क्यों करते हैं व्यास पूजा
हिंदू धर्म में गुरु का स्थान ईश्वर से भी ऊपर माना गया है। गुरु न केवल ज्ञान का स्रोत होते हैं, बल्कि वे शिष्य के जीवन को दिशा देने वाले मार्गदर्शक भी होते हैं। गुरु पूर्णिमा का पर्व इसी गुरु-शिष्य परंपरा की गौरवशाली विरासत का प्रतीक है।
गुरु पूर्णिमा की कथा
गुरु पूर्णिमा की कथा
गुरु पूर्णिमा, जिसे व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है, हिंदू धर्म में एक अत्यंत पावन पर्व के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व महर्षि वेदव्यास के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में मनाया जाता है, जो भारतीय दर्शन, ज्ञान और अध्यात्म के क्षेत्र में अमूल्य योगदान देने वाले महान ऋषि थे।
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