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व्रत एवं त्यौहार

गुरु पूर्णिमा पर गुरू के अलावा इनकी पूजा करें
गुरु पूर्णिमा पर गुरू के अलावा इनकी पूजा करें
गुरु पूर्णिमा का पर्व भारतीय संस्कृति में गुरु-शिष्य परंपरा की दिव्यता और गंभीरता को दर्शाने वाला अत्यंत महत्वपूर्ण दिन है। इस दिन शिष्य अपने गुरुओं के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हैं और उनके ज्ञान को नमन करते हैं।
गुरु पूर्णिमा पर क्यों करते हैं व्यास पूजा
गुरु पूर्णिमा पर क्यों करते हैं व्यास पूजा
हिंदू धर्म में गुरु का स्थान ईश्वर से भी ऊपर माना गया है। गुरु न केवल ज्ञान का स्रोत होते हैं, बल्कि वे शिष्य के जीवन को दिशा देने वाले मार्गदर्शक भी होते हैं। गुरु पूर्णिमा का पर्व इसी गुरु-शिष्य परंपरा की गौरवशाली विरासत का प्रतीक है।
गुरु पूर्णिमा की कथा
गुरु पूर्णिमा की कथा
गुरु पूर्णिमा, जिसे व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है, हिंदू धर्म में एक अत्यंत पावन पर्व के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व महर्षि वेदव्यास के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में मनाया जाता है, जो भारतीय दर्शन, ज्ञान और अध्यात्म के क्षेत्र में अमूल्य योगदान देने वाले महान ऋषि थे।
गुरु पूर्णिमा 2025 की तिथि
गुरु पूर्णिमा 2025 की तिथि
गुरु पूर्णिमा का पर्व हिंदू धर्म का एक अत्यंत पावन और श्रद्धा से जुड़ा उत्सव है, जो गुरु के प्रति समर्पण, श्रद्धा और कृतज्ञता को दर्शाता है। इस दिन शिष्य अपने गुरु का पूजन कर उन्हें प्रणाम करते हैं और उनके आशीर्वाद से ज्ञान, विवेक और जीवन की दिशा प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।
कोकिला व्रत की कथा
कोकिला व्रत की कथा
कोकिला व्रत हिंदू धर्म का एक अत्यंत श्रद्धा पूर्वक मनाया जाने वाला व्रत है, जो आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि को रखा जाता है। यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित होता है, और इसे अखंड सौभाग्य, मनचाहे वर की प्राप्ति और सभी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए महिलाएं करती हैं।
कोकिला व्रत 2025 की तिथि
कोकिला व्रत 2025 की तिथि
कोकिला व्रत हिंदू धर्म में आषाढ़ पूर्णिमा के दिन रखा जाने वाला एक विशेष व्रत है, जो विशेष रूप से स्त्रियों द्वारा किया जाता है। इस दिन देवी सीता के स्वरूप की पूजा की जाती है और कोयल (कोकिला) के प्रतीक रूप में स्त्रियां स्वयं को देवी के प्रति समर्पित करती हैं।
सावन मास के व्रत-त्योहार की लिस्ट
सावन मास के व्रत-त्योहार की लिस्ट
श्रावण मास को शिव आराधना का सबसे पवित्र समय माना गया है। हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष 2025 में श्रावण माह की शुरुआत 11 जुलाई, शुक्रवार से हो रही है और समापन 9 अगस्त को रक्षाबंधन के साथ होगा।
देवशयनी एकदशी की कथा
देवशयनी एकदशी की कथा
आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी एकादशी कहा जाता है। यह दिन केवल व्रत और उपवास का ही नहीं, बल्कि धार्मिक जागरूकता और मानवीय मूल्यों की मिसाल का भी है।
देवशयनी एकादशी पर राशि अनुसार जपिए ये मंत्र
देवशयनी एकादशी पर राशि अनुसार जपिए ये मंत्र
सनातन धर्म में देवशयनी एकादशी का अत्यधिक महत्व है। यह तिथि आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को आती है और 2025 में यह दिन 6 जुलाई को मनाया जाएगा। इस दिन से चातुर्मास का शुभ आरंभ भी होता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं और इस चार महीने की अवधि में शुभ कार्यों पर विराम लग जाता है।
देवशयनी एकादशी पर क्यों जलाते हैं चौमुखी दीपक
देवशयनी एकादशी पर क्यों जलाते हैं चौमुखी दीपक
सनातन धर्म में हर पर्व, हर परंपरा के पीछे गहरा धार्मिक और आध्यात्मिक तात्पर्य छिपा होता है। देवशयनी एकादशी, जो आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को आती है, 2025 में 6 जुलाई को मनाई जाएगी। इस दिन से चातुर्मास की शुरुआत होती है और भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं।
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