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व्रत एवं त्यौहार

हरतालिका तीज पूजा विधि
हरतालिका तीज पूजा विधि
हरतालिका तीज भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला महत्वपूर्ण व्रत है। यह व्रत सुहागिन महिलाओं और अविवाहित कन्याओं के लिए विशेष महत्व रखता है।
पहली बार रख रहे हरतालिका तीज तो जानिए विधि
पहली बार रख रहे हरतालिका तीज तो जानिए विधि
हरतालिका तीज का व्रत भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को रखा जाता है। यह व्रत अखंड सौभाग्य, पति की लंबी उम्र और इच्छित वर की प्राप्ति के लिए किया जाता है।
महिलाएं क्यों करती हैं हरतालिका तीज का व्रत
महिलाएं क्यों करती हैं हरतालिका तीज का व्रत
हरतालिका तीज का व्रत भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को रखा जाता है। यह व्रत विशेष रूप से सुहागिन महिलाओं और अविवाहित कन्याओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
गणेश चतुर्थी क्यों मनाई जाती है
गणेश चतुर्थी क्यों मनाई जाती है
गणेश चतुर्थी, जिसे विनायक चतुर्थी भी कहा जाता है, भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है। यह पर्व विशेष रूप से महाराष्ट्र में बेहद धूमधाम से मनाया जाता है, लेकिन अब इसकी छटा पूरे देश और विदेशों तक फैल चुकी है।
गणपति स्थापना के यम-नियम
गणपति स्थापना के यम-नियम
गणेश चतुर्थी का पर्व पूरे देश में बड़े ही हर्ष और उत्साह के साथ मनाया जाता है। खासकर महाराष्ट्र, गुजरात, मध्यप्रदेश और उत्तर भारत के कई राज्यों में इसकी धूम अलग ही देखने को मिलती है। इस बार गणेश चतुर्थी बुधवार, 27 अगस्त 2025 को मनाई जाएगी।
घर में पहली बार गणपति बैठाने की विधि
घर में पहली बार गणपति बैठाने की विधि
भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश चतुर्थी का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन लोग घरों में बप्पा की स्थापना करके उनकी दस दिनों तक पूजा-अर्चना करते हैं।
गणेश चतुर्थी की संपूर्ण पूजा विधि
गणेश चतुर्थी की संपूर्ण पूजा विधि
भारत में गणेशोत्सव का पर्व भाद्रपद मास की शुक्ल चतुर्थी से लेकर अनंत चतुर्दशी तक (कुल दस दिन) अत्यंत श्रद्धा और उत्साह से मनाया जाता है। इन दस दिनों तक गणपति बाप्पा का स्वागत, स्थापना, पूजन, भोग, आरती और अंत में विसर्जन का विधान है।
गणेश जी की घर पर कैसे करें स्थापना?
गणेश जी की घर पर कैसे करें स्थापना?
गणेश चतुर्थी का पर्व हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन घर-घर गणपति बप्पा का आगमन होता है। लोग उत्साह और श्रद्धा के साथ गणेशजी की मूर्ति स्थापित कर दस दिनों तक उनकी विधिवत पूजा करते हैं।
पिठोरी अमावस्या की कथा
पिठोरी अमावस्या की कथा
भाद्रपद मास की अमावस्या तिथि को पिठोरी अमावस्या कहा जाता है। इसे कुशोत्पाटनी और कुशग्रहणी अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन कुशा एकत्रित करने, पितरों की तृप्ति के लिए तर्पण और पिंडदान करने तथा भगवान शिव और देवी दुर्गा की पूजा करने का विशेष महत्व है।
पिठोरी अमावस्या की पूजा विधि
पिठोरी अमावस्या की पूजा विधि
भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को पिठोरी अमावस्या कहा जाता है। इसे कुशग्रहणी अमावस्या भी कहा जाता है क्योंकि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान कर कुशा एकत्रित करने की परंपरा है।
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