हिन्दू पंचांग में देवशयनी एकादशी का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान विष्णु क्षीरसागर में शेषनाग पर योगनिद्रा में चले जाते हैं। इस कारण चार माह तक विवाह जैसे शुभ संस्कार नहीं किए जाते और आत्मसंयम का काल आरम्भ होता है।
वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को वरूथिनी एकादशी कहा जाता है। उत्तर भारतीय पूर्णिमान्त और दक्षिण भारतीय अमान्त पन्चांग में नाम अलग हो सकता है, लेकिन व्रत का दिन एक ही माना जाता है।
चैत्र मास की शुक्ल पक्ष एकादशी को कामदा एकादशी कहा जाता है। यह चैत्र नवरात्रि और राम नवमी के बाद आने वाली पहली एकादशी है। धर्मशास्त्रों में इसे अत्यंत पुण्यदायी बताया गया है।
होलिका दहन और चैत्र नवरात्रि के बीच पड़ने वाली पापमोचनी एकादशी वर्ष की अंतिम एकादशी मानी जाती है। यह एक ऐसा व्रत है जिसके बारे में कहा गया है कि इसके प्रभाव से असम्भव प्रतीत होने वाले पाप भी नष्ट हो जाते हैं।
आमलकी एकादशी महाशिवरात्रि और होली के मध्य पड़ने वाली अत्यंत शुभ तिथि है, जिसका वर्णन पुराणों में मोक्षदायिनी और सर्वसिद्धिदायिनी एकादशी के रूप में मिलता है।
हिंदू धर्म में फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को विजया एकादशी कहा जाता है। यह एकादशी विशेष रूप से विजय, साहस और दृढ़ संकल्प का प्रतीक मानी जाती है।
हिंदू पंचांग में माघ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को जया एकादशी कहा जाता है। यह एकादशी विशेष रूप से भय, पिशाच योनि और नकारात्मक प्रभावों से मुक्ति के लिए जानी जाती है।
हिंदू पंचांग में माघ मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी को षटतिला एकादशी कहा जाता है। यह व्रत भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त करने का महत्वपूर्ण अवसर माना गया है।
हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष आध्यात्मिक महत्व माना गया है। हर माह कृष्ण और शुक्ल पक्ष की ग्यारहवीं तिथि को एकादशी व्रत रखा जाता है। सामान्य रूप से एक वर्ष में 24 एकादशी आती हैं, लेकिन वर्ष 2026 में अधिक मास होने के कारण कुल 26 एकादशी व्रत पड़ने वाले हैं।
दिवाली या दीपावली का पर्व कार्तिक अमावस्या को मनाया जाता है और यह भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई देशों में बसे हिंदू, जैन, सिख और बौद्ध समुदाय के लिए अत्यंत पावन अवसर है।