हिंदू धर्म में मां लक्ष्मी को धन और समृद्धि की देवी माना गया है। मान्यता है कि उनकी विधि-विधान से पूजा करने से जीवन में खुशहाली और सौभाग्य का वास होता है।
दूर्वा अष्टमी का पर्व भगवान गणेश को समर्पित है। गणेश जी को दूर्वा (दूब घास) अत्यंत प्रिय है, इसलिए इस दिन भक्त 21 जोड़ी दूर्वा अर्पित कर उनकी पूजा करते हैं।
दूर्वा अष्टमी भगवान गणेश को समर्पित एक पवित्र पर्व है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन गणेश जी को दूर्वा अर्पित करने और विशेष उपाय करने से जीवन के सभी विघ्न-बाधाएँ दूर होती हैं।
भारतीय संस्कृति और वैदिक परंपरा में दूर्वा घास को अत्यंत पवित्र माना गया है। विशेष रूप से गणेश पूजा में दूर्वा का चढ़ाना अनिवार्य है। मान्यता है कि दूर्वा घास भगवान गणेश को शीघ्र प्रसन्न करने वाली वस्तु है।
दूर्वा अष्टमी का पर्व भगवान गणेश को समर्पित है। इस दिन दूर्वा (हरे घास के तिनके) को विशेष रूप से पवित्र माना जाता है, क्योंकि गणेश जी को दूर्वा अत्यंत प्रिय है।
ललिता सप्तमी को देवी ललिता त्रिपुरा सुंदरी की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से भक्तों को सौभाग्य, स्वास्थ्य और समृद्धि प्राप्त होती है।
भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को गणेश चतुर्थी का पर्व बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। इस साल गणेश उत्सव 27 अगस्त 2025 से शुरू होकर 6 सितंबर 2025 को अनंत चतुर्दशी के दिन समाप्त होगा।
गणेश चतुर्थी का पर्व भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से शुरू होकर अनंत चतुर्दशी तक चलता है। दस दिनों तक चलने वाले इस महापर्व में भक्त घर और पंडालों में गणपति बप्पा की स्थापना करते हैं।
भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को हर साल गणेश चतुर्थी का पर्व बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और मंगलकारी देवता माना गया है। मान्यता है कि उनके पूजन से जीवन की हर बाधा दूर होती है और घर-परिवार में सुख-समृद्धि आती है।
भाद्रपद मास की शुक्ल चतुर्थी को मनाई जाने वाली गणेश चतुर्थी का पर्व इस साल 27 अगस्त 2025 को आ रहा है। इस दिन घर-घर और पंडालों में विघ्नहर्ता गणेश जी की स्थापना की जाएगी और दस दिनों तक उनकी पूजा-अर्चना होगी।