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व्रत एवं त्यौहार

पितृपक्ष 2025 षष्ठी श्राद्ध मुहूर्त
पितृपक्ष 2025 षष्ठी श्राद्ध मुहूर्त
हिन्दू धर्म में पितृपक्ष का हर दिन विशिष्ट महत्व रखता है। यह पखवाड़ा पूर्वजों की आत्मा की शांति और तृप्ति के लिए समर्पित होता है। इसी क्रम में वर्ष 2025 में पितृपक्ष का छठा श्राद्ध 12 सितम्बर, शुक्रवार को मनाया जाएगा, जिसे षष्ठी श्राद्ध या छठ श्राद्ध कहा जाता है।
पितृपक्ष 2025 पंचमी श्राद्ध मुहूर्त
पितृपक्ष 2025 पंचमी श्राद्ध मुहूर्त
सनातन धर्म में पितृपक्ष को पूर्वजों की स्मृति और उनके प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का काल माना गया है। इस पखवाड़े में प्रत्येक तिथि का श्राद्ध अलग-अलग महत्व रखता है।
पितृपक्ष 2025 चतुर्थी श्राद्ध मुहूर्त
पितृपक्ष 2025 चतुर्थी श्राद्ध मुहूर्त
सनातन परंपरा में पितृपक्ष का हर दिन विशेष महत्व रखता है। इस अवधि में पूर्वज धरती पर आते हैं और अपने वंशजों से तर्पण, पिंडदान और श्रद्धा की अपेक्षा करते हैं। 2025 में पितृपक्ष का चौथा श्राद्ध 11 सितम्बर, गुरुवार को होगा, जिसे चतुर्थी श्राद्ध या चौथ श्राद्ध कहा जाता है।
पितृपक्ष 2025 तृतीया श्राद्ध मुहूर्त
पितृपक्ष 2025 तृतीया श्राद्ध मुहूर्त
पितृपक्ष का हर दिन पूर्वजों को स्मरण करने और उनकी आत्मा की शांति के लिए समर्पित है। इसी क्रम में 10 सितम्बर 2025, बुधवार को तृतीया श्राद्ध मनाया जाएगा। इसे तीज श्राद्ध भी कहा जाता है।
पितृपक्ष 2025 द्वितीया श्राद्ध मुहूर्त
पितृपक्ष 2025 द्वितीया श्राद्ध मुहूर्त
पितृपक्ष में प्रतिदिन किसी न किसी तिथि का विशेष महत्व होता है। पूर्णिमा और प्रतिपदा के बाद अब 9 सितम्बर 2025, मंगलवार को द्वितीया श्राद्ध मनाया जाएगा। इसे दूज श्राद्ध भी कहा जाता है।
पितृदोष पूजा की 5 विशेष जगह
पितृदोष पूजा की 5 विशेष जगह
वैदिक परंपरा में पितृदोष को गंभीर दोष माना गया है। जब किसी जातक की कुंडली में पितृदोष बनता है तो उसका असर पूरे परिवार पर दिखाई देता है। संतान सुख में बाधा, परिवारिक कलह, आर्थिक तंगी और मानसिक अशांति जैसे परिणाम सामने आते हैं।
पितृदोष दूर करने के उपाय
पितृदोष दूर करने के उपाय
वैदिक ज्योतिष में पितृदोष को बहुत बड़ा दोष माना गया है। कहते हैं कि जब यह दोष कुंडली में बनता है तो जातक को जीवन में कई तरह की बाधाओं का सामना करना पड़ता है।
कुंडली में कब बनता है पितृदोष
कुंडली में कब बनता है पितृदोष
वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार किसी भी जातक के जीवन की दिशा और दशा उसकी जन्मकुंडली से समझी जा सकती है। जन्म के समय ग्रहों और नक्षत्रों की स्थिति मिलकर जातक के भविष्य की तस्वीर बनाते हैं। जहां शुभ योग व्यक्ति को समृद्धि, यश और सफलता दिलाते हैं।
पितृदोष क्या है
पितृदोष क्या है
ज्योतिष और पुराणों में पितृदोष को एक बड़ा दोष माना गया है। आम तौर पर लोग इसे पूर्वजों की आत्मा की अशांति या उनकी नाराजगी से जोड़ देते हैं, लेकिन असलियत थोड़ी गहरी है।
पितृपक्ष में न खाएं ये चीजें
पितृपक्ष में न खाएं ये चीजें
हिंदू धर्म में पितृपक्ष को पूर्वजों को याद करने और उनकी पूजा करने के लिए सबसे पवित्र समयों में से एक माना जाता है। इस समय की 16 दिनों की अवधि विशेष रूप से तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध करने के लिए उपयोग की जाती है, क्योंकि इस समय में किया गया कोई भी कार्य सीधे पूर्वजों तक पहुंचता है।
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