Fourth Mangala Gauri Vrat 2025: कब है सावन का अंतिम मंगला गौरी व्रत, जानें शुभ मुहूर्त और पूजन विधि
हिंदू पंचांग के अनुसार सावन मास के प्रत्येक मंगलवार को विवाहित महिलाएं मंगला गौरी व्रत करती हैं। यह व्रत माता पार्वती को समर्पित होता है और इसे विशेष रूप से पति की लंबी आयु, वैवाहिक सुख और अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए किया जाता है। 5 अगस्त को सावन का चौथा मंगलवार है, जिसे मंगला गौरी व्रत के रूप में मनाया जा रहा है।
चौथा मंगला गौरी व्रत शुभ मुहूर्त
मंगला गौरी व्रत के दिन सूर्योदय और सूर्यास्त का समय पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। पूजा के लिए दिन का मध्याह्न और गोधूलि वेला भी शुभ होता है, लेकिन पारंपरिक रूप से प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में पूजा का अधिक महत्व माना गया है।
- सूर्योदय: सुबह 5:47 बजे
- सूर्यास्त: शाम 7:10 बजे
चौथी मंगला गौरी व्रत की पूजा की विधि
- ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ, खासकर लाल या पीले रंग के कपड़े पहनें।
- पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करें और गंगाजल का छिड़काव करके उसे शुद्ध करें।
- एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं और उस पर माता पार्वती (मंगला गौरी) की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
- माता को पंचामृत या गंगाजल से स्नान कराएं। इसके बाद सोलह श्रृंगार की सामग्री जैसे कंघी, चूड़ियां, बिंदी, सिंदूर, इत्र, वस्त्र आदि अर्पित करें। स्वयं भी सोलह श्रृंगार करें, यह व्रत की परंपरा का हिस्सा है।
- माता को 16 प्रकार के फल, फूल, पत्ते, मिठाई, सुपारी, पान और अनाज अर्पित करें।
- माता के सामने घी का दीपक जलाएं और आरती करें। पूजा के अंत में मंगला गौरी व्रत कथा का पाठ करें या सुनें।
- अंत में आरती करें और पूजा समाप्ति पर देवी से जाने-अनजाने में हुई सभी गलतियों के लिए क्षमा मांगे।
मां मंगला गौरी विशेष मंत्र
- ‘ॐ गौरी शंकराय नमः’
- ‘सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते।।’
- ‘ॐ उमामहेश्वराय नम: ह्रीं मंगले गौरि विवाहबाधां नाशय स्वाहा।।’