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व्रत एवं त्यौहार

मां कात्यायनी की पूजा विधि और कथा
मां कात्यायनी की पूजा विधि और कथा
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2025 के छठे दिन मां दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की आराधना की जाती है। यह दिन साधकों और भक्तों के लिए विशेष फलदायी माना जाता है, खासकर उन कन्याओं के लिए जो उत्तम वर की प्राप्ति की कामना करती हैं।
आषाढ़ विनायक चतुर्थी व्रत कथा
आषाढ़ विनायक चतुर्थी व्रत कथा
हिंदू पंचांग के अनुसार, हर महीने शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी मनाई जाती है, लेकिन आषाढ़ मास की विनायक चतुर्थी विशेष रूप से फल्दायाक मानी जाती है। इस दिन भगवान गणेश की पूजा, व्रत और कथा पाठ करने से जीवन के समस्त विघ्न समाप्त होते हैं और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
 आषाढ़ विनायक चतुर्थी पर रवि योग
आषाढ़ विनायक चतुर्थी पर रवि योग
हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहा जाता है। यह तिथि भगवान गणेश को समर्पित होती है और प्रत्येक माह आने वाली चतुर्थी के बीच आषाढ़ की विनायक चतुर्थी का विशेष महत्व होता है।
मां स्कंदमाता की पूजा विधि और कथा
मां स्कंदमाता की पूजा विधि और कथा
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का पांचवां दिन मां दुर्गा के पंचम स्वरूप मां स्कंदमाता की उपासना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। मां स्कंदमाता भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता हैं, जिन्होंने राक्षसों से देवताओं की रक्षा के लिए युद्ध किया था।
मां कूष्मांडा की पूजा विधि और कथा
मां कूष्मांडा की पूजा विधि और कथा
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का चौथा दिन मां दुर्गा के चतुर्थ स्वरूप मां कूष्मांडा की उपासना को समर्पित होता है। मां कूष्मांडा को ब्रह्मांड की रचयिता माना गया है। 'कूष्मांड' शब्द का अर्थ है, ‘कु’ यानी थोड़ा, ‘उष्म’ यानी ऊर्जा और ‘अंड’ यानी ब्रह्मांड।
मां चंद्रघंटा की पूजा विधि और कथा
मां चंद्रघंटा की पूजा विधि और कथा
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का तीसरा दिन मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा को समर्पित होता है। मां का यह रूप सौम्यता और युद्धभाव, दोनों का प्रतीक है। उनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित रहता है, इसी कारण उन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है।
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि और कथा
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि और कथा
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का दूसरा दिन देवी दुर्गा के दूसरे स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी को समर्पित होता है। यह दिन भक्तों के लिए आत्मनियंत्रण, वैराग्य और तपस्या की ऊर्जा को आत्मसात करने का अवसर होता है। मां ब्रह्मचारिणी का नाम ही उनके तपस्विनी स्वरूप को दर्शाता है।
मां शैलपुत्री की पूजा विधि और कथा
मां शैलपुत्री की पूजा विधि और कथा
आषाढ़ माह में पड़ने वाली गुप्त नवरात्रि का आरंभ मां दुर्गा के पहले स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा से होता है। यह दिन साधना, आराधना और आत्मशुद्धि की शुरुआत मानी जाती है। गुप्त नवरात्रि में की जाने वाली पूजा विशेष रूप से तांत्रिक साधकों और आध्यात्मिक जिज्ञासुओं के लिए महत्वपूर्ण होती है।
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि में हवन क्यों करना चाहिए
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि में हवन क्यों करना चाहिए
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2025 का पर्व तंत्र साधना, शक्ति उपासना और देवी कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। यह नवरात्रि गुप्त रूप से मां दुर्गा की साधना के लिए समर्पित होती है, जिसमें विशेष रूप से हवन का आयोजन अत्यंत फलदायी माना गया है।
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि के नियम
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि के नियम
गुप्त नवरात्रि, साल में दो बार माघ और आषाढ़ मास में आती है। यह नवरात्रि तांत्रिक साधना, मंत्र सिद्धि और विशेष रूप से शक्ति की उपासना के लिए मानी जाती है। इस समय देवी दुर्गा के दस महाविद्याओं की पूजा की जाती है और साधक अत्यंत संयम, नियम और गुप्त विधियों से देवी आराधना करते हैं।
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