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व्रत एवं त्यौहार

उपांग ललिता व्रत कैसे करें
उपांग ललिता व्रत कैसे करें
हिंदू धर्म में हर त्यौहार का अपना महत्वपूर्ण स्थान है और शारदिये नवरात्रि के दौरान रखे जाने वाले व्रतों में से उपांग ललिता व्रत भी अत्यंत विशेष माना जाता है। इस व्रत को ललिता पंचमी के नाम से भी जाना जाता है, जो शारदीय नवरात्रि के 5वें दिन मनाया जाता है।
पितृपक्ष 2025 द्वादशी श्राद्ध मुहूर्त
पितृपक्ष 2025 द्वादशी श्राद्ध मुहूर्त
पितृपक्ष में प्रत्येक तिथि का अपना महत्व होता है और उस दिन विशेष श्राद्ध किया जाता है। इस बार द्वादशी श्राद्ध गुरुवार, 18 सितम्बर 2025 को मनाया जाएगा। इसे सामान्य भाषा में बारस श्राद्ध भी कहा जाता है। यह दिन उन पितरों के लिए समर्पित है जिनका निधन द्वादशी तिथि को हुआ हो।
पितृपक्ष 2025 त्रयोदशी श्राद्ध मुहूर्त
पितृपक्ष 2025 त्रयोदशी श्राद्ध मुहूर्त
पितृपक्ष के दौरान प्रत्येक तिथि का अपना विशेष महत्व होता है। इस क्रम में शुक्रवार, 19 सितम्बर 2025 को त्रयोदशी श्राद्ध किया जाएगा, जिसे सामान्य भाषा में तेरस श्राद्ध कहा जाता है। यह दिन उन पितरों की स्मृति में समर्पित है जिनका निधन त्रयोदशी तिथि को हुआ हो।
पितृपक्ष 2025 का अंतिम दिन अमावस्या श्राद्ध मुहूर्त
पितृपक्ष 2025 का अंतिम दिन अमावस्या श्राद्ध मुहूर्त
पितृपक्ष का अंतिम दिन, जिसे सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या कहा जाता है, सबसे महत्वपूर्ण माना गया है। यह दिन उन सभी पितरों को समर्पित है जिनकी पुण्यतिथि या तो ज्ञात नहीं है, या फिर परिवारजन पूरे पक्ष में अलग-अलग तिथियों पर श्राद्ध करने में सक्षम नहीं हो पाते।
पितृपक्ष 2025 चतुर्दशी श्राद्ध मुहूर्त
पितृपक्ष 2025 चतुर्दशी श्राद्ध मुहूर्त
पितृपक्ष में हर तिथि का अपना विशिष्ट महत्व है और उसी के अनुसार श्राद्ध करने का विधान है। इस क्रम में शनिवार, 20 सितम्बर 2025 को चतुर्दशी श्राद्ध किया जाएगा, जिसे घट चतुर्दशी श्राद्ध, घायल चतुर्दशी श्राद्ध और चौदस श्राद्ध के नाम से भी जाना जाता है।
इंदिरा एकादशी पर कनकधारा स्त्रोत का पाठ
इंदिरा एकादशी पर कनकधारा स्त्रोत का पाठ
इंदिरा एकादशी को पितृ पक्ष की सबसे महत्वपूर्ण तिथियों में से एक माना जाता है। यह अश्विन माह में आती है और इस वर्ष यह 17 सितंबर, बुधवार को पड़ रही है। इंदिरा एकादशी की पूजा न केवल श्राद्ध के लिए बल्कि सफलता और समृद्धि के लिए भी की जाती है।
इंदिरा एकादशी पर राशि अनुसार दान
इंदिरा एकादशी पर राशि अनुसार दान
पितृपक्ष पूर्वजों की आत्मा की शांति और मोक्ष प्राप्ति के लिए सबसे शुभ समय माना जाता है। धार्मिक रूप से इस दौरान किए गए श्राद्ध, तर्पण और दान-पुण्य का विशेष महत्व होता है। पितृपक्ष की इंदिरा एकादशी का अधिक महत्व है, क्योंकि इस दिन पितरों के नाम पर किया गया कोई भी दान उन्हें तृप्त करता है।
इंदिरा एकादशी पर पितृदोष के उपाय
इंदिरा एकादशी पर पितृदोष के उपाय
हिंदू धर्म में पितृ पक्ष को पूर्वजों की आत्मा की शांति और उनके श्राद्ध के लिए अत्यंत शुभ समय माना जाता है। पितृ पक्ष में आने वाली इंदिरा एकादशी का विशेष महत्व है, क्योंकि यह न केवल तर्पण और श्राद्ध के लिए शुभ है, बल्कि पितृदोष से मुक्ति पाने के लिए भी सही तिथि होती है।
इंदिरा एकादशी पर श्राद्ध का महत्व
इंदिरा एकादशी पर श्राद्ध का महत्व
इंदिरा एकादशी आश्विन माह में मनाई जाने वाली 24 एकादशियों में से एक है, जो पितृपक्ष में आती है। धर्मशास्त्र के अनुसार पितृपक्ष को तर्पण और श्राद्ध के लिए सबसे उपयुक्त समय माना जाता है। यह समय विशेष रूप से उन लोगों के लिए उपयुक्त है, जिन्होंने अभी तक अपने पितरों के लिए तर्पण और श्राद्ध नहीं किया है या जो पितृदोष से पीड़ित हैं।
2025 में इंदिरा एकादशी कब मनाई जाएगी
2025 में इंदिरा एकादशी कब मनाई जाएगी
हिंदू धर्म में एकादशी को विशेष महत्व दिया जाता है, और यह साल में 24 बार आती है। चूंकि इंदिरा एकादशी पितृपक्ष में आती है, इसलिए अन्य एकादशियों की तुलना में इसका विशेष महत्व है।
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