हर साल सूर्य देव जब मिथुन राशि से निकलकर कर्क राशि में प्रवेश करते हैं, तो यह घटना कर्क संक्रांति कहलाती है। यह संक्रांति केवल खगोलीय परिवर्तन नहीं है, बल्कि ज्योतिषीय दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। कर्क संक्रांति के साथ ही सूर्य दक्षिणायन हो जाते हैं, जिससे जीवन के विभिन्न क्षेत्रों पर प्रभाव पड़ता है। वर्ष 2025 में कर्क संक्रांति 16 जुलाई को हो रही है।
सूर्य के कर्क राशि में प्रवेश करते ही कुंडली के चौथे भाव को सक्रिय कर देता है। इससे घर-परिवार, वाहन, माता, मानसिक शांति और निजी सुख-सुविधाओं पर प्रभाव पड़ता है। चूंकि सूर्य सभी ग्रहों का राजा है, इसलिए इसका गोचर अन्य ग्रहों के प्रभाव को भी गति देता है।
इस परिवर्तन का प्रभाव सभी 12 राशियों पर अलग-अलग पड़ता है। कुछ राशियों के लिए यह गोचर लाभकारी सिद्ध होगा, वहीं कुछ के लिए सावधानी का संकेत देगा।
कर्क संक्रांति के बाद धनु राशि के जातकों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। ज्योतिष गणनाओं के अनुसार, सूर्य का यह गोचर धनु जातकों के अष्टम भाव को सक्रिय करता है, जो जीवन में अचानक होने वाली घटनाओं, रिस्क, चोट, दुर्घटना, बाधाओं और राजकीय मामलों का कारक होता है।