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व्रत एवं त्यौहार

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि कब शुरू होंगी
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि कब शुरू होंगी
हिंदू धर्म में नवरात्रि का विशेष स्थान है, और वर्ष में दो बार पड़ने वाली गुप्त नवरात्रि भी साधकों और तांत्रिकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। चैत्र और शारदीय नवरात्रि के अलावा आषाढ़ और माघ मास की गुप्त नवरात्रियां विशेष रूप से साधना, तांत्रिक क्रियाओं और मां दुर्गा के दस महाविद्याओं की उपासना के लिए जानी जाती हैं।
आषाढ़ अमावस्या चालीसा पाठ
आषाढ़ अमावस्या चालीसा पाठ
हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि को पितरों की तिथि माना गया है। यह दिन पूर्वजों की आत्मा की शांति, तर्पण और श्रद्धा से जुड़े कार्यों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। खासतौर पर आषाढ़ अमावस्या का दिन पितृ दोष निवारण के लिए विशेष फलदायी होता है।
आषाढ़ अमावस्या पर क्या दान करें
आषाढ़ अमावस्या पर क्या दान करें
हिंदू पंचांग के अनुसार आषाढ़ अमावस्या का दिन पितरों की कृपा पाने और दान-पुण्य के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है। 2025 में यह तिथि 25 जून, बुधवार को पड़ रही है।
आषाढ़ अमावस्या पूजा विधि
आषाढ़ अमावस्या पूजा विधि
हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह की अमावस्या तिथि का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व होता है। यह दिन पितरों की शांति और उनके आशीर्वाद की प्राप्ति के लिए उत्तम माना जाता है।
दर्श अमावस्या पूजा विधि
दर्श अमावस्या पूजा विधि
हिंदू पंचांग में प्रत्येक अमावस्या तिथि को विशेष धार्मिक महत्त्व प्राप्त है, लेकिन दर्श अमावस्या का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण एवं विशेष माना जाता है। यह दिन विशेष रूप से पितृ तर्पण और पिंडदान जैसे कर्मों के लिए समर्पित होता है।
आषाढ़ अमावस्या के उपाय
आषाढ़ अमावस्या के उपाय
हिंदू धर्म में पितृ दोष को अत्यंत गंभीर माना गया है। यह दोष तब उत्पन्न होता है जब पूर्वजों की आत्मा किसी कारणवश अशांत होती है या पितरों का उचित विधि से श्राद्ध, तर्पण या पूजा न की जाए।
आषाढ़ अमावस्या 2025
आषाढ़ अमावस्या 2025
हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि को अमावस्या कहा जाता है। जब अमावस्या सोमवती यानी सोमवार को आती है, या फिर आषाढ़ जैसे पवित्र महीनों में होती है, तब इसका धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है।
जून महीने का अंतिम सोम प्रदोष व्रत
जून महीने का अंतिम सोम प्रदोष व्रत
प्रदोष व्रत हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और फलदायी माना गया है। यह व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है और हर माह के शुक्ल तथा कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। विशेष रूप से जब यह व्रत सोमवार के दिन आता है, तब इसे ‘सोम प्रदोष व्रत’ कहा जाता है, जिसका महत्व और अधिक बढ़ जाता है।
मासिक कार्तिगाई पर दीप प्रज्वलित का महत्व
मासिक कार्तिगाई पर दीप प्रज्वलित का महत्व
कार्तिगाई दीपम जिसे तमिल संस्कृति में विशेष रूप से मासिक कार्तिगाई के नाम से भी जाना जाता है, एक अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र त्योहार है जो मुख्य रूप से तमिलनाडु में मनाया जाता है।
आषाढ़ मासिक कार्तिगाई
आषाढ़ मासिक कार्तिगाई
हिंदू पंचांग के अनुसार, मासिक कार्तिगाई एक विशेष पर्व है जो हर महीने कार्तिगई नक्षत्र के दिन मनाया जाता है। यह पर्व मुख्य रूप से दक्षिण भारत में अत्यधिक श्रद्धा और भक्ति से मनाया जाता है, विशेषकर तमिलनाडु में।
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