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व्रत एवं त्यौहार

गणपति स्थापना के यम-नियम
गणपति स्थापना के यम-नियम
गणेश चतुर्थी का पर्व पूरे देश में बड़े ही हर्ष और उत्साह के साथ मनाया जाता है। खासकर महाराष्ट्र, गुजरात, मध्यप्रदेश और उत्तर भारत के कई राज्यों में इसकी धूम अलग ही देखने को मिलती है। इस बार गणेश चतुर्थी बुधवार, 27 अगस्त 2025 को मनाई जाएगी।
घर में पहली बार गणपति बैठाने की विधि
घर में पहली बार गणपति बैठाने की विधि
भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश चतुर्थी का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन लोग घरों में बप्पा की स्थापना करके उनकी दस दिनों तक पूजा-अर्चना करते हैं।
गणेश चतुर्थी की संपूर्ण पूजा विधि
गणेश चतुर्थी की संपूर्ण पूजा विधि
भारत में गणेशोत्सव का पर्व भाद्रपद मास की शुक्ल चतुर्थी से लेकर अनंत चतुर्दशी तक (कुल दस दिन) अत्यंत श्रद्धा और उत्साह से मनाया जाता है। इन दस दिनों तक गणपति बाप्पा का स्वागत, स्थापना, पूजन, भोग, आरती और अंत में विसर्जन का विधान है।
गणेश जी की घर पर कैसे करें स्थापना?
गणेश जी की घर पर कैसे करें स्थापना?
गणेश चतुर्थी का पर्व हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन घर-घर गणपति बप्पा का आगमन होता है। लोग उत्साह और श्रद्धा के साथ गणेशजी की मूर्ति स्थापित कर दस दिनों तक उनकी विधिवत पूजा करते हैं।
पिठोरी अमावस्या की कथा
पिठोरी अमावस्या की कथा
भाद्रपद मास की अमावस्या तिथि को पिठोरी अमावस्या कहा जाता है। इसे कुशोत्पाटनी और कुशग्रहणी अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन कुशा एकत्रित करने, पितरों की तृप्ति के लिए तर्पण और पिंडदान करने तथा भगवान शिव और देवी दुर्गा की पूजा करने का विशेष महत्व है।
पिठोरी अमावस्या की पूजा विधि
पिठोरी अमावस्या की पूजा विधि
भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को पिठोरी अमावस्या कहा जाता है। इसे कुशग्रहणी अमावस्या भी कहा जाता है क्योंकि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान कर कुशा एकत्रित करने की परंपरा है।
गणेश चतुर्थी 2025 तिथि और मुहूर्त
गणेश चतुर्थी 2025 तिथि और मुहूर्त
भाद्रपद मास में आने वाली गणेश चतुर्थी को भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है। माना जाता है कि इसी दिन माता पार्वती ने गंगाजल और हल्दी से श्रीगणेश को बनाया था और बाद में भगवान शिव ने उन्हें वरदान देकर गणपति का स्वरूप दिया।
भाद्रपद अमावस्या को पिठोरी और कुशाग्रहणी अमावस्या क्यों कहते हैं
भाद्रपद अमावस्या को पिठोरी और कुशाग्रहणी अमावस्या क्यों कहते हैं
भाद्रपद मास की अमावस्या तिथि का हिंदू धर्म और लोक परंपराओं में विशेष महत्व है। इसे अलग-अलग क्षेत्रों में कुशोत्पाटनी अमावस्या, कुशग्रहणी अमावस्या और पिठोरी अमावस्या कहा जाता है।
पिठोरी अमावस्या 2025 कब है
पिठोरी अमावस्या 2025 कब है
भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को पिठोरी अमावस्या कहा जाता है। हिंदू धर्म में इस तिथि का विशेष महत्व है। भारत के कई हिस्सों में इसे कुशोत्पाटिनी अमावस्या भी कहा जाता है।
वराह अवतार की पौराणिक कहानी
वराह अवतार की पौराणिक कहानी
हिंदू धर्म के प्रमुख ग्रंथों में भगवान विष्णु के दस अवतारों का उल्लेख मिलता है। इन्हीं में से तीसरा अवतार वराह अवतार के रूप में वर्णित है। वराह जयंती के अवसर पर इसी अद्भुत और दिव्य अवतार की स्मृति को मनाया जाता है।
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