भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को अजा एकादशी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह तिथि आत्मशुद्धि, पापमोचन और मोक्ष प्रदान करने वाली मानी जाती है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, उपवास और दान-पुण्य का विशेष महत्व है।
भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की पहली एकादशी को अजा एकादशी कहा जाता है। वर्ष 2025 में यह पवित्र तिथि ,19 अगस्त, मंगलवार को मनाई जाएगी। यह एकादशी न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि इस वर्ष यह सिद्ध योग और शिववास योग में आने के कारण और भी विशेष मानी जा रही है।
हिंदू धर्म के अनुसार भगवान विष्णु ने सृष्टि की रक्षा के लिए समय-समय पर विभिन्न अवतार लिए। इन्हीं दस प्रमुख अवतारों में से एक है वराह अवतार। पुराणों के अनुसार भगवान विष्णु ने वराह (जंगली सूअर) का रूप धारण कर हिरण्याक्ष नामक राक्षस के हाथों पाताल लोक में दबाई गई पृथ्वी को अपने दांतों पर उठाकर पुनः जल से बाहर निकाला था।
हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक मास की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है। यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य संगम का प्रतीक माना जाता है।
हिंदू पंचांग के अनुसार प्रदोष व्रत हर महीने के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। यह व्रत विशेष रूप से भगवान शिव को समर्पित होता है। भाद्रपद महीने का पहला प्रदोष व्रत 2025 में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्रदोष व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन व्रत रखने और शिवलिंग का पूजन करने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
हर माह की शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को स्कंद षष्ठी का पर्व मनाया जाता है। स्कंद देव यानी भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र कार्तिकेय की पूजा की जाती हैं।
सकट चौथ व्रत करने से भगवान गणेश जी प्रसन्न होते हैं और सभी प्रकार के दुखों को हर लेते हैं। इस दिन माताएं अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य और दीर्घायु की कामना के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। पूजा के दौरान व्रत कथा का पाठ करना बेहद आवश्यक माना गया है।
हिंदू धर्म में माघ माह का विशेष महत्व है। इस साल 14 जनवरी से माघ माह शुरू हो रहा है। माघ माह कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि के पहले दिन से शुरू होकर माघ पूर्णिमा तक चलता है।