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व्रत एवं त्यौहार

10 महाविद्याओं की 10 दिशाओं की कहानी
10 महाविद्याओं की 10 दिशाओं की कहानी
गुप्त नवरात्रि हिंदू धर्म की सबसे रहस्यमयी और शक्तिशाली साधनाओं में से एक मानी जाती है। यह पर्व वर्ष में माघ और आषाढ़ मास में मनाया जाता है। इसमें देवी दुर्गा के दस महाविद्याओं के रूपों की पूजा की जाती है, जो तांत्रिक साधना की दृष्टि से अत्यंत फलदायी मानी जाती हैं।
आषाढ़ माह गुप्त नवरात्रि के उपाय
आषाढ़ माह गुप्त नवरात्रि के उपाय
गुप्त नवरात्रि का समय तांत्रिक साधनाओं और दिव्य उपायों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। 2025 में आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 26 जून से 04 जुलाई तक मनाई जाएगी। इस नवरात्रि से पूर्व कुछ सरल लेकिन प्रभावशाली उपाय करने से जीवन की समस्याओं का समाधान संभव होता है।
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि में करें इन मंत्रों का जप
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि में करें इन मंत्रों का जप
हिंदू धर्म में गुप्त नवरात्रि का विशेष महत्व है, खासकर उन साधकों के लिए जो तंत्र, मंत्र और साधना के मार्ग पर चलते हैं। वर्ष में दो बार आने वाली गुप्त नवरात्रि, आषाढ़ और माघ माह में मां दुर्गा की दस महाविद्याओं की साधना के लिए सर्वश्रेष्ठ समय मानी जाती है।
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि कब शुरू होंगी
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि कब शुरू होंगी
हिंदू धर्म में नवरात्रि का विशेष स्थान है, और वर्ष में दो बार पड़ने वाली गुप्त नवरात्रि भी साधकों और तांत्रिकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। चैत्र और शारदीय नवरात्रि के अलावा आषाढ़ और माघ मास की गुप्त नवरात्रियां विशेष रूप से साधना, तांत्रिक क्रियाओं और मां दुर्गा के दस महाविद्याओं की उपासना के लिए जानी जाती हैं।
आषाढ़ अमावस्या चालीसा पाठ
आषाढ़ अमावस्या चालीसा पाठ
हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि को पितरों की तिथि माना गया है। यह दिन पूर्वजों की आत्मा की शांति, तर्पण और श्रद्धा से जुड़े कार्यों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। खासतौर पर आषाढ़ अमावस्या का दिन पितृ दोष निवारण के लिए विशेष फलदायी होता है।
आषाढ़ अमावस्या पर क्या दान करें
आषाढ़ अमावस्या पर क्या दान करें
हिंदू पंचांग के अनुसार आषाढ़ अमावस्या का दिन पितरों की कृपा पाने और दान-पुण्य के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है। 2025 में यह तिथि 25 जून, बुधवार को पड़ रही है।
आषाढ़ अमावस्या पूजा विधि
आषाढ़ अमावस्या पूजा विधि
हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह की अमावस्या तिथि का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व होता है। यह दिन पितरों की शांति और उनके आशीर्वाद की प्राप्ति के लिए उत्तम माना जाता है।
दर्श अमावस्या पूजा विधि
दर्श अमावस्या पूजा विधि
हिंदू पंचांग में प्रत्येक अमावस्या तिथि को विशेष धार्मिक महत्त्व प्राप्त है, लेकिन दर्श अमावस्या का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण एवं विशेष माना जाता है। यह दिन विशेष रूप से पितृ तर्पण और पिंडदान जैसे कर्मों के लिए समर्पित होता है।
आषाढ़ अमावस्या के उपाय
आषाढ़ अमावस्या के उपाय
हिंदू धर्म में पितृ दोष को अत्यंत गंभीर माना गया है। यह दोष तब उत्पन्न होता है जब पूर्वजों की आत्मा किसी कारणवश अशांत होती है या पितरों का उचित विधि से श्राद्ध, तर्पण या पूजा न की जाए।
आषाढ़ अमावस्या 2025
आषाढ़ अमावस्या 2025
हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि को अमावस्या कहा जाता है। जब अमावस्या सोमवती यानी सोमवार को आती है, या फिर आषाढ़ जैसे पवित्र महीनों में होती है, तब इसका धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है।
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