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व्रत एवं त्यौहार

गणेश चतुर्थी पर खरीदी के शुभ मुहूर्त
गणेश चतुर्थी पर खरीदी के शुभ मुहूर्त
भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जाता है। यह दिन भगवान गणेश को समर्पित है, जिन्हें विघ्नहर्ता और प्रथम पूज्य देवता कहा जाता है। इस बार गणेश चतुर्थी 27 अगस्त 2025, बुधवार को पड़ रही है।
गणेश विसर्जन क्यों होता है
गणेश विसर्जन क्यों होता है
भाद्रपद मास की शुक्ल चतुर्थी से शुरू होकर अनंत चतुर्दशी तक चलने वाला गणेशोत्सव पूरे देश में बड़े ही उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। महाराष्ट्र से लेकर देश के विभिन्न हिस्सों में दस दिनों तक गणपति बप्पा का आगमन होता है।
गणपति जी सबसे पहले क्यों पूजे जाते हैं?
गणपति जी सबसे पहले क्यों पूजे जाते हैं?
भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को भगवान गणेश की आराधना का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन गणेश चतुर्थी का पर्व बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। सनातन परंपरा में हर शुभ और मांगलिक कार्य की शुरुआत गणपति बप्पा की पूजा-अर्चना से करने का विधान है।
गणेश जी को तुलसी क्यों नहीं चढ़ाई जाती
गणेश जी को तुलसी क्यों नहीं चढ़ाई जाती
गणेश चतुर्थी हो या कोई अन्य शुभ अवसर, पूजा में सबसे पहले श्रीगणेश का आह्वान किया जाता है। घर में उनकी प्रतिमा या मूर्ति लाने से सुख-समृद्धि आती है और बाधाएं दूर होती हैं। भक्तजन मोदक, लड्डू, दूर्वा, पुष्प, इत्र और सिंदूर जैसी चीजें उन्हें अर्पित करते हैं।
गणेश जी को क्यों कहा जाता है एकदंत
गणेश जी को क्यों कहा जाता है एकदंत
हिंदू धर्म में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और प्रथम पूज्य देवता माना गया है। हर शुभ कार्य की शुरुआत श्री गणेश के स्मरण से ही होती है। गणेश जी के कई नाम प्रचलित हैं, जिनमें से एक है ‘एकदंत’। संस्कृत में ‘एक’ का अर्थ है एक और ‘दंत’ का अर्थ है दांत।
गणेश चतुर्थी पर चांद क्यों नहीं देखते हैं?
गणेश चतुर्थी पर चांद क्यों नहीं देखते हैं?
सनातन धर्म में गणेश चतुर्थी का पर्व बेहद खास माना जाता है। यह दिन विघ्नहर्ता गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस दिन गणपति की विशेष पूजा और घर-घर में उनकी प्रतिमा स्थापित कर श्रद्धा भाव से सेवा की जाती है।
गणेश उत्सव 10 दिन का ही क्यों होता है?
गणेश उत्सव 10 दिन का ही क्यों होता है?
सनातन धर्म में गणेश चतुर्थी का पर्व विशेष महत्व रखता है। इस दिन को विघ्नहर्ता, बुद्धि और ज्ञान के अधिष्ठाता भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को बप्पा का प्राकट्य हुआ था।
हरतालिका तीज की तिथि-मुहूर्त
हरतालिका तीज की तिथि-मुहूर्त
हरतालिका तीज का व्रत सुहागिन महिलाओं और अविवाहित कन्याओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह व्रत भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को रखा जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन माता पार्वती ने कठोर तप कर भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त किया था।
हरतालिका तीज पर मंदिरों के दर्शन
हरतालिका तीज पर मंदिरों के दर्शन
हरतालिका तीज भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष तृतीया को मनाई जाती है। यह पर्व विशेष रूप से सुहागिन महिलाओं और अविवाहित कन्याओं के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन माता पार्वती ने कठोर तप कर भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त किया था।
हरतालिका तीज पूजा विधि
हरतालिका तीज पूजा विधि
हरतालिका तीज भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला महत्वपूर्ण व्रत है। यह व्रत सुहागिन महिलाओं और अविवाहित कन्याओं के लिए विशेष महत्व रखता है।
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